Biology · किताब 4 · Bachelor Year 2

विश्वविद्यालय जीवविज्ञान — वर्ष 2

विश्वविद्यालय जीवविज्ञान — वर्ष 2 · Bachelor Year 2

1एककोशिकीय जीवों की विविधता

सूक्ष्मदर्शी के नीचे तालाब के पानी की एक बूँद में दो कशाभों से नाव खेती एक हरी कोशिका है, जीवाणुओं को अपनी गुहिका में बुहारता एक चप्पल-आकार का पक्ष्माभी है, पट्टी पर सरकता एक काचाभ डायटम है और, ठीक से दिखने में बहुत छोटे, हज़ार जीवाणु हैं। हर एक अकेली कोशिका है और हर एक पूरा जीव है: वह एक ही कोशिका के रूप में खाता, चलता, संवेदन करता, बढ़ता, जनन करता और मरता है। सजीव जगत् का अधिकांश भाग सदा से ऐसा ही रहा है। यह अध्याय एककोशिकीय जीव को एक अभिकल्प-समस्या की तरह लेता है — एक कोशिका क्या कर सकती है और क्या नहीं — और प्राक्केंद्रकियों तथा सुकेंद्रकियों के ढूँढ़े उत्तरों का सर्वेक्षण करता है, उस बिंदु तक जहाँ कोशिकाएँ साथ रहने लगती हैं।

1.1 एक कोशिका, सारे कार्य

परिभाषा 1.1 (एककोशिकीय, निवही, बहुकोशिकीय)

कोई जीव एककोशिकीय तब है जब एक ही कोशिका जीवन के हर कार्य को — पोषण, विनिमय, गति, जनन — निभाती है और अपने भरोसे जीती है। वह निवही तब है जब एक ही प्रकार की कोशिकाएँ विभाजन के बाद जुड़ी रह जाती हैं पर अलग कर दी जाएँ तो हर एक अकेली जी सकती है। वह बहुकोशिकीय तब है जब उसकी कोशिकाएँ कई प्रकार की हैं, एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और उनमें से थोड़ी ही (जनन वंशक्रम) संतति छोड़ती हैं। एककोशिकीय जीवों में सारे आर्किया, लगभग सारे जीवाणु और सुकेंद्रकियों के अधिकांश वंशक्रम आते हैं; अनौपचारिक नाम प्रोटिस्ट एककोशिकीय सुकेंद्रकियों को समेटता है, जो एक समूह नहीं बल्कि अनेक हैं।

उदाहरण 1.2 (एक बूँद के छह निवासी)

Escherichia coli, 2 µm2\,\text{µ}\mathrm{m} लंबी एक छड़, कशाभों के गुच्छे से तैरती है और भरपेट हो तो हर बीस मिनट में विभाजित होती है। Chlamydomonas, 10 µm10\,\text{µ}\mathrm{m} चौड़ी एक हरी शैवाल, दो कशाभों से उस प्रकाश की ओर नाव खेती है जिसे वह नेत्रबिंदु से भाँपती है। Paramecium, 200 µm200\,\text{µ}\mathrm{m} का एक पक्ष्माभी, हज़ारों पक्ष्माभों से ढका है, गुहिका से भोजन लेता है और दो संकुचनशील रसधानियों से पानी उलीचता है। कोई डायटम सिलिका के दो-भागी कवच में रहता है, जो छिद्रों से अलंकृत है। Amoeba कूटपाद बढ़ाकर बहता है और जो मिले उसे निगल लेता है। खमीर की कोशिका अपनी बगल से एक पुत्री-कोशिका का मुकुल निकालती है। एक ही समस्या के छह उत्तर, बहुत भिन्न आकार और साज-सामान के।

एककोशिकीय जीवों के आकार परिमाण की पाँच कोटियों में फैले हैं। प्राक्केंद्रकी (नीले) एक माइक्रोमीटर के आसपास जमा हैं; सुकेंद्रकी कोशिकाएँ (नारंगी) दस से सौ गुना बड़ी हैं; सबसे बड़ी अकेली कोशिकाएँ — कोई विशाल गंधक-जीवाणु, शैवाल Acetabularia — वे अपवाद हैं जिन्हें पाठ समझाता है।
एककोशिकीय जीवों के आकार परिमाण की पाँच कोटियों में फैले हैं। प्राक्केंद्रकी (नीले) एक माइक्रोमीटर के आसपास जमा हैं; सुकेंद्रकी कोशिकाएँ (नारंगी) दस से सौ गुना बड़ी हैं; सबसे बड़ी अकेली कोशिकाएँ — कोई विशाल गंधक-जीवाणु, शैवाल Acetabularia — वे अपवाद हैं जिन्हें पाठ समझाता है।

प्रतिज्ञप्ति 1.3 (पृष्ठ, आयतन और आकार की सीमा)

कोई कोशिका अपने परिवेश से अपने पृष्ठ के रास्ते विनिमय करती है और अपने आयतन के समानुपात में खपत करती है। rr त्रिज्या के किसी गोले के लिए पृष्ठ-आयतन अनुपात है

SV=4πr243πr3=3r,\frac{S}{V} = \frac{4\pi r^2}{\tfrac{4}{3}\pi r^3} = \frac{3}{r},

यानी त्रिज्या दुगुनी करने पर कोशिकाद्रव्य की प्रति इकाई उपलब्ध पृष्ठ आधा रह जाता है। इसलिए जो कोशिका अपने भीतरी भाग को खिलाने के लिए झिल्ली के आरपार विसरण पर टिकी है वह अनिश्चित काल तक बढ़ नहीं सकती: किसी त्रिज्या पर पृष्ठ से होती आपूर्ति आयतन की माँग पूरी करना छोड़ देती है। यही नियम बताता है कि प्रति ग्राम सबसे अधिक उपापचयी सक्रियता छोटी कोशिकाओं में क्यों है, और बड़ी कोशिकाएँ चपटी, लंबी, रसधानीदार या भीतरी झिल्लियों से भरी क्यों होती हैं।

प्रमेय 1.4 (किसी दूरी को विसरण से पार करने का काल)

DD विसरण गुणांक वाला कोई अणु यादृच्छिक पगों में भटकता है; किसी काल tt के बाद एक अक्ष पर उसका माध्य वर्ग विस्थापन ⟨x2⟩=2Dt\langle x^2\rangle = 2Dt होता है। इसलिए केवल विसरण से कोई दूरी xx तय करने में लगने वाला काल है

t≈x22D,t \approx \frac{x^2}{2D},

जो दूरी के वर्ग के साथ बढ़ता है। जल में किसी छोटे अणु के लिए D≈1×10−9 m2/sD \approx 1 \times 10^{-9}\,\mathrm{m}^{2}/\mathrm{s} लेने पर, किसी जीवाणु (1 µm1\,\text{µ}\mathrm{m}) को पार करने में आधा मिलीसेकंड लगता है; 1 mm1\,\mathrm{mm} की कोशिका को पार करने में आठ मिनट लगते, और एक मीटर को पार करने में सोलह वर्ष।

उपपत्ति. मान लीजिए वह अणु ℓ\ell लंबाई का एक पग हर τ\tau सेकंड पर यादृच्छिक रूप से बाएँ या दाएँ रखता है। nn पगों के बाद उसका विस्थापन x=∑iεiℓx = \sum_i \varepsilon_i \ell है, जिसमें εi=±1\varepsilon_i = \pm 1 स्वतंत्र हैं, इसलिए ⟨x⟩=0\langle x\rangle = 0 और ⟨x2⟩=∑i⟨εi2⟩ℓ2=nℓ2\langle x^2\rangle = \sum_i \langle\varepsilon_i^2\rangle \ell^2 = n\ell^2 (आड़े पद औसत में शून्य हो जाते हैं)। n=t/τn = t/\tau रखने पर यह ⟨x2⟩=(ℓ2/τ) t\langle x^2\rangle = (\ell^2/\tau)\,t है, और D=ℓ2/2τD = \ell^2/2\tau लिखने पर ⟨x2⟩=2Dt\langle x^2\rangle = 2Dt मिलता है। ⟨x2⟩=x2\langle x^2\rangle = x^2 रखने पर वह काल मिल जाता है। ∎

प्रमेय 1.5 (किसी गोलीय कोशिका को विसरण से आपूर्ति)

r0r_0 त्रिज्या की कोई गोलीय कोशिका, जो अपने पृष्ठ तक पहुँचने वाले किसी विलेय के हर अणु को सोख लेती है, ऐसे माध्यम में जहाँ दूर की सांद्रता c∞c_\infty है, स्थायी अवस्था में इतना अभिवाह (अणु प्रति सेकंड) पाती है:

J=4πDr0 c∞.J = 4\pi D r_0\, c_\infty .

आपूर्ति केवल r0r_0 के साथ बढ़ती है, जबकि माँग r03r_0^3 के साथ: किसी त्रिज्या से आगे विसरण पर पलने वाली कोशिका भूखी रह जाती है।

उपपत्ति. स्थायी अवस्था में r>r0r > r_0 त्रिज्या के हर गोले को प्रति सेकंड पार करते अणुओं की संख्या एक ही है, J=4πr2D (dc/dr)J = 4\pi r^2 D\, (\mathrm{d}c/\mathrm{d}r) (फ़िक का नियम, अभिवाह भीतर की ओर)। इसलिए r2 dc/dr=J/4πDr^2\,\mathrm{d}c/\mathrm{d}r = J/4\pi D अचर है; r0r_0 से, जहाँ c=0c = 0, अनंत तक, जहाँ c=c∞c = c_\infty, समाकलन करने पर: c∞=(J/4πD)∫r0∞r−2 dr=J/(4πDr0)c_\infty = (J/4\pi D)\int_{r_0}^{\infty} r^{-2}\,\mathrm{d}r = J/(4\pi D r_0), जिससे J=4πDr0c∞J = 4\pi D r_0 c_\infty। ∎

उदाहरण 1.6 (विसरण से पलने वाली कोशिका कितनी बड़ी हो सकती है?)

