समतल की निर्देशांक-पद्धति में एक मूल बिंदु और से होकर जाने वाले दो अंकित अक्ष होते हैं: क्षैतिज -अक्ष और ऊर्ध्वाधर -अक्ष। तब हर बिंदु के अपने अद्वितीय निर्देशांक होते हैं: उसका भुज और उसकी कोटि । पद्धति लंबकोणिक तब कहलाती है जब अक्ष परस्पर लंब हों और दोनों पर लंबाई का एक ही मात्रक हो। इस अध्याय की सभी पद्धतियाँ लंबकोणिक हैं।
गणित · शब्दावली
निर्देशांक-पद्धति क्या है?
अन्य नाम: निर्देशांक · भुज · कोटि · लंबकोणिक पद्धति