समतल अपरूपण प्रवाह में, किसी पृष्ठ के ऊपर का तरल उसके नीचे के तरल पर (किसी पृष्ठ-अवयव के माध्यम से) यह स्पर्शीय बल लगाता है:
और इस तरह धीमी परत को आगे खींचता है और बदले में स्वयं पीछे खिंचता है। अपरूपण प्रतिबल है; और गुणांक (मात्रक ) तरल की गतिक श्यानता है, जबकि () उसकी शुद्धगतिक श्यानता। जिस तरल के लिए अपरूपण-दर पर निर्भर न करे वह न्यूटनी है: पानी, हवा, तेल, ऐल्कोहॉल; रक्त, रंग, चटनी और बहुलक-द्रव नहीं। पर परिमाण की कोटि: हवा (), पानी (), जैतून का तेल , ग्लिसरॉल , शहद । द्रव गरम होने पर पतले पड़ते हैं, गैसें गाढ़ी।
उदाहरण
उदाहरण 4.4 (मेज़ पर अपरूपण प्रतिबल)
किसी पट्ट और मेज़ के बीच तेल की परत (), और पट्ट से सरकता हुआ: , अर्थात् वर्ग मीटर के दसवें भाग पर का बल — यही स्नेहित धारक का सिद्धांत है, जहाँ श्यान कर्षण सौ गुना बड़े शुष्क घर्षण की जगह ले लेता है। चम्मच पर मोटा शहद, , जो से बहता है: , ठीक उतना ही जितना प्रति एकांक क्षेत्रफल एक मिलीमीटर शहद का भार — और इसीलिए वह उसी चाल से बहता है।