माध्यमिक जीवविज्ञान · Grades 10–12
13उत्परिवर्तन और आनुवंशिक विविधता
किसी ऐसे परिवार के दो साधारण माता-पिता के यहाँ, जिसमें इस स्थिति का कोई इतिहास नहीं, ऐसा बच्चा जन्म लेता है जिसमें वर्णक बिलकुल नहीं है — सफ़ेद बाल, फीकी त्वचा, और ऐसी आँखें जो तेज़ रोशनी सह नहीं पातीं। जिस जीवाणु कॉलोनी ने कभी कोई प्रतिजैविक देखा ही नहीं, उसकी दस करोड़ कोशिकाओं में कुछ ऐसी होती हैं जो उसका प्रतिरोध पहले से ही करती हैं। किसी माली को गुलाब की झाड़ी की एक ही शाखा पर अलग रंग के फूल मिलते हैं। हर हाल में किसी DNA अनुक्रम में, एक बार, किसी एक कोशिका में, बदलाव आया है; और हर हाल में वह बदलाव उसके बाद ईमानदारी से नक़ल होता रहता है। यह अध्याय उन्हीं बदलावों के बारे में है: वे हैं क्या, आते कहाँ से हैं, कोशिका उन्हें सीमित कैसे रखती है, और जीवन इस पर क्यों टिका है कि वे कभी पूरी तरह रुकें नहीं।
13.1 उत्परिवर्तन है क्या
परिभाषा 13.1 (उत्परिवर्तन)
उत्परिवर्तन किसी DNA अणु के न्यूक्लियोटाइडों के अनुक्रम में आया वह बदलाव है जो उस कोशिका के वंशजों तक पहुँचता है जिसमें वह हुआ हो। सबसे आम बिंदु उत्परिवर्तन हैं, जो एक या कुछ ही न्यूक्लियोटाइडों पर असर डालते हैं:
- प्रतिस्थापन: एक न्यूक्लियोटाइड की जगह दूसरा;
- निवेशन: एक या अधिक न्यूक्लियोटाइड जोड़े गए;
- विलोपन: एक या अधिक न्यूक्लियोटाइड हटाए गए।
बड़े बदलाव — किसी खंड का दोहराया जाना, उलट जाना, हट जाना, या किसी पूरे गुणसूत्र का मिल जाना या खो जाना — भी उत्परिवर्तन ही हैं।
प्रतिज्ञप्ति 13.2 (उत्परिवर्तन होते कहाँ हैं, और किसके)
किसी शरीर कोशिका में हुआ उत्परिवर्तन (कायिक उत्परिवर्तन) केवल उसी कोशिका के वंशजों तक पहुँचता है: यानी ज़्यादा से ज़्यादा किसी एक व्यक्ति के ऊतक का एक टुकड़ा। किसी जनन कोशिका में हुआ उत्परिवर्तन — यानी किसी युग्मक या उसके किसी पूर्ववर्ती में — उससे बनने वाली संतान तक और उसकी हर कोशिका तक पहुँचता है: और जनन-वंश उत्परिवर्तन ही अकेली ऐसी क़िस्म है जो जाति की आनुवंशिकता में घुसती है। गुलाब की झाड़ी की वह अजीब शाखा कायिक है; और वर्णकहीन बच्चे की स्थिति किसी पूर्वज में हुए जनन-वंश उत्परिवर्तन से आई, जो पीढ़ियों तक चुपचाप ढोया गया।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
उदाहरण 13.3 (उत्परिवर्तन की दर)
प्रतिकृतिकरण न्यूक्लियोटाइडों में लगभग एक ग़लती छोड़ता है (अध्याय 11)। इसलिए क्षारक-जोड़ों का कोई जीन हर प्रतिकृतियों में लगभग एक बार ग़लत उतरता है; और किसी मनुष्य में, जिसका जीनोम जीवन भर में क़रीब बार नक़ल होता है, हर जीन में बहुत-सी कोशिकाओं में उत्परिवर्तन जमा हो जाते हैं। हर बच्चा क़रीब 60 ऐसे नए उत्परिवर्तनों के साथ जन्म लेता है जो किसी भी जनक के पास नहीं थे — और लगभग सारे जीनोम के उन 98% हिस्से में जो जीन है ही नहीं।
13.2 कारण: स्वतःस्फूर्त और प्रेरित
प्रतिज्ञप्ति 13.4 (स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्तन)
उत्परिवर्तन हर कोशिका में, बिना किसी बाहरी कारक के, उठते रहते हैं: पॉलिमरेज़ की जाँच से बच निकलने वाली विरली बेमेल जोड़ियों से, और ख़ुद DNA की रासायनिक अस्थिरता से, जिसके क्षारक साधारण उपापचय के जल तथा क्रियाशील अणुओं से हर कोशिका में हर दिन हज़ारों बार क्षतिग्रस्त होते हैं। ऐसे स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्तन यादृच्छिक होते हैं: वे किसी भी स्थान पर, ऐसी दर से होते हैं जो इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वह बदलाव कोशिका के काम का होगा या नहीं।
