बीजाणु एक सूक्ष्म कण है, जो बहुत बड़ी संख्या में बनता है और जिससे नया पौधा उग सकता है। बीज (परिभाषा 9.1) के उलट, बीजाणु एक अकेला कण है जिसके भीतर न कोई भोजन-भंडार होता है, न पहले से बना नन्हा पौधा — वह शुरुआत का सबसे नंगा रूप है।
उदाहरण
उदाहरण 24.2 (फ़र्न के पत्तों के नीचे)
गर्मियों के आख़िर में फ़र्न का पत्ता उलटकर देखो: उसकी निचली सतह पर भूरे बिंदुओं की सुथरी क़तारें बनी होती हैं। हर बिंदु हज़ारों बीजाणुओं की एक पुड़िया है; पकने पर पुड़ियाँ फटती हैं, और बीजाणु सबसे महीन धूल की तरह हवा में बह जाते हैं। नम, छायादार ज़मीन पर गिरा बीजाणु — कई चरणों से गुज़रकर — नया फ़र्न बन सकता है।