कोई वायुजीवी कोशिका प्रति घन मात्रा कोशिकाद्रव्य लगभग q=0.02 mol/m3/sq = 0.02\,\mathrm{mol}/\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s} की दर से (एक तेज़ दर) ऑक्सीजन खपाती है। उसकी माँग q⋅43πr03q \cdot \tfrac{4}{3}\pi r_0^3 है; वायु-संतृप्त जल से आपूर्ति (c∞=0.25 mol/m3c_\infty = 0.25\,\mathrm{mol}/\mathrm{m}^{3}, D=2×10−9 m2/sD = 2 \times 10^{-9}\,\mathrm{m}^{2}/\mathrm{s}) 4πDr0c∞4\pi D r_0 c_\infty है। बराबर रखने पर r02=3Dc∞/q=3×2×10−9×0.25/0.02=7.5×10−8 m2r_0^2 = 3Dc_\infty/q = 3\times 2\times 10^{-9} \times 0.25/0.02 = 7.5 \times 10^{-8}\,\mathrm{m}^{2}, इसलिए r0≈270 µmr_0 \approx 270\,\text{µ}\mathrm{m}। असल में सक्रिय कोशिकाएँ इससे कहीं नीचे रहती हैं, क्योंकि ऑक्सीजन को उनके भीतर भी विसरित होना पड़ता है; 750 µm750\,\text{µ}\mathrm{m} का गंधक-जीवाणु Thiomargarita इस सीमा से यों बचता है कि वह लगभग पूरा का पूरा एक रसधानी है और उसका कोशिकाद्रव्य कुछ माइक्रोमीटर गहरा एक पतला खोल भर है।

पृष्ठ से होती आपूर्ति r के साथ बढ़ती है, माँग r3 के साथ (लघुगणकीय अक्ष)। जहाँ रेखाएँ कटती हैं, वहाँ केवल विसरण से पलने वाली कोशिका अपने भीतरी भाग की आपूर्ति नहीं रख पाती; किसी सक्रिय वायुजीवी कोशिका के लिए यह कटान कुछ सौ माइक्रोमीटर के पास बैठता है।
पृष्ठ से होती आपूर्ति rr के साथ बढ़ती है, माँग r3r^3 के साथ (लघुगणकीय अक्ष)। जहाँ रेखाएँ कटती हैं, वहाँ केवल विसरण से पलने वाली कोशिका अपने भीतरी भाग की आपूर्ति नहीं रख पाती; किसी सक्रिय वायुजीवी कोशिका के लिए यह कटान कुछ सौ माइक्रोमीटर के पास बैठता है।

1.2 प्राक्केंद्रकियों की विविधता

परिभाषा 1.7 (प्राक्केंद्रकी कोशिका)

प्राक्केंद्रकी (जीवाणु और आर्किया, दो अधिजगत् जो एक-दूसरे से उतने ही भिन्न हैं जितना इनमें से कोई हमसे) वह कोशिका है जिसमें न केंद्रक है न झिल्लीबद्ध कोशिकांग: किसी केंद्रकाभ में एक ही वृत्ताकार गुणसूत्र, प्रायः साथ में प्लास्मिड कहलाते छोटे अतिरिक्त वृत्त, 0.5 से 2 µm0.5\text{ से }2\,\text{µ}\mathrm{m} के कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र राइबोसोम, एक प्लाज़्मा झिल्ली जो श्वसन या प्रकाशसंश्लेषण की शृंखलाएँ ढोती है, और एक दृढ़ कोशिका भित्ति जो परिवेश से कई बार अधिक दाब वाले कोशिकाद्रव्य की स्फीति सह लेती है। आकार थोड़े ही हैं और उनके नाम हैं: गोलाणु (गोला), दंडाणु (छड़), कुंडलाणु और स्पाइरोकीट (कुंडलियाँ), कॉमाणु (अल्पविराम); विभाजन के बाद कोशिकाएँ युग्मों, शृंखलाओं, चौकड़ियों या गुच्छों में रह सकती हैं।

प्रतिज्ञप्ति 1.8 (दो आवरण: ग्राम-धनी और ग्राम-ऋणी)

जीवाणु की भित्ति पेप्टाइडोग्लाइकैन की बनी है, यानी दो शर्कराओं की एकांतर शृंखलाएँ जिन्हें छोटे पेप्टाइड आड़े जोड़कर कोशिका के चारों ओर एक ही विशाल अणु बना देते हैं। ग्राम-धनी जीवाणुओं में एक ही झिल्ली के बाहर एक मोटी परत (20 से 80 nm20\text{ से }80\,\mathrm{nm}) होती है और वे ग्राम विधि का क्रिस्टल-वायलेट रंग रोक रखते हैं; ग्राम-ऋणी जीवाणुओं में एक पतली परत (कुछ नैनोमीटर) प्लाज़्मा झिल्ली और एक बाह्य झिल्ली के बीच दबी रहती है, जिसका बाहरी पटल लिपोपॉलिसैकेराइड का बना है, और वे रंग खो देते हैं। पोरिनों से बिंधी वह बाह्य झिल्ली एक दूसरा अवरोध है: वह अनेक प्रतिजैविकों और अपमार्जकों को बाहर रखती है, और इसीलिए ग्राम-ऋणी संक्रमणों का उपचार कठिन है। आर्किया में न पेप्टाइडोग्लाइकैन है न बाक़ी हर कोशिका के एस्टर-बद्ध लिपिड: उनकी झिल्लियाँ ईथर-बद्ध आइसोप्रीनॉइड शृंखलाओं की बनी हैं, जो कभी-कभी पूरे द्विस्तर को एकस्तर की तरह लाँघ जाती हैं, और इसी से वे खौलते अम्ल में भी स्थिर रहती हैं।

दोनों जीवाणु-आवरण अनुप्रस्थ काट में। बाएँ: मोटे पेप्टाइडोग्लाइकैन आवरण के नीचे एक झिल्ली। दाएँ: दो झिल्लियों के बीच परिप्लाज़्म में पेप्टाइडोग्लाइकैन की एक पतली परत, और बाहरी झिल्ली पर पोरिन जड़े तथा लिपोपॉलिसैकेराइड की परत चढ़ी।
दोनों जीवाणु-आवरण अनुप्रस्थ काट में। बाएँ: मोटे पेप्टाइडोग्लाइकैन आवरण के नीचे एक झिल्ली। दाएँ: दो झिल्लियों के बीच परिप्लाज़्म में पेप्टाइडोग्लाइकैन की एक पतली परत, और बाहरी झिल्ली पर पोरिन जड़े तथा लिपोपॉलिसैकेराइड की परत चढ़ी।

प्रतिज्ञप्ति 1.9 (जीवाणु का कशाभ और रसानुचलन)

जीवाणु का कशाभ फ्लैजेलिन प्रोटीन का एक दृढ़ कुंडलाकार तंतु है, 20 nm20\,\mathrm{nm} मोटा और शरीर से कई गुना लंबा, जिसे आवरण में जड़ा एक घूर्णी मोटर घुमाता है। वह मोटर ATP से नहीं, बल्कि झिल्ली के आरपार विद्युत-रासायनिक प्रवणता से नीचे बहते प्रोटॉनों से चलता है, कोई 10001000 प्रोटॉन प्रति चक्कर और 300300 चक्कर प्रति सेकंड तक। E. coli में कई कशाभ, जब सब वामावर्त घूमते हैं, एक गट्ठर बन जाते हैं और कोशिका को सीधी दौड़ में धकेलते हैं; जब एक या अधिक उलट जाते हैं, गट्ठर बिखर जाता है और कोशिका लुढ़ककर किसी नई यादृच्छिक दिशा में मुड़ जाती है। रसानुचलन इसी यादृच्छिक भ्रमण का झुकाव है: कोशिका जाँचती है कि पिछले एक सेकंड में किसी आकर्षी की सांद्रता बढ़ी या नहीं, और बढ़ी हो तो लुढ़कना दबा देती है। वह वर्तमान की तुलना निकट भूत से करके — अपने पथ के साथ-साथ — दिशा तय करती है, क्योंकि अपनी 1 µm1\,\text{µ}\mathrm{m} लंबाई भर में कोई प्रवणता मापी नहीं जा सकती।

प्रमाण-सामग्री. बर्ग और ब्राउन (1972) ने अनुसरण-सूक्ष्मदर्शी से E. coli की अकेली कोशिकाओं को तीन विमाओं में देखा: लगभग एक सेकंड की दौड़ें 20 µm/s20\,\text{µ}\mathrm{m}/\mathrm{s} पर, दसवें सेकंड की लुढ़कनें, और सिरीन की प्रवणता में प्रवणता की ओर चढ़ती दौड़ें लंबी थीं जबकि उतरती दौड़ें छोटी नहीं हुईं। कोशिका को एक कशाभ से काँच की पट्टी पर बाँध देने पर पूरा शरीर चक्कर काटने लगा, जिससे सिद्ध हुआ कि मोटर घूर्णी है; जिन कोशिकाओं की मोटर ATP संश्लेषण से अलग कर दी गई थी वे तब तक तैरती रहीं जब तक प्रोटॉन प्रवणता थोपी जा सकी, जिससे ईंधन की पहचान हुई। ∎

