किसी परिपथ के अपने क्षेत्र का उसी में से अभिवाह उसकी धारा के समानुपाती होता है: , जहाँ उसका स्वप्रेरकत्व है (हेनरी, )। परिपथ 1 परिपथ 2 में से जो अभिवाह भेजता है वह है, और सममित रूप से , जहाँ उनका अन्योन्य प्रेरकत्व है (जिसका चिह्न दिशाओं से तय होता है)। तब परिपथ 1 का कुल अभिवाह है।
भौतिकी · शब्दावली