ठोस को मन ही मन किसी छोटे पृष्ठ के अनुदिश काटिए, जिसका अभिलंब हो: की ओर का पदार्थ दूसरी ओर के पदार्थ को बल से खींचता है — यही कर्षण है। यह बल पर रैखिक रूप से निर्भर है (कोशी), अतः उसे प्रतिबल प्रदिश में बाँधा जा सकता है:
पास्कल में। किसी ऐसे फलक के पार का खिंचाव (: तनाव) या धक्का (: संपीडन) है जिसका अभिलंब हो; वह बल है जो के अनुदिश हो और जिसे के अभिलंब वाला फलक ढो रहा हो — अर्थात् अपरूपण प्रतिबल। विराम में कोई तरल विशेष स्थिति है: दाब हर फलक पर बराबर धकेलता है और किसी पर अपरूपण नहीं करता, और इसीलिए तरल बहते हैं — वे स्थैतिक अपरूपण ढो ही नहीं सकते।