दोलनी अभिक्रिया वह है जिसमें मध्यवर्तियों की सांद्रताएँ आवर्ती रूप से बढ़ती और घटती हैं जबकि समग्र अभिक्रिया साम्य की ओर बढ़ती है। सीमा चक्र सांद्रताओं के आकाश में एक संवृत प्रक्षेप-पथ है जिसकी ओर पड़ोसी प्रक्षेप-पथ अभिसरित होते हैं, ताकि दोलन का आयाम आरंभ-बिंदु से स्वतंत्र हो।