भोजन पाचन नली से होकर सफ़र करता है, जो पूरे शरीर से होकर गुज़रती एक लंबी नली है:
- मुँह, जहाँ दाँत पीसते हैं (अध्याय 12) और लार गीला करती है;
- ग्रासनली, गले से आमाशय तक की फिसलपट्टी;
- आमाशय, एक पेशीदार थैली, जहाँ भोजन घंटों मथा जाता है और पाचक रसों में मिलाया जाता है;
- छोटी आँत, कई मीटर लंबी तह की हुई नली, जहाँ पाचन पूरा होता है और भोजन का सार शरीर में उतर जाता है;
- बड़ी आँत, जहाँ बचे हुए से पानी वापस ले लिया जाता है, और फिर बचा-खुचा शरीर से बाहर चला जाता है।
उदाहरण
उदाहरण 25.2 (यात्रा का समय)
रोटी का कौर मुँह में सेकंड भर रहता है, ग्रासनली से फिसलने में कुछ सेकंड लेता है, आमाशय में कुछ घंटे मथा जाता है, छोटी आँत से गुज़रने में कई घंटे और लगाता है, और बड़ी आँत में एक दिन या उससे भी ज़्यादा लेकर पूरा होता है। पूरी यात्रा में आम तौर पर एक से दो दिन लगते हैं।
उदाहरण 25.4 (रोटी मीठी हो जाती है)
सादी रोटी का एक टुकड़ा बहुत देर तक चबाओ — धीरे-धीरे साठ तक गिनने भर — और हलकी-सी मिठास आ जाती है। कुछ मिलाया नहीं गया: लार पहले ही रोटी को सरल, मीठे टुकड़ों में खोल रही है। तुमने पाचन को शुरू होते हुए चख लिया।
उदाहरण 25.8 (पेटदर्द का जासूस)
जल्दी-जल्दी निगला हुआ दोपहर का खाना, और फिर दौड़: दोपहर बाद का वही जाना-पहचाना पेटदर्द। खाना आधा चबाकर निगला गया (नियम 1 टूटा) और पचाते हुए आमाशय को दौड़ में झोंक दिया गया (नियम 5)। इसका इलाज दवा नहीं, अपनी ही पाचन नली के प्रति तमीज़ है।