साक्ष्य. लेडरबर्ग (1952) ने ऐसे जीवाणु, जो कभी किसी प्रतिजैविक के सामने आए ही नहीं थे, एक प्लेट पर फैलाए, उन्हें कॉलोनियों में बढ़ने दिया, फिर प्लेट पर मख़मल का एक गद्दा दबाकर उसकी छाप — वही कॉलोनियाँ, उन्हीं जगहों पर — प्रतिजैविक वाली कई प्लेटों पर छाप दी। प्रतिरोधी कॉलोनियाँ, जो थोड़ी ही थीं, हर प्रतिजैविक प्लेट पर उन्हीं जगहों पर उभरीं। चूँकि वे मूल प्लेट की उन्हीं कॉलोनियों से आई थीं, जिन्होंने वह प्रतिजैविक कभी देखा ही नहीं था, इसलिए प्रतिरोध वाला उत्परिवर्तन उस संपर्क से पहले ही मौजूद था: प्रतिजैविक ने उसे उजागर किया, पैदा नहीं किया। वे उत्परिवर्तन कॉलोनियों की वृद्धि के दौरान यादृच्छिक रूप से हुए थे, बिना इस बात की परवाह किए कि आगे चलकर वे किस काम आएँगे। ∎
परिभाषा 13.5 (उत्परिवर्तजन)
उत्परिवर्तजन वह भौतिक या रासायनिक कारक है जो DNA को क्षति पहुँचाकर उत्परिवर्तन की दर बढ़ा देता है। पराबैंगनी प्रकाश किसी लड़ी पर पड़ोसी थाइमीनों को आपस में जोड़ देता है; एक्स-किरणें और रेडियोसक्रियता लड़ियाँ तोड़ देती हैं; और तंबाकू के धुएँ का बेंज़ोपाइरीन या फफूँदी लगे अनाज का एफ़्लाटॉक्सिन जैसे रसायन क्षारकों से चिपककर कुंडली को मरोड़ देते हैं। जो कोशिका किसी उत्परिवर्तजन के सामने आती है वह अपने स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्तनों के ऊपर प्रेरित उत्परिवर्तन भी ढोती है — और वे भी यादृच्छिक स्थानों पर ही, बस संख्या में अधिक।
उदाहरण 13.6 (खमीर पर पराबैंगनी)
प्लेटों पर फैलाई गई खमीर कोशिकाएँ बढ़ते समय तक पराबैंगनी प्रकाश के सामने रखी जाती हैं: बाद आधी कोशिकाएँ कॉलोनी बना ही नहीं पातीं, बाद चौथाई, बाद आठवाँ हिस्सा — यानी हर ख़ुराक बचे हुओं को आधा कर देती है। और बचे हुओं में उन कॉलोनियों का अनुपात जिनका कोई लक्षण दिखने लायक़ बदल गया हो (रंग, आकार, किसी ख़ास शर्करा पर उगने में असमर्थता) दस लाख में एक से बढ़कर हज़ार में एक हो जाता है। वह लैंप DNA को मरम्मत से परे क्षति पहुँचाकर मारता है, और उससे ज़रा कम क्षति पहुँचाकर उत्परिवर्तित करता है।
13.3 कोशिका पलटकर लड़ती है: मरम्मत
प्रतिज्ञप्ति 13.7 (DNA की मरम्मत)
कोई कोशिका दिन भर में DNA की दसियों हज़ार क्षतियाँ झेलती है और उनमें से लगभग कोई भी नहीं रखती: समर्पित एंजाइम तंत्र दोहरी कुंडली पर गश्त लगाते हैं, किसी क्षतिग्रस्त या बेमेल क्षारक को पहचानते हैं, एक लड़ी का ख़राब खंड काटकर निकाल देते हैं और दूसरी लड़ी को साँचा बनाकर उसे दोबारा बना देते हैं — यानी अध्याय 3 वाली पूरकता एक बार फिर। कोई क्षति उत्परिवर्तन तभी बनती है जब वह अगले प्रतिकृतिकरण के उसे नक़ल कर लेने से पहले मरम्मत से बच निकले। मरम्मत ही वह वजह है कि उत्परिवर्तन की दर है, नहीं।
साक्ष्य. जिन लोगों को ज़ीरोडर्मा पिगमेंटोसम नाम की वंशागत स्थिति होती है, उनमें पराबैंगनी क्षति काटकर निकालने वाले एंजाइमों में से एक नहीं होता। उनकी त्वचा, साधारण दिन के उजाले के सामने आकर, सामान्य त्वचा से हज़ार गुना अधिक बार और बचपन से ही कैंसर पैदा करती है; और धूप से बचाकर रखी जाए तो वह सामान्य रहती है। वही पराबैंगनी, वही क्षतियाँ — पर मरम्मत के बिना क्षतियाँ बनी रह जाती हैं, और उत्परिवर्तन उन जीनों में जमा होते जाते हैं जो कोशिका विभाजन को नियंत्रित करते हैं (अध्याय 17)। मरम्मत एंजाइमों से रहित खमीर और जीवाणु प्रभेद प्रयोगशाला में वैसी ही अति-संवेदनशीलता दिखाते हैं। ∎
13.4 किसी उत्परिवर्तन के नतीजे
प्रतिज्ञप्ति 13.8 (अनुक्रम से लक्षणप्ररूप तक)
कोई उत्परिवर्तन किसी युग्मविकल्पी को नए युग्मविकल्पी में बदल देता है। उसका असर इस पर निर्भर है कि वह कहाँ पड़ता है और उस जीन के कूट वाले प्रोटीन के साथ क्या करता है (अध्याय 14 इसके नियम देता है):
