उत्प्रेरक ऐसी स्पीशीज़ है जो किसी अभिक्रिया की दर बढ़ाती है पर उसके समग्र समीकरण में नहीं आती: क्रियाविधि के किसी एक चरण में खपकर वह बाद के किसी चरण में पुनः बन जाती है। समांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक अभिकारकों की ही प्रावस्था में होता है (घुले हुए अम्ल, धातु संकुल, एंज़ाइम); विषमांगी उत्प्रेरण में वह एक अलग प्रावस्था होता है, प्रायः एक ठोस जिसकी सतह पर अभिक्रिया होती है (प्लैटिनम, आयरन, ज़िओलाइट)।
रसायन विज्ञान · शब्दावली
उत्प्रेरक, समांगी और विषमांगी उत्प्रेरण क्या है?
अन्य नाम: उत्प्रेरक · समांगी उत्प्रेरण · विषमांगी उत्प्रेरण