किसी वायु-पिंड का समतुल्य विभव तापमान वह तापमान है जो उसका होता यदि उसे तब तक उठाया जाता जब तक उसकी सारी वाष्प संघनित होकर बाहर न गिर जाए, फिर शुष्क-रुद्धोष्म रूप से तक नीचे लाया जाता। एक अच्छा सन्निकटन है
जहाँ विभव तापमान है और वायु-पिंड के उत्थापन संघनन तल पर का तापमान।