- किसी जीन के बाहर, या ऐसे स्थान पर जो प्रोटीन को बदलता नहीं: कोई असर नहीं — और यही बहुत बड़ा बहुमत है;
- किसी जीन के भीतर, एक ऐमीनो अम्ल बदलते हुए: ऐसा प्रोटीन जो ज़रा अलग ढंग से काम करता है, या बिलकुल नहीं करता, या कभी-कभार बेहतर;
- किसी जीन के भीतर, संदेश को खिसकाते या काटते हुए: आमतौर पर ऐसा प्रोटीन जो काम ही नहीं करता।
बदला हुआ प्रोटीन हानिकारक है, तटस्थ है या उपयोगी, यह पर्यावरण पर निर्भर करता है: हीमोग्लोबिन के जीन का वही युग्मविकल्पी बिना मलेरिया वाले इलाक़े में बोझ है और जहाँ मलेरिया हो वहाँ बचाव।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
उदाहरण 13.9 (वर्णक खोया, वर्णक बचा)
मेलानिन वर्णक कोई एंजाइम बनाता है। उसके जीन के दर्जनों अलग-अलग उत्परिवर्तन ज्ञात हैं, और उनमें से हर एक ऐसा एंजाइम देता है जो काम नहीं करता तथा, ऐसे दो युग्मविकल्पी ढोते व्यक्ति में, अध्याय के आरंभ वाली वर्णकहीन स्थिति। उनमें से हर एक यादृच्छिक रूप से, एक बार, किसी जनन कोशिका में उठा था; और वह दिखने वाली स्थिति तभी उभरती है जब दो वाहक अपने चुप युग्मविकल्पी एक ही बच्चे तक पहुँचा दें। वही जीन, किसी और युग्मविकल्पी में, ज़रा कम सक्रिय एंजाइम बनाता है — और उसके साथ हल्की त्वचा, जो ऊँचे अक्षांशों पर हज़ारों साल रहने वाली आबादियों में आम है, जहाँ ज़रा कम वर्णक त्वचा को कमज़ोर धूप से अधिक विटामिन D बनाने देता है।
प्रतिज्ञप्ति 13.10 (उत्परिवर्तन, विविधता का स्रोत)
हर जीन का हर युग्मविकल्पी किसी पहले वाले युग्मविकल्पी के उत्परिवर्तन से ही शुरू हुआ था। उत्परिवर्तन अकेली ऐसी प्रक्रिया है जो नई आनुवंशिक जानकारी बनाती है; और आख़िरी वर्ष वाला लैंगिक फेंटना केवल उसी को दोबारा मिलाता है जो उत्परिवर्तन ने बनाया है। विरला, यादृच्छिक और व्यक्ति के लिए ज़्यादातर तटस्थ या हानिकारक होते हुए भी उत्परिवर्तन ही पीढ़ियों के साथ वह विविधता जुटाता है जिस पर अध्याय 5 वाला जैव विकास टिका है।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
विधि 13.11 (किसी उत्परिवर्तन का विश्लेषण)
- उत्परिवर्ती अनुक्रम की मूल से अक्षर-दर-अक्षर तुलना कीजिए और बदलाव का नाम बताइए (प्रतिस्थापन, निवेशन, विलोपन; और कितने न्यूक्लियोटाइड)।
- उसकी जगह पहचानिए: किसी जीन में या उसके बाहर; और यदि जीन में हो, तो यह भी कि संदेश का पढ़ना खिसका है या नहीं।
- जिस कोशिका में वह हुआ उसे पहचानिए: कायिक (एक व्यक्ति, एक ऊतक) या जनन-वंश (आगे पहुँचने वाला)।
- यदि दर असामान्य हो तो कारण ढूँढ़िए (किसी उत्परिवर्तजन से संपर्क, ख़राब मरम्मत); वरना उसे संयोग मानिए।
- नतीजे को प्रोटीन, कोशिका, जीव और आबादी के स्तर पर आँकिए — इसी क्रम में, और किसी बताए हुए पर्यावरण में।
टिप्पणी 13.12 (यादृच्छिकता, ठीक-ठीक)
“यादृच्छिक” का मतलब यह नहीं कि सारे स्थान बराबर उत्परिवर्तित होते हैं — कुछ अनुक्रम अधिक नाज़ुक होते हैं — और न यह कि उत्परिवर्तन बेवजह होते हैं। उसका मतलब है कि किसी उत्परिवर्तन का होना इस बात से स्वतंत्र है कि वह कोशिका के काम आएगा या नहीं: प्रतिकृति प्लेटों वाले प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणुओं को प्रतिजैविक ने प्रतिरोधी बनाया ही नहीं था, और कोई जीव किसी काम की दिशा में उत्परिवर्तित होने का “फ़ैसला” कर ही नहीं सकता। दिशा वरण देता है, बाद में; उत्परिवर्तन केवल जुटाता है।
13.5 अभ्यास
अभ्यास 13.1 ★
उत्परिवर्तन की परिभाषा दीजिए और बिंदु उत्परिवर्तन की तीनों क़िस्मों के नाम लिखिए।
हल
हल — अभ्यास 13.1.