दौड़ और लुढ़कन। बाएँ: प्रवणता के बिना कोशिका यादृच्छिक भ्रमण करती है, और हर दौड़ (नीली) एक लुढ़कन (लाल बिंदु) पर समाप्त होती है। दाएँ: किसी दौड़ के साथ आकर्षी बढ़े तो लुढ़कना दब जाता है और दौड़ लंबी हो जाती है; भ्रमण प्रवणता पर चढ़ता चला जाता है।
दौड़ और लुढ़कन। बाएँ: प्रवणता के बिना कोशिका यादृच्छिक भ्रमण करती है, और हर दौड़ (नीली) एक लुढ़कन (लाल बिंदु) पर समाप्त होती है। दाएँ: किसी दौड़ के साथ आकर्षी बढ़े तो लुढ़कना दब जाता है और दौड़ लंबी हो जाती है; भ्रमण प्रवणता पर चढ़ता चला जाता है।

उदाहरण 1.10 (सायनोजीवाणु और हेटरोसिस्ट)

सायनोजीवाणु वे जीवाणु हैं जो पौधों की तरह प्रकाशसंश्लेषण करते हैं, यानी भीतरी झिल्लियों के थक्कों पर (थाइलेकॉइडों पर, जो हरितलवक ने इन्हीं से पाए) जल तोड़ते और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। अनेक एक ही आवरण साझा करती कोशिकाओं के तंतु के रूप में उगते हैं। Anabaena में, जब यौगिक नाइट्रोजन चुक जाती है, तब लगभग हर दसवीं कोशिका हेटरोसिस्ट बन जाती है: वह अपना ऑक्सीजन बनाने वाला प्रकाशतंत्र उखाड़ देती है, ऑक्सीजन के विरुद्ध अपनी भित्ति मोटी कर लेती है, और वायुमंडलीय नाइट्रोजन को ऐसे एंजाइम से स्थिर करती है जिसे ऑक्सीजन नष्ट कर देती, तथा शर्करा के बदले पड़ोसियों को ग्लूटामीन भेजती है। Anabaena का तंतु कोशिकाओं के बीच श्रम-विभाजन का पहला ख़ाका है।

Anabaena का एक तंतु: हरी प्रकाशसंश्लेषी कोशिकाओं की एक शृंखला, जिसे बड़ी, हलके रंग की हेटरोसिस्ट कोशिकाएँ बीच-बीच में तोड़ती हैं — वही कोशिकाएँ जो नाइट्रोजन स्थिर करती हैं।
Anabaena का एक तंतु: हरी प्रकाशसंश्लेषी कोशिकाओं की एक शृंखला, जिसे बड़ी, हलके रंग की हेटरोसिस्ट कोशिकाएँ बीच-बीच में तोड़ती हैं — वही कोशिकाएँ जो नाइट्रोजन स्थिर करती हैं।

टिप्पणी 1.11 (प्रसुप्ति)

कुछ ग्राम-धनी छड़ें (Bacillus, Clostridium) भुखमरी का उत्तर अंतःबीजाणु बनाकर देती हैं: गुणसूत्र की एक प्रति, कई निर्जलित आवरणों में लिपटी, उपापचय में निष्क्रिय, खौलने, विकिरण और सदियों के सूखे की प्रतिरोधी, जो परिस्थितियाँ लौटने पर अंकुरित होती है। अनेक प्रोटिस्ट यही काम किसी पुटी से करते हैं। गतिशीलता के साथ-साथ प्रसुप्ति बुरे मौसम से बचने का दूसरा रास्ता है।

1.3 एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव

परिभाषा 1.12 (प्रोटिस्ट: एक स्तर, समूह नहीं)

प्रोटिस्ट वे सुकेंद्रकी हैं जो न प्राणी हैं, न स्थलीय पौधे, न कवक — अधिकतर एककोशिकीय, कुछ निवही, थोड़े-से (केल्प) बहुकोशिकीय। उनमें वर्ष 1 के खंड वाली सुकेंद्रकी कोशिका साझी है (केंद्रक, सूत्रकणिकाएँ, अंतःझिल्लियाँ, कोशिका-कंकाल, 9+29+2 पक्ष्माभ) और विशेष रूप से और कुछ नहीं: जिन वंशक्रमों में वे आते हैं वे एक-दूसरे से उतने ही दूर हैं जितने प्राणी पौधों से। हरी शैवाल स्थलीय पौधों के साथ हैं; डायटम और भूरी शैवाल अपना ही एक वंशक्रम बनाते हैं; पक्ष्माभी, डाइनोफ्लैजेलेट और मलेरिया परजीवी एक और; अमीबा तथा श्लेष्म कवक इन सबसे अधिक प्राणियों और कवकों के निकट हैं। यह शब्द संगठन के एक स्तर का नाम है — अकेली जीती सुकेंद्रकी कोशिका — न कि वृक्ष की किसी शाखा का।

उदाहरण 1.13 (अकेली सुकेंद्रकी कोशिका होने के चार ढंग)

Chlamydomonas: सेलुलोस-रहित ग्लाइकोप्रोटीन भित्ति, एक प्याले-आकार का हरितलवक, एक नारंगी नेत्रबिंदु जो किसी प्रकाश-संवेदी पर छाया डालता है ताकि घूमती हुई कोशिका जान सके कि प्रकाश किधर है, और छाती-तैराकी करते दो अग्र कशाभ — ऐसी अंडाकार हरी शैवाल; वह प्रकाशपोषी है। Paramecium: एक पक्ष्माभी, जिसका पूरा पृष्ठ पक्ष्माभों की समन्वित तरंगों से स्पंदित रहता है, जिसमें मुख जैसी एक मुखीय नाली जीवाणुओं को भोजन-रसधानियों में बुहारती है, दो संकुचनशील रसधानियाँ हैं, और दो प्रकार के केंद्रक हैं — एक छोटा जननिक लघुकेंद्रक और एक बड़ा कामकाजी गुरुकेंद्रक जिसमें हर जीन की सैकड़ों प्रतियाँ हैं; वह भक्षपोषी है। Amoeba: न भित्ति, न कोई निश्चित आकार, जो कूटपादों से चलता और खाता है, और उन्हें ऐक्टिन का बहुलकीकरण बाहर धकेलता है। डायटम: प्रकाशसंश्लेषी कोशिका, जो सिलिका के दो एक पर एक चढ़े कपाटों में बंद है, मानो डिब्बा और उसका ढक्कन, और छिद्रों से इतनी अलंकृत कि कभी उन कवचों से सूक्ष्मदर्शी लेंस परखे जाते थे; विभाजित होने पर हर पुत्री एक कपाट रखती है और एक नया, छोटा, भीतरी कपाट बनाती है।

Paramecium, आरेखी: पक्ष्माभित बाह्यक, दोनों केंद्रक, वह मुखीय नाली जो उस गुहिका तक ले जाती है जहाँ भोजन-रसधानियाँ बनती हैं, और वे दो तारे जैसी संकुचनशील रसधानियाँ जो परासरण से भीतर आते जल को बाहर फेंकती हैं।
Paramecium, आरेखी: पक्ष्माभित बाह्यक, दोनों केंद्रक, वह मुखीय नाली जो उस गुहिका तक ले जाती है जहाँ भोजन-रसधानियाँ बनती हैं, और वे दो तारे जैसी संकुचनशील रसधानियाँ जो परासरण से भीतर आते जल को बाहर फेंकती हैं।
कृष्ण-क्षेत्र सूक्ष्मदर्शन में दिखते डायटम: हर कोशिका सिलिका के दो-कपाटी कवच में रहती है, जो उन छिद्रों से नक़्क़ाशीदार है जिनसे वह जल के साथ विनिमय करती है।
कृष्ण-क्षेत्र सूक्ष्मदर्शन में दिखते डायटम: हर कोशिका सिलिका के दो-कपाटी कवच में रहती है, जो उन छिद्रों से नक़्क़ाशीदार है जिनसे वह जल के साथ विनिमय करती है।

परिभाषा 1.14 (पोषण के ढंग)

कोई एककोशिकीय सुकेंद्रकी तीन में से एक ढंग से, या एक साथ दो ढंगों से, पोषण पाता है। प्रकाशपोषण: उसके पास हरितलवक हैं और वह प्रकाश तथा CO2\mathrm{CO_2} से अपना कार्बनिक पदार्थ स्वयं बनाता है (हरी शैवाल, डायटम, डाइनोफ्लैजेलेट)। भक्षपोषण: वह कणों को — जीवाणुओं को, दूसरे प्रोटिस्टों को — किसी भोजन-रसधानी में निगल लेता है, जहाँ लयनकाय के एंजाइम उन्हें पचा देते हैं (अमीबा, पक्ष्माभी, कॉलरकशाभी)। परासरणपोषण: वह घुले हुए अणुओं को अपनी झिल्ली के आरपार सोखता है, प्रायः बाहर एंजाइम स्रावित करने के बाद (खमीर, अनेक परजीवी)। मिश्रपोषी, जैसे Euglena, उजाले में प्रकाशसंश्लेषण करते हैं और अँधेरे में खाते हैं। प्राक्केंद्रकी भक्षण नहीं कर सकते: भित्ति मना करती है, और इसीलिए कोई प्राक्केंद्रकी निगलकर परभक्षी कभी नहीं बना।

प्रतिज्ञप्ति 1.15 (मीठे जल में परासरण-नियमन)

