माध्यमिक जीवविज्ञान · Grades 10–12
2कोशिकाएँ: जीवन की साझा इकाई
रुई की एक फाहा से अपने गाल के भीतरी हिस्से को खुरचिए, उसे एक स्लाइड पर लगाइए, नीले रंजक की एक बूँद डालिए, और चार सौ गुना पर सूक्ष्मदर्शी से देखिए: चपटी, बेढंगी पट्टियों का एक बिखराव, और हर एक के बीचोबीच के पास एक गहरा धब्बा। प्याज़ के शल्क के भीतर से पतली झिल्ली उतारकर फिर देखिए: सुथरी आयताकार ईंटें, हर एक के अपने धब्बे के साथ। तालाब के पानी में अंडाकार जीव रोओं की झालर के साथ खेते हुए निकलते दिखते हैं। नंगी आँख से इन तीनों नमूनों में कुछ भी साझा नहीं। लेंस के नीचे ये तीनों एक ही वस्तु से बने निकलते हैं — कोशिका से — और यह अध्याय इसी के बारे में है कि वह वस्तु है क्या, उसे देखा कैसे जाता है, और हर सजीव उसी से क्यों बना है।
2.1 कोशिका सिद्धांत
परिभाषा 2.1 (कोशिका)
कोशिका किसी सजीव की वह सबसे छोटी इकाई है जो ख़ुद जीवित हो: जलीय अंतर्वस्तु का एक आयतन, यानी कोशिकाद्रव्य, जिसे एक पतली प्लाज़्मा झिल्ली घेरे रहती है और जो उसे परिवेश से अलग रखते हुए भी चुने हुए पदार्थों को पार जाने देती है। कोई कोशिका पदार्थ और ऊर्जा भीतर लेती है, उन्हें बदलती है, बढ़ती है, और दो कोशिकाओं में बँट जाती है।
प्रतिज्ञप्ति 2.2 (कोशिका सिद्धांत)
उन्नीसवीं सदी में सूक्ष्मदर्शन से स्थापित तीन कथन मिलकर कोशिका सिद्धांत बनाते हैं:
साक्ष्य. पहला कथन बेहतर सूक्ष्मदर्शियों से पौधों (श्लाइडेन, 1838) और जंतुओं (श्वान, 1839) की व्यवस्थित जाँच पर टिका है: जिस भी ऊतक को देखा गया, वह दिखने में चाहे कितना ही अलग हो, कोशिकाओं में खुल गया। तीसरा कथन विरचो (1855) ने और बढ़ते ऊतकों में विभाजित होती कोशिकाओं के प्रेक्षण ने स्थापित किया; दूसरा विकल्प — कि कोशिकाएँ तरल से अपने आप बन जाती हैं — कभी देखा ही नहीं गया, और सूक्ष्मजीवों पर पास्तर के प्रयोगों ने (अध्याय 18 उन पर लौटता है) यह सवाल बंद कर दिया। दूसरा कथन पहले से निकलता है, और इस तथ्य से भी कि उपयुक्त तरल में रखी अलग-अलग कोशिकाएँ जीती रहती हैं, जबकि किसी कोशिका का कोई टुकड़ा नहीं। ∎
उदाहरण 2.3 (एक कोशिका या अनेक)
खमीर, पैरामीशियम या कोई जीवाणु अकेली एक कोशिका है जो सब कुछ करती है — खाती है, चलती है, बँटती है। बलूत या मनुष्य कई तरह की कोशिकाओं की एक सहकारी है, जिसमें हर कोशिका काम का एक हिस्सा सँभालती है: मानव शरीर में लगभग कोशिकाएँ हैं, और मोटे तौर पर दो सौ तरह की। इन दोनों के बीच में कॉलोनियाँ और सरल बहुकोशिकीय जीव आते हैं, पर ऐसा कोई सजीव नहीं जो कोशिकाओं के अलावा किसी और चीज़ से बना हो।
2.2 कोशिकाएँ देखना: पैमाने और सूक्ष्मदर्शी
परिभाषा 2.4 (आवर्धन और विभेदन)
किसी उपकरण का आवर्धन प्रतिबिंब के आकार और वस्तु के आकार का अनुपात है। उसका विभेदन वह सबसे छोटी दूरी है जिस पर दो बिंदुओं को वह अब भी अलग-अलग दिखाता है। विभेदन जितना उचित ठहराता है उससे आगे प्रतिबिंब बढ़ाने पर धुँधलापन बढ़ता है, ब्योरा नहीं।
प्रतिज्ञप्ति 2.5 (दो उपकरण, दो पैमाने)
प्रकाश सूक्ष्मदर्शी लगभग तक आवर्धन देता है और उसका विभेदन लगभग है: वह कोशिकाएँ, केंद्रक, हरितलवक और जीवाणु रंगों में और जीवित दिखाता है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी प्रकाश की जगह इलेक्ट्रॉनों का पुंज इस्तेमाल करता है: विभेदन से नीचे, आवर्धन तक; वह कोशिका की भीतरी संरचना खोल देता है — झिल्लियाँ, सूत्रकणिकाएँ, राइबोसोम, यहाँ तक कि बड़े अणु भी — पर उस नमूने पर जो मरा हुआ, सूखा हुआ और माइक्रोमीटर से भी पतली फाँकों में कटा होता है।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
विधि 2.6 (सूक्ष्मचित्र पर किसी वस्तु को मापना)
हर सूक्ष्मचित्र या तो आवर्धन बताता है या मापनी पट्टी दिखाता है।