DNA के न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम में आया वह बदलाव जो उस कोशिका के वंशजों तक पहुँचता है। प्रतिस्थापन, निवेशन, विलोपन।
अभ्यास 13.2 ★
ATGCCTGAAT की तुलना उत्परिवर्तियों ATGCCAGAAT, ATGCCTGAT और ATGCCTTGAAT से कीजिए। हर उत्परिवर्तन का नाम बताइए।
हल
हल — अभ्यास 13.2.
ATGCCAGAAT: प्रतिस्थापन (स्थान 6 पर T की जगह A)। ATGCCTGAT: एक A का विलोपन। ATGCCTTGAAT: एक T का निवेशन।
अभ्यास 13.3 ★
कायिक और जनन-वंश उत्परिवर्तन में क्या अंतर है? आनुवंशिकता के लिए कौन-सा मायने रखता है?
हल
हल — अभ्यास 13.3.
कायिक: किसी शरीर कोशिका में, जो केवल उसी कोशिका के वंशजों तक, उसी व्यक्ति के भीतर पहुँचता है। जनन-वंश: किसी युग्मक या उसके पूर्ववर्ती में, जो संतान तक और उसकी सारी कोशिकाओं तक पहुँचता है। आनुवंशिकता में केवल जनन-वंश उत्परिवर्तन ही घुसते हैं।
अभ्यास 13.4 ★
तीन उत्परिवर्तजनों के नाम लिखिए और उनमें से एक के लिए वह क्षति भी जो वह DNA को पहुँचाता है।
हल
हल — अभ्यास 13.4.
पराबैंगनी प्रकाश, एक्स-किरणें, तंबाकू के धुएँ का बेंज़ोपाइरीन (और साथ ही रेडियोसक्रियता, एफ़्लाटॉक्सिन)। पराबैंगनी किसी एक लड़ी के दो पड़ोसी थाइमीनों को आपस में जोड़ देती है और कुंडली को मरोड़ देती है।
अभ्यास 13.5 ★
कोई मरम्मत तंत्र किसी क्षतिग्रस्त खंड को दोबारा बनाने के लिए साँचे के रूप में क्या इस्तेमाल करता है? वह संभव क्यों है?
हल
हल — अभ्यास 13.5.
सही-सलामत पूरक लड़ी: चूँकि हर लड़ी दूसरी को तय करती है, इसलिए क्षतिग्रस्त खंड का सही अनुक्रम उसकी साथी लड़ी से दोबारा बनाया जा सकता है।
अभ्यास 13.6 ★★
बचाव वाले चित्र से बताइए कि सामान्य खमीर का कितना अंश पराबैंगनी झेल जाता है। और मरम्मत में कमज़ोर प्रभेद का? उस ख़ुराक पर मरम्मत बचाव को कितने गुना बेहतर कर देती है?
हल
हल — अभ्यास 13.6.
सामान्य: लगभग 6%; मरम्मत में कमज़ोर: 0.01%। उस ख़ुराक पर मरम्मत बचाव को लगभग 600 गुना बेहतर कर देती है।
अभ्यास 13.7 ★★
जीवाणुओं का एक संवर्धन किसी प्रतिजैविक प्लेट पर फैलाया जाता है और 20 कॉलोनियाँ उगती हैं। प्रतिरोधी कोशिकाओं की बारंबारता आँकिए। क्या इससे पता चलता है कि वह उत्परिवर्तन प्रतिजैविक ने किया था?
हल
हल — अभ्यास 13.7.
। नहीं: प्लेट केवल यह उजागर करती है कि कौन-सी कोशिकाएँ पहले से प्रतिरोधी थीं; और उत्परिवर्तन प्रतिजैविक ने किया या नहीं, यह जानने के लिए प्रतिकृति वाला परीक्षण चाहिए।
अभ्यास 13.8 ★★
अपने शब्दों में समझाइए कि प्रतिकृति प्लेटों पर प्रतिरोधी कॉलोनियों की एक जैसी जगहें यह क्यों सिद्ध करती हैं कि वे उत्परिवर्तन संपर्क से पहले हुए थे।
हल
हल — अभ्यास 13.8.
