छाया वह काला हिस्सा है जो प्रकाश को रोकने वाली चीज़ के पीछे बनता है। प्रकाश तुम्हारे शरीर के भीतर से नहीं जा सकता, इसलिए तुम्हारे पीछे की ज़मीन को सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता: तुम्हारे ही आकार का वह काला हिस्सा तुम्हारी छाया है।
उदाहरण
उदाहरण 3.7 (इसे करके देखो: छाया के जानवर)
विधि 3.6 वाले लैंप के आगे खिलौने की जगह अपने हाथ रखो: दो उँगलियाँ ऊपर करो तो ख़रगोश के कान बनते हैं, दोनों अंगूठे फँसाओ तो उड़ती हुई चिड़िया। दीवार पर वही आकार दिखता है जो तुम्हारे हाथों ने प्रकाश में से काटा — छाया हमेशा अपनी रोकने वाली चीज़ का वही आकार रखती है, जैसा वह लैंप की ओर से दिखता है।
उदाहरण 3.9 (छाया किस ओर है?)
सुबह सूर्य तुम्हारी एक ओर होता है और तुम्हारी छाया दूसरी ओर पड़ती है। सूर्य की ओर मुँह करो: छाया तुम्हारे पीछे छिप जाती है। सूर्य की ओर पीठ करो: छाया सामने लंबी फैल जाती है। छाया हमेशा ठीक स्रोत के सामने वाली ओर बैठती है।
उदाहरण 3.10 (इसे करके देखो: छाया के चारों ओर खड़िया)
किसी धूप वाली सुबह मैदान में चुपचाप खड़े रहो और कोई साथी तुम्हारी छाया के चारों ओर खड़िया से रेखा खींच दे। दोपहर के खाने के बाद लौटकर उसी जगह खड़े हो जाओ: तुम्हारी छाया अपनी खड़िया-रेखा से बाहर निकल चुकी है और उसकी लंबाई भी बदल गई है! आकाश में सूर्य ने अपनी जगह बदली — और छाया उसके पीछे चली गई। अगला अध्याय सूर्य के पूरे दिन का पीछा करता है।