मीठे जल का कोई प्रोटिस्ट भीतर से तालाब की अपेक्षा कहीं अधिक लवणीय है (कोई 100 mmol/L100\,\mathrm{mmol}/\mathrm{L} विलेय, तालाब में लगभग 1 mmol/L1\,\mathrm{mmol}/\mathrm{L}), और उसकी झिल्ली जल को आने देती है। इसलिए जल परासरण से लगातार भीतर आता है, ऐसी दर से जो पृष्ठ क्षेत्रफल के और परासरण दाब के अंतर ΔΠ=RT Δc\Delta\Pi = RT\,\Delta c के समानुपाती है — ऊपर के आँकड़ों के लिए लगभग 2.4 bar2.4\,\mathrm{bar}। भित्तिवाली कोशिका स्फीति से टिकी रहती है; नंगी कोशिका मिनटों में फूलकर फट जाती। संकुचनशील रसधानी इसका उत्तर है: एक कुंड, जिसे अरीय नलिकाएँ भरती हैं और जिसमें प्रोटॉन-चालित वाहक जल पंप करते हैं, और फिर वह सिकुड़कर उस जल को एक छिद्र से बाहर फेंक देता है, कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट के अंतराल पर। कोई Paramecium हर आधे घंटे में अपने आयतन जितना जल निकालता है; समुद्री सगे, जो अपने ही जितने लवणीय माध्यम में रहते हैं, कोई संकुचनशील रसधानी रखते ही नहीं।

1.4 किसी छोटे तैराक की भौतिकी

प्रतिज्ञप्ति 1.16 (निम्न रेनॉल्ड्स संख्या पर जीवन)

रेनॉल्ड्स संख्या Re=ρvL/ηRe = \rho v L/\eta किसी LL आकार के उस पिंड के लिए, जो vv चाल से ρ\rho घनत्व और η\eta श्यानता वाले तरल में चल रहा है, जड़त्वीय और श्यान बलों की तुलना करती है। मानव तैराक के लिए वह लगभग 10610^6 है; Paramecium (200 µm200\,\text{µ}\mathrm{m}, 1 mm/s1\,\mathrm{mm}/\mathrm{s}) के लिए 0.2, और किसी जीवाणु के लिए 10−510^{-5}। Re≈1Re \approx 1 से नीचे जड़त्व बेमानी है: स्पंदन रोकती कोशिका एक नैनोमीटर के भीतर रुक जाती है, जल गाढ़ी चाशनी जैसा लगता है, और कोई प्रतिवर्ती गति (आगे और पीछे वही आघात) कोई शुद्ध विस्थापन नहीं देती। इसलिए छोटे तैराक अप्रतिवर्ती आघात काम में लाते हैं: जीवाणु-कशाभ की घूमती कुंडली, किसी पक्ष्माभ का असममित स्पंदन (कड़ा शक्ति-आघात, मुड़ा हुआ वापसी-आघात), Chlamydomonas की छाती-तैराकी।

प्रमेय 1.17 (स्टोक्स का नियम और डूबना)

rr त्रिज्या और ρकोशिका\rho_{\text{कोशिका}} घनत्व का कोई गोला η\eta श्यानता के तरल में धीरे चले तो उस पर F=6πηrvF = 6\pi\eta r v कर्षण लगता है। ρ\rho घनत्व के जल में अपने भरोसे छोड़ दिया जाए तो वह इस सीमांत चाल से डूबता है:

vs=2 r2 (ρकोशिका−ρ) g9η,v_s = \frac{2\,r^2\,(\rho_{\text{कोशिका}} - \rho)\,g}{9\eta},

जो उसकी त्रिज्या के वर्ग के समानुपाती है: दस गुना बड़ी कोशिका सौ गुना तेज़ डूबती है। इसीलिए पादपप्लवक छोटा है, इसीलिए डायटम काँटे और तेल की बूँदें ढोते हैं, और इसीलिए तैरना छोड़ देने वाला कोई Chlamydomonas कुछ ही दिनों में प्रकाश से नीचे उतर जाता है।

उपपत्ति. सीमांत चाल पर कर्षण आभासी भार (भार घटा उत्प्लावन) को संतुलित करता है: 6πηrvs=43πr3(ρकोशिका−ρ)g6\pi\eta r v_s = \tfrac{4}{3}\pi r^3 (\rho_{\text{कोशिका}} - \rho) g। vsv_s के लिए हल करने पर सूत्र मिलता है। कर्षण का नियम स्वयं भौतिकी की शृंखला में Re≪1Re \ll 1 के लिए व्युत्पन्न किया गया है; यहाँ उसे दिया हुआ मान लिया गया है। ∎

उदाहरण 1.18 (किसी डायटम का गिरना)

10 µm10\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या का कोई केंद्रीय डायटम, जो समुद्री जल से 100 kg/m3100\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3} अधिक घना है (η=1×10−3 Pa s\eta = 1 \times 10^{-3}\,\mathrm{Pa}\,\mathrm{s}), इस चाल से डूबता है: vs=2×10−10×100×9.81/(9×10−3)=2.2×10−5 m/sv_s = 2\times 10^{-10}\times 100\times 9.81/(9\times 10^{-3}) = 2.2 \times 10^{-5}\,\mathrm{m}/\mathrm{s}, यानी लगभग 2 m2\,\mathrm{m} प्रतिदिन: वह 50 m50\,\mathrm{m} की प्रकाशित परत महीने भर से भी कम में छोड़ देता। उसकी आबादियाँ इसलिए बची रहती हैं कि विक्षोभ जल को मथता रहता है, कि तेल की बूँदें और कम घनत्व ρकोशिका−ρ\rho_{\text{कोशिका}} - \rho को घटा देते हैं, और कि जो कोशिका डूबते-डूबते विभाजित हो जाती है वह ऐसी संतति छोड़ती है जो फिर ऊपर उठा दी जाती है।

जल से 100\, kg/ m3 अधिक घनी कोशिकाओं के लिए त्रिज्या के सापेक्ष स्टोक्स डूबन-चाल। लघुगणकीय अक्षों पर 2 का ढाल वही r2 नियम है: कोई जीवाणु दिन भर में एक सेंटीमीटर डूबता है, कोई बड़ा प्रोटिस्ट घंटे भर में दो-एक मीटर।
जल से 100 kg/m3100\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3} अधिक घनी कोशिकाओं के लिए त्रिज्या के सापेक्ष स्टोक्स डूबन-चाल। लघुगणकीय अक्षों पर 2 का ढाल वही r2r^2 नियम है: कोई जीवाणु दिन भर में एक सेंटीमीटर डूबता है, कोई बड़ा प्रोटिस्ट घंटे भर में दो-एक मीटर।

1.5 एक कोशिका में जनन और लैंगिकता

परिभाषा 1.19 (विभाजन के ढंग)

कोई एककोशिकीय जीव विभाजित होकर जनन करता है। द्विविभाजन: कोशिका बढ़कर अपने आकार की दुगुनी हो जाती है और दो बराबर पुत्रियों में बँट जाती है (जीवाणु, Paramecium, Amoeba)। मुकुलन: माता से एक छोटी पुत्री उगकर अलग हो जाती है (खमीर; माता पर एक निशान रह जाता है और वह कोई बीस बार मुकुल निकाल सकती है)। बहुविभाजन: कोशिका बड़ी हो जाती है, फिर माता की भित्ति के भीतर तेज़ी से कई बार विभाजित होकर एक साथ 4, 8, 16 या इससे अधिक पुत्रियाँ छोड़ती है (Chlamydomonas, लाल रक्त कोशिका में मलेरिया परजीवी)। अचर परिस्थितियों में कोशिकाओं की संख्या चरघातांकी रूप से बढ़ती है, N(t)=N0 2t/TN(t) = N_0\,2^{t/T}, जिसमें TT वह पीढ़ी काल है: समृद्ध माध्यम में E. coli के लिए बीस मिनट, अनेक शैवालों के लिए एक दिन, कुछ पक्ष्माभियों के लिए एक सप्ताह। (भोजन के फलन के रूप में वृद्धि पर अध्याय 2 में विचार है।)

प्रतिज्ञप्ति 1.20 (जनन बिना सृजन: Paramecium में संयुग्मन)

पूरक जनन-प्ररूपों के दो Paramecium अपने मुखीय पृष्ठों से जुड़ जाते हैं। हर एक में द्विगुणित लघुकेंद्रक अर्धसूत्री विभाजन से चार अगुणित केंद्रक बनाता है, जिनमें से तीन क्षीण हो जाते हैं; बचा हुआ समसूत्री विभाजन से एक स्थिर और एक प्रवासी केंद्रक में बँटता है, और दोनों कोशिकाएँ संधि के आरपार अपने प्रवासी केंद्रकों की अदला-बदली कर लेती हैं। फिर हर कोशिका अपने स्थिर केंद्रक को मिले हुए केंद्रक से मिला देती है, और दोनों साथी अलग हो जाते हैं, हर एक अपने साथी के ही जीन-प्ररूप का नया द्विगुणित लघुकेंद्रक लिए। पुराना गुरुकेंद्रक टूट जाता है और नए लघुकेंद्रक से नया बनाया जाता है। कोई नई कोशिका नहीं बनी: संयुग्मन गुणन से अलग किया गया आनुवंशिक मिश्रण है — अर्धसूत्री विभाजन और निषेचन, अध्याय 4। जीवाणु-संयुग्मन, जो किसी प्लास्मिड को दाता से ग्राही तक एक ही दिशा में पहुँचाता है, उसी नाम की एक भिन्न प्रक्रिया है (अध्याय 3)।

