कुछ नन्हे जंतु अपने माता-पिता जैसे बिलकुल नहीं दिखते, और वयस्क बनने के लिए उन्हें अपने शरीर की पूरी बनावट बदलनी पड़ती है। इसी बड़े बदलाव को कायांतरण कहते हैं। टैडपोल मेंढक बन जाता है; इल्ली तितली बन जाती है।
उदाहरण
उदाहरण 8.7 (मेंढक का रास्ता)
तालाब में मेंढक के अंडों से टैडपोल निकलते हैं: गोल सिर, लंबी पूँछ, बिना टाँगों के, और मछलियों की तरह पानी में साँस लेते हुए। फिर, हफ़्ते दर हफ़्ते: पिछली टाँगें निकलती हैं, फिर अगली; पूँछ सिमटकर ग़ायब हो जाती है; और एक दिन एक छोटा मेंढक किनारे पर चढ़ आता है। वही जंतु — नए सिरे से बना।
उदाहरण 8.8 (तितली का रास्ता)
तितली के अंडे से एक इल्ली निकलती है, जो पत्तियाँ खाने और बढ़ने के अलावा कुछ ख़ास नहीं करती। एक दिन वह अपने को एक ख़ोल में लपेट लेती है, जिसे प्यूपा कहते हैं, और हिलना बंद कर देती है। भीतर शरीर नए सिरे से बनता है; कुछ हफ़्तों बाद ख़ोल फटता है, और उसमें से गीले नए डैने खोलती एक तितली निकलती है। अंडा, इल्ली, प्यूपा, तितली: एक ही जंतु की चार अवस्थाएँ।