किसी स्वाभाविक रूप से अव्यवस्थित क्षेत्र का अपने आप कोई स्थिर वलन नहीं होता और वह तेज़ी से आपस में बदलती संरूपताओं के किसी समुदाय के रूप में रहता है, और प्रायः तभी वलित होता है जब वह अपने साथी से मिले; लगभग एक-तिहाई मानव प्रोटीन तीस से अधिक अवशेषों का कोई अव्यवस्थित क्षेत्र ढोते हैं, और वे संकेतन तथा नियमन में बहुतायत से हैं, जहाँ कोई लचीला खंड अनेक स्थलों पर फ़ॉस्फ़ोरिलित हो सकता है, बारी-बारी से कई साथियों से बँध सकता है, और किसी योजक का काम कर सकता है। वलित प्रोटीन भी चलते हैं: पार्श्व-शृंखलाएँ पिकोसेकंडों में घूमती हैं, फंदे नैनोसेकंडों से माइक्रोसेकंडों में खुलते हैं, प्रांत माइक्रोसेकंडों से मिलीसेकंडों में कब्ज़े की तरह मुड़ते हैं, और किसी एंज़ाइम का उत्प्रेरक चक्र किसी स्थैतिक ताला-कुंजी के बजाय ऐसी ही गतियों का नृत्य है। कोई क्रिस्टल संरचना किसी संरूपणी समुदाय का एक चित्र है; शेष NMR और आणविक अनुरूपण देखते हैं। बहुसंयोजी अव्यवस्थित प्रोटीन और RNA कोशिकाद्रव्य से अलग होकर तरल बूँदों में भी जम सकते हैं — जैव-आणविक संघनित जैसे केंद्रिकाएँ, तनाव कणिकाएँ और P पिंड — जो बिना किसी झिल्ली के अभिक्रियाएँ सांद्र कर देते हैं, और जिनका बूढ़े होकर ठोस पुंजों में बदल जाना एमिलॉयड रोगों का एक मार्ग है।
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जीवविज्ञान · 术语表