Paramecium में संयुग्मन। दो कोशिकाएँ अगुणित केंद्रकों की अदला-बदली करके अलग हो जाती हैं, हर एक पुनर्संयोजित द्विगुणित लघुकेंद्रक लिए; कोशिकाओं की संख्या नहीं बदली।
Paramecium में संयुग्मन। दो कोशिकाएँ अगुणित केंद्रकों की अदला-बदली करके अलग हो जाती हैं, हर एक पुनर्संयोजित द्विगुणित लघुकेंद्रक लिए; कोशिकाओं की संख्या नहीं बदली।

1.6 बहुकोशिकीयता की ओर

प्रतिज्ञप्ति 1.21 (वॉल्वोसी शृंखला)

हरी शैवालों में एक वंशक्रम, जीवित जातियों में ही, एक कोशिका से शरीर तक के पग दिखा देता है। Chlamydomonas अकेली रहती है। Gonium 4 से 16 एक जैसी कोशिकाओं की एक चपटी पट्टिका है जो साथ-साथ तैरती हैं। Pandorina और Eudorina 16 से 32 कोशिकाओं की खोखली गेंदें हैं, अब भी सब एक जैसी, और हर एक नया निवह बसाने में समर्थ। Pleodorina में कुछ छोटी कोशिकाएँ हैं जो केवल तैरती हैं, विभाजित कभी नहीं होतीं। Volvox 500500 से 50 00050\,000 छोटी कायिक कोशिकाओं का गोला है, कशाभयुक्त, जो निवह के साथ ही मर जाएँगी, और उनके बीच मुट्ठी भर बड़ी जनन कोशिकाएँ (गोनिडिया) हैं जो विभाजित होकर माता के भीतर ही पुत्री-गोले बनाती हैं। कायिक और जननिक कोशिकाएँ प्रकट हो चुकी हैं: यह बहुकोशिकीयता की देहरी है, जिसे इस वंशक्रम ने कोई 200200 लाख वर्ष पहले पार किया और, स्वतंत्र रूप से, जीवन-वृक्ष में और कहीं कम से कम पच्चीस बार — प्राणियों, पौधों, कवकों, भूरी शैवालों, लाल शैवालों और जीवाणुओं के कई समूहों में।

प्रमाण-सामग्री. दर्जनों जीनों से बना वॉल्वोसी शैवालों का आणविक जातिवृत्त Chlamydomonas को आधार पर और Volvox को सिरों पर रखता है, बीच में निवही रूपों के साथ और शाखाओं के साथ बढ़ती कोशिका-संख्या के साथ; Volvox carteri का जीनोम (2010) Chlamydomonas के जीनोम से कुछ सौ जीनों भर से भिन्न है, मुख्यतः उन जीनों से जो कोशिकाओं को थामे रखने वाली बाह्यकोशिकीय आधात्री के हैं और उन नियामकों के जो कायिक कोशिकाओं में विभाजन चुप करा देते हैं। इस संक्रमण को उल्लेखनीय रूप से थोड़ी ही नई आनुवंशिक सामग्री चाहिए थी। ∎

वॉल्वोसी शृंखला: एक अकेली कोशिका, एक पट्टिका, एक जैसी कोशिकाओं की खोखली गेंद, एक ऐसी गेंद जिसमें कुछ कोशिकाओं ने विभाजन छोड़ दिया है, और Volvox, जहाँ हज़ारों नश्वर कायिक कोशिकाएँ कुछ जनन कोशिकाओं को घेरे हैं।
वॉल्वोसी शृंखला: एक अकेली कोशिका, एक पट्टिका, एक जैसी कोशिकाओं की खोखली गेंद, एक ऐसी गेंद जिसमें कुछ कोशिकाओं ने विभाजन छोड़ दिया है, और Volvox, जहाँ हज़ारों नश्वर कायिक कोशिकाएँ कुछ जनन कोशिकाओं को घेरे हैं।
Volvox का एक निवह: कशाभयुक्त कोशिकाओं का खोखला हरा गोला, जिसके भीतर पुत्री-निवह उग रहे हैं।
Volvox का एक निवह: कशाभयुक्त कोशिकाओं का खोखला हरा गोला, जिसके भीतर पुत्री-निवह उग रहे हैं।

टिप्पणी 1.22 (श्रम क्यों बाँटें?)

इन शैवालों में कोई कोशिका एक ही समय तैर और विभाजित नहीं हो सकती: कशाभों को टिकाने वाले आधारकाय तर्कु सजाने के लिए चाहिए। अकेली कोशिका बारी-बारी से काम लेती है; छोटा निवह इतना सह सकता है कि उसकी सारी कोशिकाएँ विभाजित होने तक तैरना रुक जाए; बड़ा निवह विभाजन में लगने वाले घंटों में प्रकाश से नीचे उतर जाता (स्टोक्स का नियम, प्रमेय 1.17)। किसी आकार के आगे कुछ कोशिकाओं को तैरता रखना जबकि दूसरी विभाजित हों, उनकी संतति के नुक़सान से अधिक मूल्यवान है — और एक काया जन्म लेती है। कॉलरकशाभी, यानी वे कॉलरदार कशाभी जिनकी कोशिका स्पंज की भोजन-कोशिका की प्रतिलिपि है, उसी शाखा पर वही पहले पग दिखाते हैं जो प्राणियों तक ले गई।

1.7 अभ्यास

अभ्यास 1.1 ★

एककोशिकीय, निवही और बहुकोशिकीय की परिभाषा दीजिए, और E. coli, Gonium, Volvox तथा खमीर की कोशिका को कारण सहित सही वर्ग में रखिए।

हल

हल — अभ्यास 1.1.

एककोशिकीय: एक ही कोशिका सारे कार्य निभाती है और अकेली जीती है; निवही: एक जैसी कोशिकाएँ जुड़ी रहती हैं पर हर एक अकेली जी सकती है; बहुकोशिकीय: कई प्रकार की कोशिकाएँ, एक-दूसरे पर निर्भर, और जनन केवल जनन वंशक्रम करता है। E. coli और खमीर एककोशिकीय हैं (मुकुल अलग होकर अकेला जीता है); Gonium निवही है (16 एक जैसी कोशिकाएँ, हर एक नया निवह बसाने में समर्थ); Volvox बहुकोशिकीय है (नश्वर कायिक कोशिकाएँ, कुछ जनन कोशिकाएँ)।

अभ्यास 1.2 ★

0.5 µm0.5\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या के किसी गोलाणु का और 50 µm50\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या के किसी गोलीय प्रोटिस्ट का पृष्ठ-आयतन अनुपात निकालिए। प्रति इकाई कोशिकाद्रव्य कौन तेज़ी से श्वसन करता है, और क्यों?

हल

हल — अभ्यास 1.2.

S/V=3/rS/V = 3/r: गोलाणु के लिए 6 µm−16\,\text{µ}\mathrm{m}^{-1}, प्रोटिस्ट के लिए 0.06 µm−10.06\,\text{µ}\mathrm{m}^{-1}, यानी सौ गुना अंतर। प्रति इकाई आयतन गोलाणु तेज़ी से श्वसन करता है: उसके कोशिकाद्रव्य का हर भाग उस पृष्ठ से माइक्रोमीटर के एक अंश भर दूर है जिससे ऑक्सीजन और भोजन भीतर आते हैं, जबकि प्रोटिस्ट का भीतरी भाग प्रति इकाई आयतन सौ गुना कम पृष्ठ से पलता है।

अभ्यास 1.3 ★

किसी जीवाणु और किसी एककोशिकीय सुकेंद्रकी के बीच तीन संरचनात्मक भेद बताइए, और एक ऐसी बात जो कोई जीवाणु नहीं कर सकता पर कोई अमीबा कर सकता है।

हल

हल — अभ्यास 1.3.

केंद्रक नहीं (एक केंद्रकाभ) बनाम केंद्रक आवरण; न सूत्रकणिकाएँ न अंतःझिल्लियाँ, श्वसन शृंखला प्लाज़्मा झिल्ली में बैठी हुई, बनाम कोशिकांग; ऐसा कशाभ जो फ्लैजेलिन की घूमती दृढ़ कुंडली है और प्रोटॉनों से घुमाया जाता है, बनाम 9+29+2 पक्ष्माभ जो डाइनीन और ATP से मुड़ता है; और आकार भी (1 µm1\,\text{µ}\mathrm{m} बनाम कई दहाई) तथा पेप्टाइडोग्लाइकैन भित्ति। कोई जीवाणु भक्षण नहीं कर सकता: उसकी भित्ति किसी कण को निगलने से रोकती है, जो कोई अमीबा अपने कूटपादों से कर लेता है।

अभ्यास 1.4 ★

Paramecium की इन संरचनाओं में से हर एक का कार्य बताइए: पक्ष्माभ, मुखीय नाली, भोजन-रसधानी, संकुचनशील रसधानी, गुरुकेंद्रक, लघुकेंद्रक।

हल

हल — अभ्यास 1.4.