हर प्रतिकृति को उन्हीं मूल कॉलोनियों से कोशिकाएँ मिलती हैं। यदि प्रतिजैविक संपर्क में आते ही प्रतिरोध पैदा करता, तो असर पाने वाली कोशिकाएँ हर प्रतिकृति पर यादृच्छिक कुछ ही होतीं, और असंबद्ध जगहों पर। प्रतिरोध का हमेशा उन्हीं जगहों पर मिलना यह बताता है कि बिना दवा के उगाई गई वे मूल कॉलोनियाँ पहले से ही प्रतिरोधी कोशिकाएँ रखती थीं।
अभ्यास 13.9 ★★
क्षारक-जोड़ों वाला कोई जीन न्यूक्लियोटाइडों में एक ग़लती के साथ नक़ल होता है। कोशिकाओं के किसी ऊतक में, जो 40 विभाजनों से एक ही कोशिका से उतरा है, मोटे तौर पर कितनी कोशिकाएँ उस जीन में कोई नया उत्परिवर्तन ढोती हैं? (केवल आख़िरी विभाजन में हुई ग़लतियाँ गिनिए।)
हल
हल — अभ्यास 13.9.
जीन की प्रति नक़ल ग़लतियाँ: (दोनों लड़ियाँ)। आख़िरी विभाजन में बनी कोशिकाओं में से लगभग उस जीन में कोई नया उत्परिवर्तन ढोती हैं।
अभ्यास 13.10 ★★
गुलाब की किसी झाड़ी पर एक शाखा अलग रंग के फूल देती है। उस शाखा की क़लमों से नए रंग वाली झाड़ियाँ बनती हैं; पर उसके फूलों के बीजों से साधारण गुलाब। दोनों नतीजे समझाइए।
हल
हल — अभ्यास 13.10.
किसी कली की कोशिका में हुए कायिक उत्परिवर्तन ने उस शाखा को उसका रंग दिया; और क़लमें वही ऊतक हैं, इसलिए वे उसे बनाए रखती हैं। उन फूलों की जनन कोशिकाएँ भी उसी शाखा से आती हैं, पर किसी एक युग्मविकल्पी में आया बदलाव केवल आधे युग्मकों तक पहुँचता है, और बीजांडों का निषेचन साधारण युग्मविकल्पी ढोते पराग से हुआ; इसलिए नया युग्मविकल्पी, यदि अप्रभावी हो, तो अंकुरों में छिपा रह जाता है।
अभ्यास 13.11 ★★
ज़ीरोडर्मा पिगमेंटोसम वाले व्यक्ति में त्वचा के कैंसर क्यों होते हैं, पर मसलन आँत के कैंसर क्यों नहीं?
हल
हल — अभ्यास 13.11.
जो एंजाइम नहीं है वह पराबैंगनी क्षति की मरम्मत करता है; और पराबैंगनी केवल त्वचा तक घुसती है। आँत को कोई पराबैंगनी मिलती ही नहीं, उसे वैसी क्षतियाँ होती ही नहीं, और उसे वह मरम्मत चाहिए भी नहीं।
अभ्यास 13.12 ★★★
धूप-रोधी क्रीम पराबैंगनी सोख लेती है। बचाव वाले चित्र की मदद से समझाइए कि पराबैंगनी का दसवाँ हिस्सा गुज़रने देने वाली क्रीम धूप के एक घंटे में त्वचा की प्रति कोशिका क्षतियों की संख्या का क्या करती है, और “धूप से जलन नहीं” का मतलब “कोई उत्परिवर्तन नहीं” क्यों नहीं है।
हल
हल — अभ्यास 13.12.
क्षतियाँ ख़ुराक के अनुपात में होती हैं: पराबैंगनी का दसवाँ हिस्सा यानी प्रति कोशिका प्रति घंटा क्षतियों का दसवाँ हिस्सा — और वे तब भी हज़ारों में हैं। धूप से जलन बहुत-सी कोशिकाओं का मरना है; उससे कम ख़ुराक पर कोशिकाएँ बच जाती हैं, पर जो क्षतियाँ मरम्मत से बच निकलती हैं वे उत्परिवर्तन बन जाती हैं। जलन न होने का मतलब है कि क्षति सहने लायक़ थी, न कि वह थी ही नहीं।
अभ्यास 13.13 ★★★
हीमोग्लोबिन जीन का कोई युग्मविकल्पी एक प्रति ढोने वालों को मलेरिया से बचाता है पर दो प्रतियाँ ढोने वालों में गंभीर रोग पैदा करता है। चर्चा कीजिए कि यह उत्परिवर्तन “हानिकारक” है या “उपयोगी”, और यह तय क्या करता है।
हल
हल — अभ्यास 13.13.
