किसी प्रकाशिक निकाय पर किसी बिंदु (वस्तु बिंदु) से किरणें पड़ती हैं। यदि निकलती हुई सारी किरणें किसी एक बिंदु से गुज़रें, या सब उसी एक बिंदु से आती जान पड़ें, तो निकाय के लिए बिंदुसंगत है और ही का प्रतिबिंब है। प्रतिबिंब वास्तविक है यदि निकलती किरणें सचमुच पर मिलती हों (तब उसे परदे पर पकड़ा जा सकता है), और आभासी है यदि केवल उनके पीछे की ओर बढ़ाए गए विस्तार मिलते हों (तब वह निकाय के भीतर से दिखता है, प्रक्षेपित नहीं होता)। इसी तरह वस्तु वास्तविक है यदि आती किरणें से अपसरित होती हों, और आभासी यदि वे निकाय के प्रवेश के पीछे की ओर अभिसरित होती हों। युग्म संयुग्मी कहलाता है।
उदाहरण
उदाहरण 3.13 (एक ही लेंस, तीन काम)
कोई अभिसारी लेंस, । पर डाक-टिकट: , , आभासी, : यानी आवर्धक। पर दीपक: , वास्तविक, : गत्ते पर बना छोटा उलटा प्रतिबिंब। दूर खिड़की: , फोकस तल में नन्हा उलटा प्रतिबिंब — यानी कैमरा। तीन उपयोग, एक ही संबंध।