पक्ष्माभ: गमन और भोजन को मुख की ओर बुहारना; मुखीय नाली: कणों को गुहिका तक पहुँचाना; भोजन-रसधानी: निगले हुए जीवाणुओं को लयनकाय के एंजाइमों से पचाना; संकुचनशील रसधानी: परासरण से भीतर आते जल को बाहर फेंकना; गुरुकेंद्रक: कामकाजी केंद्रक, जिसमें रोज़मर्रा के जीवन के लिए जीन की सैकड़ों प्रतियाँ अनुलेखित होती हैं; लघुकेंद्रक: जननिक द्विगुणित केंद्रक, जो अर्धसूत्री विभाजन और संयुग्मन में काम आता है।

अभ्यास 1.5 ★★

कोशिकाद्रव्य में किसी उपापचयज के लिए D=5×10−10 m2/sD = 5 \times 10^{-10}\,\mathrm{m}^{2}/\mathrm{s} लेने पर, 1 µm1\,\text{µ}\mathrm{m} के जीवाणु के आरपार और 500 µm500\,\text{µ}\mathrm{m} के अमीबा के आरपार विसरण में कितना समय लगता है? अमीबा को जो करना ही पड़ता है और जीवाणु को नहीं, उस पर टिप्पणी कीजिए।

हल

हल — अभ्यास 1.5.

t=x2/2Dt = x^2/2D: जीवाणु के लिए (10−6)2/10−9=1 ms(10^{-6})^2/10^{-9} = 1\,\mathrm{ms}; अमीबा के लिए (5×10−4)2/10−9=250 s(5\times 10^{-4})^2/10^{-9} = 250\,\mathrm{s}, यानी लगभग चार मिनट। अमीबा उपापचयजों को बाँटने के लिए विसरण पर नहीं टिक सकता: उसे कोशिकाद्रव्य का प्रवाह और कोशिका-कंकाल के साथ मोटर-चालित अभिगमन चाहिए, जिनके बिना जीवाणु काम चला लेता है।

अभ्यास 1.6 ★★

किसी Paramecium (200 µm200\,\text{µ}\mathrm{m}, 1 mm/s1\,\mathrm{mm}/\mathrm{s}), किसी जीवाणु (2 µm2\,\text{µ}\mathrm{m}, 20 µm/s20\,\text{µ}\mathrm{m}/\mathrm{s}) और किसी मानव तैराक (2 m2\,\mathrm{m}, 1 m/s1\,\mathrm{m}/\mathrm{s}) की रेनॉल्ड्स संख्या ρ=1000 kg/m3\rho = 1000\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3} और η=1×10−3 Pa s\eta = 1 \times 10^{-3}\,\mathrm{Pa}\,\mathrm{s} के साथ निकालिए। कोई तैराक एक आघात के बाद फिसलता क्यों चला जाता है और कोई जीवाणु नहीं?

हल

हल — अभ्यास 1.6.

Re=ρvL/ηRe = \rho vL/\eta: Paramecium 103×10−3×2×10−4/10−3=0.210^3\times 10^{-3}\times 2\times 10^{-4}/10^{-3} = 0.2; जीवाणु 103×2×10−5×2×10−6/10−3=4×10−510^3\times 2\times 10^{-5}\times 2\times 10^{-6}/10^{-3} = 4\times 10^{-5}; तैराक 103×1×2/10−3=2×10610^3\times 1\times 2/10^{-3} = 2\times 10^6। Re≫1Re \gg 1 पर जड़त्व तैराक को आघात के बाद आगे ले जाता है; Re≪1Re \ll 1 पर श्यान कर्षण जीवाणु को एक नैनोमीटर के भीतर रोक देता है, इसलिए वह तभी चलता है जब स्पंदन करता है।

अभ्यास 1.7 ★★

10 µm10\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या का कोई डायटम जल से 100 kg/m3100\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3} अधिक घना है। उसकी डूबन-चाल और 50 m50\,\mathrm{m} गिरने में लगने वाला काल निकालिए। कोशिका अपनी त्रिज्या आधी कर ले तो यह काल कितने गुना बदलता है? और अपना अतिरिक्त घनत्व घटाकर 20 kg/m320\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3} कर ले तो?

हल

हल — अभ्यास 1.7.

vs=2r2Δρg/9η=2×10−10×100×9.81/(9×10−3)=2.2×10−5 m/sv_s = 2r^2\Delta\rho g/9\eta = 2\times 10^{-10}\times 100\times 9.81/(9\times 10^{-3}) = 2.2 \times 10^{-5}\,\mathrm{m}/\mathrm{s}; 50 m50\,\mathrm{m} में 50/2.2×10−5=2.3×106 s50/2.2\times 10^{-5} = 2.3 \times 10^{6}\,\mathrm{s}, यानी 27 दिन लगते हैं। त्रिज्या आधी करने पर vsv_s 4 से भाग जाता है: 108 दिन। Δρ\Delta\rho घटाकर 20 kg/m320\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3} करने पर वह 5 से भाग जाता है: 135 दिन।

अभ्यास 1.8 ★★

किसी Paramecium को 100100, 2525 और 25 µm25\,\text{µ}\mathrm{m} अर्ध-अक्षों के दीर्घवृत्ताभ के रूप में लीजिए (V=43πabcV = \tfrac{4}{3}\pi abc)। वह हर 30 min30\,\mathrm{min} में अपने आयतन जितना जल बाहर फेंकता है। जल का अंतर्वाह µm3/s\text{µ}\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s} में और लिटर प्रति सेकंड में निकालिए।

हल

हल — अभ्यास 1.8.

V=43π×100×25×25=2.6×105 µm3V = \tfrac{4}{3}\pi\times 100\times 25\times 25 = 2.6 \times 10^{5}\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}। 1800 s1800\,\mathrm{s} में: 2.6×105/1800=145 µm3/s2.6\times 10^5/1800 = 145\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s}; और चूँकि 1 µm3=1×10−15 L1\,\text{µ}\mathrm{m}^{3} = 1 \times 10^{-15}\,\mathrm{L}, यह 1.5×10−13 L/s1.5 \times 10^{-13}\,\mathrm{L}/\mathrm{s} है।

अभ्यास 1.9 ★★

कोई आकर्षी 1 mm1\,\mathrm{mm} में अपनी सांद्रता दुगुनी कर लेता है। 1 µm1\,\text{µ}\mathrm{m} के किसी जीवाणु के दोनों सिरों के बीच सापेक्ष अंतर कितना है? 20 µm/s20\,\text{µ}\mathrm{m}/\mathrm{s} पर 1 s1\,\mathrm{s} की दौड़ के आरंभ और अंत के बीच कितना? NN अणु गिनने में लगभग 1/N1/\sqrt{N} की सापेक्ष त्रुटि होती है: समझाइए कि जीवाणु पक्षों की नहीं बल्कि समयों की तुलना क्यों करता है।

हल

हल — अभ्यास 1.9.

1 mm1\,\mathrm{mm} में दुगुना होना प्रति माइक्रोमीटर लगभग 0.07 %0.07\,\% की वृद्धि है (क्योंकि 21/1000−1=0.00072^{1/1000} - 1 = 0.0007), इसलिए कोशिका भर में 0.07 %0.07\,\%। 1 s1\,\mathrm{s} की दौड़ 20 µm20\,\text{µ}\mathrm{m} तय करती है: 1.4 %1.4\,\%। 0.07 %0.07\,\% का अंतर सुलझाने के लिए कोशिका को हर सिरे पर कोई (1/0.0007)2=2×106(1/0.0007)^2 = 2\times 10^6 अणु गिनने पड़ते, जो एक सेकंड में उसके कुछ हज़ार ग्राहियों से बँधने वाले अणुओं से कहीं अधिक है; 1.4 %1.4\,\% के लिए लगभग 50005000 चाहिए, जो संभव है। कालिक तुलना एक असंभव स्थानिक मापन को संभव बना देती है, क्योंकि समाकलन का काम दौड़ पर छोड़ दिया जाता है।

अभ्यास 1.10 ★★★

Thiomargarita namibiensis 500 µm500\,\text{µ}\mathrm{m} व्यास का एक गोलीय गंधक-जीवाणु है, जिसका कोशिकाद्रव्य नाइट्रेट की एक रसधानी के चारों ओर 2 µm2\,\text{µ}\mathrm{m} मोटा खोल है। उसके पृष्ठ का उसके कोशिकाद्रव्यी आयतन से अनुपात निकालिए और E. coli से तुलना कीजिए (0.5 µm0.5\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या का बेलन; सिरे छोड़ दीजिए)। समझाइए कि वह रसधानी उसे इतना बड़ा होने कैसे देती है, और नाइट्रेट किस काम आता है।

हल

हल — अभ्यास 1.10.

पृष्ठ 4πr24\pi r^2 जिसमें r=250 µmr = 250\,\text{µ}\mathrm{m}: 7.9×105 µm27.9 \times 10^{5}\,\text{µ}\mathrm{m}^{2}; कोशिकाद्रव्यी आयतन ≈\approx पृष्ठ ×\times 2 µm2\,\text{µ}\mathrm{m} =1.6×106 µm3= 1.6 \times 10^{6}\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}; अनुपात 0.5 µm−10.5\,\text{µ}\mathrm{m}^{-1}। E. coli के लिए, एक बेलन: S/V=2πrL/πr2L=2/r=4 µm−1S/V = 2\pi r L/\pi r^2 L = 2/r = 4\,\text{µ}\mathrm{m}^{-1}। वह दानव E. coli से केवल आठ गुना ही ख़राब है, 500 गुना नहीं, क्योंकि उसके कोशिकाद्रव्य का हर बिंदु पृष्ठ से 2 µm2\,\text{µ}\mathrm{m} के भीतर है। वह रसधानी नाइट्रेट सँजोए रखती है, यानी उसका इलेक्ट्रॉन ग्राही, ताकि वह अनॉक्सी अवसाद में उन विरल मथनों के बीच सल्फाइड पर श्वसन कर सके जो नाइट्रेट लाती हैं (अध्याय 2)।

अभ्यास 1.11 ★★★

Volvox में कायिक कोशिकाएँ कभी विभाजित नहीं होतीं और निवह के साथ मर जाती हैं। कशाभन की बाध्यता और स्टोक्स का नियम काम में लेकर समझाइए कि ऐसी कोशिकाएँ 10 00010\,000 कोशिकाओं के निवह में रखने योग्य क्यों हैं पर 16 के निवह में नहीं, और जनन कोशिकाएँ गोले की सबसे बड़ी कोशिकाएँ क्यों हैं।

हल

हल — अभ्यास 1.11.

