ऊर्जा वाली किसी संरक्षी एक-विमीय गति में कण केवल वहीं हो सकता है जहाँ (क्योंकि ); और जिन बिंदुओं पर है वे पलटाव बिंदु कहलाते हैं, जहाँ वेग लुप्त होकर उलट जाता है। किसी स्थितिज कूप में दो पलटाव बिंदुओं के बीच फँसी गति बद्ध और आवर्ती होती है; यदि वह अनंत तक पहुँच सके तो मुक्त होती है; और से ऊँचा कोई स्थितिज अवरोध पार नहीं किया जा सकता।
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