अपने आप में कोई भी नहीं। मलेरिया वाले इलाक़े में एक ही प्रति बचाव बढ़ाती है, और दो प्रतियों वाले रोगियों के बावजूद वह युग्मविकल्पी आम बना रहता है; और जहाँ मलेरिया नहीं, वहाँ वह केवल रोग देता है और विरला रहता है। किसी उत्परिवर्तन का मोल पर्यावरण और प्रतियों की संख्या तय करते हैं।
अभ्यास 13.14 ★★★
बिना प्रतिजैविक वाले शोरबे के जीवाणुओं में 30 पीढ़ियों बाद दस लाख में एक प्रतिरोधी कोशिका मिलती है। यदि फिर प्रतिजैविक डाला जाए, तो दिन भर में उस संवर्धन का क्या होता है? समझाइए कि डॉक्टर प्रतिजैविक का पूरा कोर्स लेने पर क्यों ज़ोर देते हैं।
हल
हल — अभ्यास 13.14.
संवेदनशील कोशिकाएँ मर जाती हैं; और प्रतिरोधी, जो पहले से मौजूद थीं, खुलकर विभाजित होती हैं और दिन भर में पूरा संवर्धन प्रतिरोधी हो जाता है। बीच में रोका गया कोर्स आख़िरी बचे हुओं को — यानी सबसे अधिक प्रतिरोधियों को — ऐसे शरीर में दोबारा उगने के लिए ज़िंदा छोड़ देता है जो अब प्रतिरोध से भरा है; और पूरा कोर्स उन्हें गुणित होने से पहले ही मार देता है।
अभ्यास 13.15 ★★★
“यदि उत्परिवर्तन लगभग हमेशा हानिकारक हैं, तो जैव विकास उन पर खड़ा नहीं हो सकता।” यादृच्छिकता, तटस्थ उत्परिवर्तनों के अनुपात, पर्यावरण और समय-पैमाने की धारणाओं से एक अनुच्छेद में चर्चा कीजिए।
हल
हल — अभ्यास 13.15.
अधिकांश उत्परिवर्तन तटस्थ होते हैं (जीनों के बाहर या प्रोटीन पर बिना असर के), एक अल्पसंख्या हानिकारक, और बहुत ही थोड़े उपयोगी; और यादृच्छिक होने के कारण वे उपयोग की परवाह किए बिना होते हैं, पर वरण उपयोगी को रख लेता है और हानिकारक को हटा देता है। उपयोगिता पर्यावरण पर निर्भर है, इसलिए जो उत्परिवर्तन आज हानिकारक है वही हालात बदलने पर मायने रख सकता है। हज़ारों पीढ़ियों में, अरबों व्यक्तियों के साथ, विरले उपयोगी उत्परिवर्तन भी बार-बार उठते हैं: जैव विकास छाँटी हुई बची राशि पर खड़ा है, औसत उत्परिवर्तन पर नहीं।
13.6 समस्या: मख़मल की छाप
समस्या 13.1
सप्ताहांत समस्या — लेडरबर्ग का प्रतिकृति-रोपण दोबारा खड़ा किया गया: कॉलोनियाँ गिनी गईं, प्रतिरोध का नक़्शा बना, उत्परिवर्तनों का उद्गम तय हुआ, और उनकी दर नापी गई
एक विद्यार्थी ऐसे संवर्धन से, जिसने प्रतिजैविक स्ट्रेप्टोमाइसिन कभी देखा ही नहीं, लगभग 200 जीवाणु बिना प्रतिजैविक वाली एक प्लेट पर फैलाता है। रात भर में 200 कॉलोनियाँ उग आती हैं, हर एक किसी एक कोशिका से और हर एक में लगभग कोशिकाएँ। प्लेट पर मख़मल का गद्दा दबाकर उसे स्ट्रेप्टोमाइसिन वाली तीन प्लेटों पर छापा जाता है। अगले दिन प्लेट A दो प्रतिरोधी कॉलोनियाँ दिखाती है, प्लेट B दो, प्लेट C दो — और तीनों पर उन्हीं दो जगहों पर।
भाग I — प्रयोग।
- मूल प्लेट की कॉलोनियों का इकहरी कोशिकाओं से आना क्यों ज़रूरी है, और फैलाए गए जीवाणुओं की संख्या छोटी क्यों रखी जाती है?
- समझाइए कि मख़मल क्या पहुँचाता है, और किसी कॉलोनी की जगह क्यों बनी रहती है।
- 200 में से दो जगहें हर प्रतिकृति पर प्रतिरोधी कॉलोनियाँ देती हैं। तीनों प्रतिकृतियों का आपस में मेल खाना क्या दिखाता है?
