किसी सजीव का जीवन चक्र उन अवस्थाओं की कतार है जिनसे उसका जीवन गुज़रता है:
- वह जन्म लेता है — यही शुरुआत है;
- वह शावक होता है — तेज़ी से बढ़ता और बदलता है;
- वह वयस्क होता है — पूरा बढ़ चुका; वयस्कों के अपने बच्चे हो सकते हैं;
- वह बूढ़ा होता जाता है, और अंत में वह मरता है।
उदाहरण
उदाहरण 7.2 (तीन जीवन, एक ही रास्ता)
बिल्ली का बच्चा जन्म लेता है, खेलता है और बड़ी बिल्ली बन जाता है, जिसके अपने बच्चे हो सकते हैं, और फिर वह बूढ़ी होती है। चेरी का बीज फूटता है, नन्हा पेड़ सालों तक ऊँचा होता जाता है, वयस्क पेड़ फूल और चेरियाँ बनाता है, और कई दशकों बाद वह मर जाता है। और तुम: शिशु, बालक, और फिर एक दिन बड़े। बिल्ली का बच्चा, चेरी का पेड़, बालक — वही चार अवस्थाएँ।
उदाहरण 7.5 (तस्वीरों की जाँच)
दादाजी की पुरानी तस्वीरों में एक ही व्यक्ति को हर अवस्था में देखा जा सकता है: शिशु, स्कूल जाता बालक, नौजवान, पिता, दादा। वही व्यक्ति, बदलता हुआ शरीर। तस्वीरें जीवन चक्र देखने की छोटी समय-मशीनें हैं।
उदाहरण 7.8 (सेब का बूढ़ा पेड़)
बग़ीचे के सिरे पर झुका हुआ सेब का बूढ़ा पेड़ हर साल कम सेब देता है — वह अपने बुढ़ापे में है। पर उसके सेबों में बीज हैं, और एक बीज बोया जाए तो वह पहले से ही सेब का एक नन्हा पेड़ है जो रास्ता शुरू कर रहा है। बूढ़ा पेड़ मरेगा तब भी सेब के पेड़ ख़त्म नहीं होंगे: उसके बच्चे आगे चलते रहेंगे।