उत्तोलक एक कड़ी छड़ है जो किसी टेक-बिंदु पर टिकी होती है और उसी के चारों ओर झुक सकती है। उस टेक-बिंदु को धुरी कहते हैं। सी-सॉ उत्तोलक है; चट्टान के नीचे लगी सब्बल भी, और कील खींचता हथौड़े का पंजा भी।
उदाहरण
उदाहरण 17.2 (ताक़त बढ़ाने वाला)
एक माली लोहे की लंबी छड़ किसी बड़ी चट्टान के नीचे सरकाता है, उसे चट्टान के पास रखे एक कुंदे पर टिकाता है, और दूर वाले सिरे को नीचे दबाता है — और जो चट्टान दस हाथ मिलकर नहीं उठा सके, वह आराम से लुढ़क जाती है। उत्तोलक का राज़ दूरी है: धुरी से दूर दबाओ, और तुम्हारा छोटा-सा धक्का धुरी के पास खड़े किसी दानव का काम कर देता है। एक पुरानी कहानी कहती है कि प्राचीन काल के एक महान वैज्ञानिक ने डींग मारी थी: “मुझे खड़े होने की जगह और काफ़ी लंबा उत्तोलक दे दो, मैं पृथ्वी हिला दूँगा।”