- इसके बजाय मान लीजिए कि प्रतिजैविक ने संपर्क में आते ही कुछ थोड़ी कोशिकाओं में प्रतिरोध पैदा किया हो। तब तीनों प्रतिकृतियाँ किस ढर्रे में दिखतीं, इसका वर्णन कीजिए।
- इन दोनों परिकल्पनाओं में से — संपर्क से पहले उत्परिवर्तन, या संपर्क से प्रेरण — देखा गया ढर्रा किसका समर्थन करता है? तर्क एक वाक्य में बताइए।
भाग II — मूल प्लेट पर वापस।
- विद्यार्थी मूल प्लेट की (जो कभी प्रतिजैविक से छुई ही नहीं) उन दो प्रतिरोधी जगहों से और दो दूसरी जगहों से कोशिकाएँ लेता है, और हर नमूने को स्ट्रेप्टोमाइसिन पर परखता है। नतीजों का अनुमान लगाइए।
- प्रतिरोधी जगहों वाली दोनों कॉलोनियों में लगभग कोशिकाएँ हैं। क्या उनकी सारी कोशिकाएँ प्रतिरोधी हैं, या कुछ ही? तय करने के लिए आपको क्या जानना होगा?
- कोई कॉलोनी एक कोशिका से क़रीब 23 विभाजनों में उगती है। यदि उत्परिवर्तन 20वें विभाजन पर हुआ हो, तो कॉलोनी की कोशिकाओं का कितना अंश उसे ढोता है? और यदि तीसरे विभाजन पर?
- समझाइए कि पूरी कॉलोनी को परखने से ऐसा उत्परिवर्तन भी क्यों उजागर हो जाता है जो उसकी कोशिकाओं के केवल एक अंश में हुआ हो।
- यह प्रयोग तभी क्यों चलता है जब प्रतिकृति प्लेटों की कॉलोनियाँ ठीक वहीं उगें जहाँ मूल कॉलोनियाँ थीं?
भाग III — दर नापना।
- विद्यार्थी यही प्रयोग 200-200 कॉलोनियों वाली 50 मूल प्लेटों के साथ दोहराता है: यानी 10 000 कॉलोनियाँ, जिनमें से 30 प्रतिरोधी प्रतिकृतियाँ देती हैं। कॉलोनियों का कितना अंश कम से कम एक प्रतिरोधी कोशिका ढोता है?
- हर कॉलोनी एक कोशिका से लगभग कोशिका विभाजनों में उठी। आँकिए कि किसी दिए हुए विभाजन से प्रतिरोध का उत्परिवर्तन होने की प्रायिकता कितनी है।
- स्ट्रेप्टोमाइसिन का प्रतिरोध किसी एक जीन के एक ख़ास स्थान पर बदलाव माँगता है। अपने अनुमान की तुलना प्रति न्यूक्लियोटाइड की प्रतिकृतिकरण ग़लती-दर से कीजिए, और टिप्पणी कीजिए।
- बिना प्रतिजैविक वाले शोरबे में अकेली एक कोशिका से कोशिकाओं का संवर्धन उगाया जाता है। अपनी दर की मदद से आँकिए कि प्रतिजैविक अंत में डाले जाने पर उसमें कितनी प्रतिरोधी कोशिकाएँ होने की संभावना है।
- यदि प्रतिरोध का उत्परिवर्तन उस संवर्धन की वृद्धि में जल्दी हुआ हो, तो प्रतिरोधी कोशिकाओं की संख्या कैसे बदलती है? बार-बार किए गए संवर्धन बहुत अलग-अलग गिनतियाँ क्यों देते हैं?
भाग IV — इसका मतलब क्या है।
- “उत्परिवर्तन यादृच्छिक हैं” और “उत्परिवर्तन विरले हैं” में अंतर समझाइए, और यह भी कि प्रयोग इनमें से किसे स्थापित करता है।
- प्रतिजैविक ने वह प्रतिरोध बनाया नहीं। तो उसने उस आबादी के साथ क्या किया?
- इस प्रयोग को प्रतिज्ञप्ति 13.10 की भाषा में उतारिए: विविधता किसने जुटाई, और छाँटा किसने?
- कोई विद्यार्थी आपत्ति करता है कि मूल प्लेट की वे दोनों प्रतिरोधी कॉलोनियाँ “बिलकुल बाक़ियों जैसी ही दिख रही थीं”। समझाइए कि कोई उत्परिवर्तन पर्यावरण बदलने तक अदृश्य क्यों रह सकता है।
- परिणाम लिखिए: मख़मल की तीन प्रतिकृतियों पर एक जैसी जगहों ने उत्परिवर्तनों के उद्गम के बारे में क्या सिद्ध किया, और आपने प्रति विभाजन कौन-सी दर नापी।
हल
हल — समस्या 13.1.