कोई कोशिका एक साथ तैर और विभाजित नहीं हो सकती। 16 कोशिकाओं का निवह विभाजन के घंटों में तैरना रोक दे तो स्टोक्स के नियम से उपेक्षणीय दूरी डूबता है (उसकी त्रिज्या कुछ दहाई माइक्रोमीटर है, उसकी डूबन-चाल माइक्रोमीटर प्रति सेकंड); पूरा निवह विभाजित हो सकता है और कुछ नहीं खोता। 10 00010\,000 कोशिकाओं का 500 µm500\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या वाला गोला सौ गुना तेज़ डूबता — मिलिमीटर प्रति सेकंड, घंटे भर में मीटर — और प्रकाश से बाहर निकल जाता: इसलिए अधिकांश कोशिकाओं को तैरता रखना और कुछ को विभाजित होने देना लाभ का सौदा है। जनन कोशिकाएँ इसलिए बड़ी हैं कि उन्हें बिना खाए, क्रमिक विभाजनों से, हज़ारों कोशिकाओं का पूरा पुत्री-गोला बनाने के संसाधन ढोने पड़ते हैं, और उन्हें काया ही रसद देती है।

अभ्यास 1.12 ★★★

“प्रोटिस्ट एक स्तर है, क्लेड नहीं।” इस अध्याय में नामित वंशक्रमों से यह भेद समझाइए, और बताइए कि वही कथन “प्राक्केंद्रकी” के लिए सच और “सायनोजीवाणु” के लिए झूठ क्यों है।

हल

हल — अभ्यास 1.12.

क्लेड कोई पूर्वज और उसकी सारी संतति है; स्तर वह संगठन-स्तर है जिस तक कई वंशक्रम पहुँचे हैं। प्रोटिस्टों में — हरी शैवाल (स्थलीय पौधों के साथ), डायटम (भूरी शैवालों के साथ), पक्ष्माभी (डाइनोफ्लैजेलेट और Plasmodium के साथ), अमीबा (प्राणियों और कवकों के निकट) — केवल अकेली जी जाती सुकेंद्रकी कोशिका साझी है, और उनका अंतिम साझा पूर्वज हम समेत सारे सुकेंद्रकियों का पूर्वज है: यानी एक स्तर। “प्राक्केंद्रकी” जीवाणुओं और आर्किया को उस बात से जोड़ता है जो उनमें नहीं है; आर्किया जीवाणुओं से अधिक सुकेंद्रकियों के निकट हैं, इसलिए वह शब्द भी एक स्तर है। सायनोजीवाणु उस एक पूर्वज से उतरे हैं जिसने ऑक्सीजनी प्रकाशसंश्लेषण निकाला, और उसकी सारी संतति उनमें है (हरितलवक वंशक्रम को छोड़कर): यानी एक क्लेड।

1.8 समस्या: तालाब के पानी की एक बूँद

समस्या 1.1

सप्तांत समस्या — तालाब के पानी का एक प्रतिदर्श गिना जाता है, उगाया जाता है, और उसकी कोशिकाओं को चलाने वाली भौतिकी के लिए विश्लेषित किया जाता है, और अंत किसी हरी शैवाल के जल तथा ऊर्जा बजट पर

वसंत में 1000 m31000\,\mathrm{m}^{3} के किसी तालाब का प्रतिदर्श लिया जाता है। सूक्ष्मदर्शी के नीचे, एक गणन-कक्ष, जिसकी जाली 1 mm1\,\mathrm{mm}×\times1 mm1\,\mathrm{mm} घेरती है और जिसके ऊपर 0.1 mm0.1\,\mathrm{mm} पर एक आवरण-पट्टी टिकी है, उसमें Chlamydomonas की 24 कोशिकाएँ दिखती हैं (5 µm5\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या के गोले, घनत्व 1050 kg/m31050\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3})। ρ=1000 kg/m3\rho = 1000\,\mathrm{kg}/\mathrm{m}^{3}, η=1×10−3 Pa s\eta = 1 \times 10^{-3}\,\mathrm{Pa}\,\mathrm{s}, g=9.81 m/s2g = 9.81\,\mathrm{m}/\mathrm{s}^{2}, R=8.314 J/mol/KR = 8.314\,\mathrm{J}/\mathrm{mol}/\mathrm{K}, T=293 KT = 293\,\mathrm{K}, और D=1.9×10−9 m2/sD = 1.9 \times 10^{-9}\,\mathrm{m}^{2}/\mathrm{s} (जल में CO2\mathrm{CO_2} के लिए) लीजिए।

भाग I — गिनती।

  1. जाली के नीचे के जल का आयतन माइक्रोलिटर में निकालिए।
  2. इससे तालाब में Chlamydomonas का घनत्व, कोशिकाएँ प्रति मिलिलिटर में, निकालिए।
  3. एक कोशिका का आयतन और उसका पृष्ठ-आयतन अनुपात निकालिए।
  4. तालाब के जल के आयतन का कितना अंश इन कोशिकाओं ने घेरा है?
  5. तालाब में कितने Chlamydomonas हैं?
  6. एक तंतुमय सायनोजीवाणु भी उपस्थित है। सूक्ष्मदर्शी के नीचे दिखने वाले दो ऐसे लक्षण बताइए जो उसे शैवाल से अलग करते हैं।

भाग II — वृद्धि। प्रतिदर्श प्रकाश में रखा जाता है और 48 h48\,\mathrm{h} बाद फिर गिना जाता है: जाली के नीचे 384384 कोशिकाएँ।

  1. पीढ़ी काल TT निकालिए।
  2. वृद्धि दर स्थिरांक kk को N=N0ektN = N_0 e^{kt} में, h−1\mathrm{h}^{-1} की इकाई में, निकालिए।
  3. इसी दर पर तालाब की आबादी को 1×108 1 \times 10^{8}\, कोशिकाएँ प्रति मिलिलिटर तक पहुँचने में कितना समय लगता?
  4. तीन कारण बताइए कि वह नहीं पहुँचेगी।
  5. यदि कोशिकाएँ केवल 12 h12\,\mathrm{h} के दिन-उजाले में बढ़ें और रात में बिलकुल नहीं, तो वही वृद्धि कितने समय में होती है?
  6. Chlamydomonas बहुविभाजन से विभाजित होती है और एक साथ 4, 8 या 16 पुत्रियाँ छोड़ती है। समझाइए कि फिर भी गिनती से पीढ़ी काल भली-भाँति परिभाषित क्यों है।

भाग III — कोशिका की भौतिकी।

  1. 100 µm/s100\,\text{µ}\mathrm{m}/\mathrm{s} पर तैरती किसी कोशिका की रेनॉल्ड्स संख्या निकालिए।
  2. mm द्रव्यमान की कोई कोशिका अपने कशाभ चलाना बंद कर दे तो mv/(6πηr)mv/(6\pi\eta r) दूरी तक बहती चली जाती है। उसे निकालिए।
  3. तैरना बंद कर चुकी किसी कोशिका की डूबन-चाल निकालिए।
  4. 1 m1\,\mathrm{m} डूबने में लगने वाले काल की तुलना 1 m1\,\mathrm{m} ऊपर तैरने में लगने वाले काल से कीजिए।
  5. तालाब में 10 µmol/L10\,\text{µ}\mathrm{mol}/\mathrm{L} घुली हुई CO2\mathrm{CO_2} है। किसी कोशिका को CO2\mathrm{CO_2} की अधिकतम विसरण-आपूर्ति, अणु प्रति सेकंड में, निकालिए।
  6. किसी कोशिका में 100 pg100\,\mathrm{pg} कार्बन है और वह उसे एक पीढ़ी में दुगुना कर लेती है। उसकी माध्य कार्बन-माँग अणु प्रति सेकंड में, और आपूर्ति का माँग से अनुपात, निकालिए।
  7. उसी कार्बन-घनत्व वाली 50 µm50\,\text{µ}\mathrm{m} त्रिज्या की किसी काल्पनिक कोशिका के लिए यह तुलना दोहराइए। निष्कर्ष निकालिए।

भाग IV — जल और ऊर्जा। कोशिकाद्रव्य में 100 mmol/L100\,\mathrm{mmol}/\mathrm{L} विलेय हैं, तालाब में 1 mmol/L1\,\mathrm{mmol}/\mathrm{L}। झिल्ली की जलचालकता Lp=1×10−14 m s−1 Pa−1L_p = 1 \times 10^{-14}\,\mathrm{m}\,\mathrm{s}^{-1}\,\mathrm{Pa}^{-1} है (प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रति इकाई दाब-अंतर जल का आयतन-अभिवाह)। एक ATP के जल-अपघटन से 50 kJ/mol50\,\mathrm{kJ}/\mathrm{mol} मिलते हैं; एक कार्बन परमाणु स्थिर करने में तीन ATP लगते हैं।

  1. झिल्ली के आरपार परासरण दाब का अंतर निकालिए।
  2. प्रति सेकंड कोशिका में घुसने वाले जल का आयतन µm3/s\text{µ}\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s} में निकालिए।
  3. संकुचनशील रसधानी के बिना कोशिका को अपना आयतन दुगुना करने में कितना समय लगता?
  4. इस जल को परासरण दाब के विरुद्ध बाहर फेंकने के लिए आवश्यक न्यूनतम शक्ति निकालिए।
  5. उसे ATP अणु प्रति सेकंड में बदलिए और कार्बन-स्थिरीकरण पर कोशिका के ख़र्च होते ATP से तुलना कीजिए (प्रश्न 18)।
  6. परिणाम बताइए: कोशिका में जल का अंतर्वाह, उसे फटने में लगने वाला काल, और सूखा रहने में उसकी ऊर्जा का कितना अंश ख़र्च होता है।
हल

हल — समस्या 1.1.

