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जीवविज्ञान · शब्दावली

साँस लेना और छोड़ना क्या है?

अन्य नाम: श्वासोच्छ्वास

परिभाषा 26.1 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय जीवविज्ञान · अध्याय 26 — श्वासोच्छ्वास

श्वासोच्छ्वास दो गतियों का कभी न रुकने वाला बदलाव है:

  • साँस लेना (अंतःश्वसन): छाती फैलती है और हवा नाक या मुँह से भीतर बहती है;
  • साँस छोड़ना (निःश्वसन): छाती ढीली पड़ती है और हवा वापस बाहर बहती है।

आराम में यह जोड़ी मिनट में लगभग 1515 बार दोहराई जाती है — शिशुओं में तेज़, मेहनत में और तेज़ — और तुम्हें इसके बारे में कभी सोचना तक नहीं पड़ता।

उदाहरण

उदाहरण 26.2 (गतियों को देखना)

हथेलियाँ अपनी पसलियों पर चपटी रखो: साँस लेते समय पसलियों का पिंजरा तुम्हारी हथेलियों के नीचे उठता और फैलता है; साँस छोड़ते समय वह वापस बैठ जाता है। सोती हुई बिल्ली के पहलू में भी वही उठना-गिरना दिखता है। ये गतियाँ कभी नहीं रुकतीं — जागते, सोते, पहली किलकारी से आख़िरी दिन तक।

उदाहरण 26.6 (दौड़ने से साँस क्यों फूलती है)

दौड़ते समय तुम्हारी टाँगें ऊर्जा तेज़ी से जलाती हैं — इसलिए उन्हें ऑक्सीजन भी तेज़ चाहिए। साँस मान जाती है: मिनट में लगभग 1515 शांत साँसों से बढ़कर 4040 या उससे भी ज़्यादा, और गहरी, जबकि हृदय (अध्याय 27 अपनी तरफ़ की कहानी कहता है) पहुँचाने की रफ़्तार बढ़ाने के लिए दौड़ पड़ता है। दौड़ के बाद की हाँफ शरीर का अपना ऑक्सीजन-हिसाब चुकाना है।

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