1. ताकि हर कॉलोनी ज्ञात उद्गम वाला एक क्लोन हो, और ताकि कॉलोनियाँ इतनी अलग-अलग रहें कि प्रतिकृतियों पर उन्हें पहचाना जा सके।
2. हर कॉलोनी के ऊपर से चंद कोशिकाएँ, उसी ज्यामितीय सजावट में जो प्लेट पर थी, क्योंकि गद्दा बिना खिसके सपाट दबाया जाता है।
3. यह कि प्रतिरोधी कोशिकाएँ उन दोनों मूल कॉलोनियों में मौजूद थीं: तीन स्वतंत्र प्रतिकृतियाँ संयोग से एक जैसी नहीं निकलतीं।
4. तीनों प्लेटों पर यादृच्छिक, असंबद्ध जगहों पर प्रतिरोधी कॉलोनियाँ, क्योंकि कौन-सी कोशिकाएँ प्रेरित हुईं यह प्रतिकृति-दर-प्रतिकृति अलग होता।
5. संपर्क से पहले उत्परिवर्तन: प्रतिरोध का नक़्शा उन्हीं मूल कॉलोनियों पर बैठता है, जो उस दवा से कभी मिलीं ही नहीं।
6. दोनों प्रतिरोधी जगहों की कोशिकाएँ स्ट्रेप्टोमाइसिन पर उगती हैं; और बाक़ी जगहों की नहीं।
7. शायद कुछ ही: वह उत्परिवर्तन कॉलोनी की वृद्धि के दौरान किसी विभाजन पर हुआ, और केवल उसी कोशिका के वंशज प्रतिरोधी हैं। तय करने के लिए कॉलोनी की ज्ञात संख्या भर कोशिकाएँ स्ट्रेप्टोमाइसिन पर फैलाकर बचे हुओं को गिनना होगा।
8. 23 में से 20वें विभाजन पर: …या और सरलता से, वह उत्परिवर्ती कोशिका फिर 3 बार और विभाजित होती है: यानी प्रतिरोधी कोशिकाएँ, में से, क़रीब दस लाख में एक। और तीसरे विभाजन पर: तब मौजूद 8 कोशिकाओं में से एक, यानी कॉलोनी का आठवाँ हिस्सा।
9. मख़मल जिन के आसपास कोशिकाओं को उठाता है उनमें चंद प्रतिरोधी कोशिकाएँ भी प्रतिजैविक प्लेट पर कॉलोनी बसाने भर हैं; यानी यह परीक्षण प्रतिरोधी कोशिकाओं की मौजूदगी पकड़ता है, उनका अनुपात नहीं।
10. पूरी दलील जगह पर टिकी है: प्रतिकृति की किसी कॉलोनी को मूल प्लेट की किसी कॉलोनी से तभी जोड़ा जा सकता है जब ज्यामिति बनी रहे।
11. ।
12. लगभग उत्परिवर्तन प्रति विभाजन: यानी प्रति विभाजन ।
13. किसी एक न्यूक्लियोटाइड पर ग़लती-दर की ही कोटि का: यानी प्रतिरोध का उत्परिवर्तन असल में मरम्मत से बच निकला कोई एक ख़ास प्रतिस्थापन ही है।
14. विभाजन, दर : औसतन एक उत्परिवर्तन का एक अंश भर, इसलिए अधिकांश संवर्धनों में कोई प्रतिरोधी कोशिका नहीं होती या चंद ही होती हैं (और हर उत्परिवर्तन उसके बाद के विभाजनों से गुणित हो जाता है)।
15. शुरुआती किसी विभाजन पर हुआ उत्परिवर्तन संवर्धन के बड़े अंश को विरासत में मिलता है, इसलिए गिनती बड़ी होती है; और देर से हुआ केवल चंद प्रतिरोधी कोशिकाएँ देता है। चूँकि समय यादृच्छिक है, इसलिए दोहराए गए संवर्धन दूर-दूर तक बिखरी गिनतियाँ देते हैं — और यह ख़ुद इस बात का निशान है कि उत्परिवर्तन प्रतिजैविक के जवाब में नहीं, उससे पहले उठते हैं।
16. विरले: प्रति विभाजन उत्परिवर्तन कभी-कभार ही होते हैं। यादृच्छिक: वे अपनी उपयोगिता से स्वतंत्र होकर होते हैं। यह प्रयोग यादृच्छिकता स्थापित करता है (जगह वाली दलील से); और भाग III की गिनतियाँ विरलता नापती हैं।
17. उसने उस आबादी को छाँट दिया: उसने संवेदनशील कोशिकाएँ मारीं और प्रतिरोधी कोशिकाओं को गुणित होने दिया — यानी वरण।
18. उत्परिवर्तन ने वह प्रतिरोधी युग्मविकल्पी यादृच्छिक रूप से, किसी ज़रूरत से पहले ही जुटाया; और प्रतिजैविक ने आबादी छाँटकर केवल उसके वाहक रख लिए।
19. वह उत्परिवर्तन उस अणु को बदलता है जो दवा की क्रिया में शामिल है, कॉलोनी की बिना दवा वाली वृद्धि या शक्ल को नहीं; और किसी आनुवंशिक फ़र्क़ का दिखने वाला असर केवल उसी पर्यावरण में होता है जहाँ वह मायने रखे।
20. तीनों प्रतिकृतियों पर एक जैसी जगहों ने सिद्ध किया कि प्रतिरोध के उत्परिवर्तन प्रतिजैविक के संपर्क से पहले और उससे स्वतंत्र होकर उठते हैं; और नापी गई दर प्रति कोशिका विभाजन लगभग है।