1. 1×1×0.1=0.1 mm3=0.1 µL1\times 1\times 0.1 = 0.1\,\mathrm{mm}^{3} = 0.1\,\text{µ}\mathrm{L}। 2. 24/0.1 µL=24024/0.1\,\text{µ}\mathrm{L} = 240 प्रति µL\text{µ}\mathrm{L} =2.4×105 = 2.4 \times 10^{5}\, कोशिकाएँ प्रति मिलिलिटर। 3. V=43π×125=524 µm3V = \tfrac{4}{3}\pi\times 125 = 524\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}; S/V=3/5=0.6 µm−1S/V = 3/5 = 0.6\,\text{µ}\mathrm{m}^{-1}। 4. प्रति मिलिलिटर 2.4×105×524=1.26×108 µm32.4\times 10^5\times 524 = 1.26 \times 10^{8}\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}, और 1 mL=1×1012 µm31\,\mathrm{mL} = 1 \times 10^{12}\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}: यानी अंश 1.3×10−41.3\times 10^{-4}, 0.013 %0.013\,\%। 5. 1000 m3=1×109 mL1000\,\mathrm{m}^{3} = 1 \times 10^{9}\,\mathrm{mL}: 2.4×10142.4\times 10^{14} कोशिकाएँ। 6. सायनोजीवाणु कहीं छोटी कोशिकाओं (कुछ माइक्रोमीटर) का तंतु है, नीला-हरा और बिना किसी स्पष्ट हरितलवक या केंद्रक के, और वह कशाभों से तैरता नहीं; शैवाल दो कशाभों, एक नेत्रबिंदु और एक प्याले-आकार के हरितलवक वाली अकेली अंडाकार कोशिका है। 7. 384/24=16=24384/24 = 16 = 2^4: 48 h48\,\mathrm{h} में चार बार दुगुना, T=12 hT = 12\,\mathrm{h}। 8. k=ln⁡2/T=0.693/12=0.058 h−1k = \ln 2/T = 0.693/12 = 0.058\,\mathrm{h}^{-1}। 9. t=ln⁡(108/2.4×105)/k=ln⁡(417)/0.058=6.03/0.058=104 ht = \ln(10^8/2.4\times 10^5)/k = \ln(417)/0.058 = 6.03/0.058 = 104\,\mathrm{h}, यानी लगभग 4.3 दिन। 10. पोषक (फ़ॉस्फ़ेट, नाइट्रेट) चुक जाते हैं; कोशिकाएँ एक-दूसरे पर छाया डालती हैं जिससे प्रति कोशिका प्रकाश घट जाता है; चरने वाले (पक्ष्माभी, रोटिफ़र, Daphnia) उन पर पलकर बढ़ जाते हैं; और 1×108 1 \times 10^{8}\, प्रति मिलिलिटर पर कोशिकाएँ आयतन का कोई पाँच प्रतिशत भर लेतीं और घुली हुई CO2\mathrm{CO_2} चुका देतीं। 11. वृद्धि केवल आधे समय: माध्य दर आधी, यानी 208 h208\,\mathrm{h}, 8.7 दिन। 12. गिनती आबादी मापती है, अलग-अलग कोशिकाएँ नहीं: यदि कोई कोशिका हर 36 h36\,\mathrm{h} में 8 पुत्रियाँ छोड़े, तो आबादी 12 h12\,\mathrm{h} के तीन पीढ़ी कालों में 8 =23= 2^3 गुना हो जाती है। पीढ़ी काल संख्या के दुगुने होने का माध्य काल है, विभाजन चाहे जैसे भी समूहबद्ध हों। 13. Re=103×10−4×10−5/10−3=10−3Re = 10^3\times 10^{-4}\times 10^{-5}/10^{-3} = 10^{-3}। 14. m=1050×5.24×10−16=5.5×10−13 kgm = 1050\times 5.24\times 10^{-16} = 5.5 \times 10^{-13}\,\mathrm{kg}; 6πηr=6π×10−3×5×10−6=9.4×10−8 kg/s6\pi\eta r = 6\pi\times 10^{-3}\times 5\times 10^{-6} = 9.4 \times 10^{-8}\,\mathrm{kg}/\mathrm{s}; d=5.5×10−13×10−4/9.4×10−8=5.8×10−10 md = 5.5\times 10^{-13}\times 10^{-4}/9.4\times 10^{-8} = 5.8 \times 10^{-10}\,\mathrm{m}: यानी आधा नैनोमीटर। 15. vs=2×25×10−12×50×9.81/(9×10−3)=2.7×10−6 m/sv_s = 2\times 25\times 10^{-12}\times 50\times 9.81/(9\times 10^{-3}) = 2.7 \times 10^{-6}\,\mathrm{m}/\mathrm{s}, 2.7 µm/s2.7\,\text{µ}\mathrm{m}/\mathrm{s}। 16. 1 m1\,\mathrm{m} डूबने में: 1/2.7×10−6=3.7×105 s1/2.7\times 10^{-6} = 3.7 \times 10^{5}\,\mathrm{s}, 4.3 दिन; 100 µm/s100\,\text{µ}\mathrm{m}/\mathrm{s} पर ऊपर तैरने में: 1×104 s1 \times 10^{4}\,\mathrm{s}, 2.8 घंटे। तैरना 37 गुना जीतता है। 17. c∞=1×10−2 mol/m3c_\infty = 1 \times 10^{-2}\,\mathrm{mol}/\mathrm{m}^{3}: J=4π×1.9×10−9×5×10−6×10−2=1.2×10−15 mol/s=7.2×108J = 4\pi\times 1.9\times 10^{-9}\times 5\times 10^{-6}\times 10^{-2} = 1.2 \times 10^{-15}\,\mathrm{mol}/\mathrm{s} = 7.2\times 10^8 अणु प्रति सेकंड। 18. 100 pg100\,\mathrm{pg} =1×10−10 g=8.3×10−12 mol= 1 \times 10^{-10}\,\mathrm{g} = 8.3 \times 10^{-12}\,\mathrm{mol} कार्बन, 12 h12\,\mathrm{h} =43 200 s= 43\,200\,\mathrm{s} में दुगुना: 1.9×10−16 mol/s1.9 \times 10^{-16}\,\mathrm{mol}/\mathrm{s} =1.2×108= 1.2\times 10^8 परमाणु प्रति सेकंड। आपूर्ति बटा माँग: 7.2/1.2=67.2/1.2 = 6। 19. आपूर्ति दस गुना बढ़ती है (∝r\propto r), माँग एक हज़ार गुना (∝r3\propto r^3): अनुपात 6/100=0.066/100 = 0.06 रह जाता है; ऐसी कोशिका दर के केवल छह प्रतिशत पर ही बढ़ पाती, इसलिए उस आकार की विसरण-पोषित शैवाल मथन, भीतरी अभिगमन या कहीं धीमे उपापचय के बिना असंभव है। 20. ΔΠ=RTΔc=8.314×293×99=2.4×105 Pa\Delta\Pi = RT\Delta c = 8.314\times 293\times 99 = 2.4 \times 10^{5}\,\mathrm{Pa}, 2.4 bar2.4\,\mathrm{bar}। 21. क्षेत्रफल 4π(5×10−6)2=3.14×10−10 m24\pi(5\times 10^{-6})^2 = 3.14 \times 10^{-10}\,\mathrm{m}^{2}; अंतर्वाह LpAΔΠ=10−14×3.14×10−10×2.4×105=7.6×10−19 m3/s=0.76 µm3/sL_p A\Delta\Pi = 10^{-14}\times 3.14\times 10^{-10}\times 2.4\times 10^5 = 7.6 \times 10^{-19}\,\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s} = 0.76\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s}। 22. 524/0.76=690 s524/0.76 = 690\,\mathrm{s}, यानी लगभग ग्यारह मिनट। 23. P=ΔΠ×P = \Delta\Pi\times अभिवाह =2.4×105×7.6×10−19=1.8×10−13 W= 2.4\times 10^5\times 7.6\times 10^{-19} = 1.8 \times 10^{-13}\,\mathrm{W}। 24. एक ATP: 5×104/6.02×1023=8.3×10−20 J5\times 10^4/6.02\times 10^{23} = 8.3 \times 10^{-20}\,\mathrm{J}: 1.8×10−13/8.3×10−20=2.2×1061.8\times 10^{-13}/8.3\times 10^{-20} = 2.2\times 10^6 ATP प्रति सेकंड। कार्बन स्थिरीकरण: 3×1.2×108=3.6×1083\times 1.2\times 10^8 = 3.6\times 10^8 ATP प्रति सेकंड। रसधानी उसका 0.6 %0.6\,\% लेती है — फटने के विरुद्ध सस्ता बीमा। 25. जल का अंतर्वाह 0.76 µm3/s0.76\,\text{µ}\mathrm{m}^{3}/\mathrm{s} (ग्यारह मिनट में कोशिका के आयतन जितना); संकुचनशील रसधानी के बिना कोशिका अपना आयतन लगभग 700 s700\,\mathrm{s} में दुगुना कर लेती; सूखा रहना कम से कम 2×1062\times 10^6 ATP प्रति सेकंड लेता है, यानी उसका प्रकाशसंश्लेषण कार्बन पर जितना ख़र्च करता है उसका एक प्रतिशत से भी कम।

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