बल यानी कोई धक्का या कोई खिंचाव। झूला धकेलना, ठेला खींचना, घंटी दबाना, रबर बैंड तानना, आटा गूँधना: इनमें से हर एक काम पर लगा हुआ बल है। हर बल की एक ताक़त होती है — हल्की या ज़ोरदार — और एक दिशा: वह किसी ओर धकेलता या खींचता है।
उदाहरण
उदाहरण 12.2 (धक्का या खिंचाव?)
अपने दिन को छाँटो: गेंद को ठोकर मारना — पैर से लगाया गया धक्का। दराज़ खोलना — खिंचाव। उसे बंद करना — धक्का। जैकेट की ज़िप चढ़ाना — खिंचाव। आटा गूँधना — कई छोटे-छोटे धक्के। रस्साकशी — दो टोलियाँ एक ही रस्सी को उलटी दिशाओं में खींचती हुईं।
उदाहरण 12.5 (ज़्यादा ताक़तवर बल, ज़्यादा बड़ा असर)
काँच की गोली को हल्के-से ठेलो: वह लुढ़ककर मेज़ के किनारे तक जाती है। उसे ज़ोर से झटका दो: वह पूरे कमरे को पार कर जाती है। वही गोली, वही उँगली — बस धक्के की ताक़त बदली, और गोली की उड़ान उसके साथ बदल गई। हल्का बल, हल्का असर; ज़ोरदार बल, ज़ोरदार असर।
उदाहरण 12.6 (इसे करके देखो: आकार बदलने वाले)
एक स्पंज, एक रबर बैंड, प्लास्टिसीन का एक लोंदा और लकड़ी का एक गुटका इकट्ठा करो। हर एक को दबाओ और खींचो। छोड़ते ही स्पंज वापस अपने आकार में आ जाता है; रबर बैंड भी। प्लास्टिसीन अपना नया आकार बनाए रखती है — तुम्हारे बल ने हमेशा के लिए एक गड्ढा बना दिया। और गुटका? तुम्हारे सबसे ज़ोरदार दबाव से भी उसमें (दिखने लायक) कोई बदलाव नहीं आता! चीज़ें बल का जवाब अपने-अपने ढंग से देती हैं।