इंद्रिय शरीर का वह रास्ता है जिससे वह संसार के बारे में जानता है। हमारे पास पाँच हैं:
- दृष्टि — आँखें प्रकाश, रंग और आकार देखती हैं;
- श्रवण — कान ध्वनियाँ सुनते हैं;
- स्पर्श — त्वचा खुरदरा या चिकना, गरम या ठंडा महसूस करती है;
- घ्राण — नाक गरम रोटी की महक लेती है;
- स्वाद — जीभ मीठा, नमकीन, खट्टा चखती है।
উদাহরণ
उदाहरण 1.2 (एक सेब, पाँच इंद्रियाँ)
सेब खाने में हर इंद्रिय काम आती है: तुम उसका लाल छिलका देखते हो, हाथ में उसे चिकना और गोल महसूस करते हो, कुरकुराहट सुनते हो, उसकी महक लेते हो, और उसका मीठा रस चखते हो। पाँच इंद्रियाँ, एक सेब।
उदाहरण 1.3 (इसे करके देखो: ध्वनि-यात्रा)
चुपचाप बैठो, आँखें बंद करो, और थोड़ी देर आस-पास की ध्वनियाँ गिनो: एक गाड़ी, कोई आवाज़, हवा, तुम्हारी अपनी साँस। आँखें बंद हों तो कान वे ध्वनियाँ पकड़ लेते हैं जो व्यस्त आँखों की वजह से छूट गई थीं। ज़्यादातर लोगों को या ऐसी ध्वनियाँ मिलती हैं जिन पर उनका ध्यान ही नहीं गया था।