शुद्ध पदार्थ किसी एक ही रासायनिक जाति का पिंड है। कोई प्रावस्था उसका वह भाग है जो अपने भौतिक गुणों में समांगी हो: ठोस, द्रव, गैस (वाष्प, जब वह अपने द्रव के साथ सह-अस्तित्व में हो)। कोई प्रावस्था-परिवर्तन (गलन/जमाव, वाष्पन/ संघनन, ऊर्ध्वपातन/निक्षेपण) एक प्रावस्था से दूसरी में जाना है; नियत दाब पर वह किसी नियत ताप पर होता है, जिसमें ऊष्मा का आदान-प्रदान तो होता है पर ताप नहीं बदलता: यही गुप्त ऊष्मा है।
उदाहरण
उदाहरण 25.8 (वाष्पन की ऊष्मा जाती कहाँ है)
पर पानी के लिए: , अतः : यानी गुप्त ऊष्मा का अणुओं को एक-दूसरे से नोचने में जाता है और वायुमंडल को पीछे धकेलने में। वाष्पन की एन्ट्रॉपी, , गलन की के सामने बहुत बड़ी है: गलन अणुओं की जकड़ ढीली करता है, क्वथन उन्हें मुक्त कर देता है।