क्षेत्र रेखा वह वक्र है जो हर जगह क्षेत्र के स्पर्शी हो, और उस पर लगा तीर क्षेत्र की दिशा बताता है। तीन नियम:
- वे धनात्मक आवेशों से निकलती हैं और ऋणात्मक आवेशों पर पहुँचती हैं;
- जहाँ रेखाएँ सटती हैं वहाँ क्षेत्र प्रबल है; जहाँ फैलती हैं, दुर्बल;
- दो रेखाएँ कभी नहीं कटतीं: हर बिंदु पर क्षेत्र की एक ही दिशा होती है।