ऊर्जा किसी निकाय की वह क्षमता नापती है जिससे वह बदलाव पैदा कर सके: पदार्थ को गति दे, उठाए, गरम करे, रोशन करे। उसका मात्रक जूल () है। संचित, स्थानांतरित, रूपांतरित — भौतिकी की हर शाखा इसी एक मुद्रा में हिसाब रखती है।
उदाहरण
उदाहरण 9.5 (पानी की टंकी)
पानी की टंकी में ऊपर संचित हर घन मीटर () पानी रखता है — यानी ऊपर वाली कार की गतिज ऊर्जा का लगभग छह-दसवाँ हिस्सा। शहर सिर के ऊपर ऊर्जा जमा करते हैं।