उदाहरण 2.7 (गाल की कोशिकाएँ)
पर चौड़ी खींची गई गाल की कोशिका चौड़ी है, और उसका केंद्रक, जो खींचा गया, लगभग का। लाल रक्त कोशिका की होती है; और मुँह के जीवाणु, जो लंबे हैं, उसी आवर्धन पर मुश्किल से ही अलग-अलग बिंदुओं जैसे दिखते हैं।
2.3 कोशिका के भीतर
परिभाषा 2.8 (कोशिकांग)
कोशिकांग कोशिका के भीतर की वह रचना है जो अपनी ही झिल्ली से घिरी होती है और कोई एक निश्चित काम करती है। मुख्य कोशिकांग ये हैं:
- केंद्रक, जिसमें गुणसूत्र रहते हैं — यानी अध्याय 3 वाला DNA — और जो कोशिका की गतिविधि पर नियंत्रण रखता है;
- सूत्रकणिकाएँ, जो लगभग लंबी होती हैं और जहाँ कार्बनिक अणुओं को ऑक्सीजन के साथ तोड़कर काम में आने वाली ऊर्जा छोड़ी जाती है (कोशिकीय श्वसन, अध्याय 4);
- पादप कोशिकाओं में हरितलवक, जो पर्णहरित से हरे होते हैं और जहाँ प्रकाशसंश्लेषण होता है, और साथ में एक बड़ी जल से भरी रसधानी, जो कोशिका को तना हुआ रखती है।
झिल्ली के बाहर पादप कोशिका सेलुलोज़ की एक दृढ़ कोशिका भित्ति में बंद रहती है; जंतु कोशिकाओं में ऐसी कोई भित्ति नहीं होती। हर कोशिका के कोशिकाद्रव्य में लाखों राइबोसोम भी होते हैं, यानी लगभग के कण, जो प्रोटीन जोड़ते हैं और केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से दिखते हैं।
परिभाषा 2.9 (प्राक्केंद्रकी और सुकेंद्रकी)
जिस कोशिका का DNA किसी केंद्रक में बंद रहता है वह सुकेंद्रकी कोशिका है: जंतु, पौधे, कवक और बहुत-से एककोशिकीय जीव सुकेंद्रकी हैं। प्राक्केंद्रकी कोशिका में न कोई केंद्रक होता है, न झिल्ली से घिरे कोशिकांग: उसका DNA कोशिकाद्रव्य में खुला पड़ा रहता है, उसका आकार के आसपास होता है, और वह अपनी ही तरह की एक भित्ति से घिरी रहती है। जीवाणु प्राक्केंद्रकी हैं।
उदाहरण 2.10 (किसी जीवाणु को पढ़ना)
आँत के जीवाणु Escherichia coli का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मचित्र लंबी और चौड़ी एक छड़ दिखाता है: एक भित्ति, उसके ठीक भीतर एक झिल्ली, राइबोसोमों से ठसाठस भरा कणिकामय कोशिकाद्रव्य, और बीच में एक फीका क्षेत्र जहाँ अकेला वृत्ताकार DNA अणु पड़ा है। न कोई केंद्रक, न सूत्रकणिकाएँ। फिर भी यह कोशिका पोषक शोरबे में खाती है, बढ़ती है और हर बीस मिनट में बँट जाती है: कोशिका सिद्धांत जो कुछ माँगता है, वह सब गाल की कोशिका के हज़ारवें हिस्से भर आयतन में।
2.4 बहुत-सी कोशिकाएँ, बहुत-से आकार: विशेषीकरण
प्रतिज्ञप्ति 2.11 (विशेषीकृत कोशिकाएँ)
किसी बहुकोशिकीय जीव में सब कोशिकाओं की बुनियादी योजना और DNA एक ही होते हैं, पर हर तरह की कोशिका का आकार और साज़-सामान उसके काम से मेल खाता है: कोई न्यूरॉन संकेत ढोने के लिए एक मीटर तक लंबा तंतु फैला देता है; लाल रक्त कोशिका अपना केंद्रक खो चुकी है और हीमोग्लोबिन से ठसाठस भरी एक चपटी तश्तरी है; पेशी तंतु संकुचनशील प्रोटीनों से भरी एक विशाल कोशिका है; मूलरोम एक पतली नली है जो जल सोखने के लिए सतह को अधिकतम कर देती है; और पत्ती की द्वार कोशिका किसी छिद्र को खोलने या बंद करने के लिए अपना आकार बदल लेती है। विशेषीकरण इसी बात का मामला है कि साझा योजना के कौन-से हिस्से विकसित किए गए हैं।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
उदाहरण 2.12 (सतह और आयतन)
कोशिकाएँ इतनी छोटी क्यों होती हैं? कोई कोशिका जो कुछ भीतर लेती या बाहर देती है, वह सब उसकी झिल्ली से पार होता है, और झिल्ली का क्षेत्रफल आकार के वर्ग के साथ बढ़ता है, जबकि ज़रूरतें आयतन के साथ, यानी घन के साथ। भुजा की घनाकार कोशिका की सतह है और आयतन : यानी प्रति घन माइक्रोमीटर झिल्ली। भुजा पर यह अनुपात गिरकर रह जाता है: प्रति इकाई अंतर्वस्तु दस गुना कम झिल्ली। कोई बड़ी कोशिका अपने बीच में भूखी मर जाती; जो कोशिकाएँ बड़ी हैं (मेंढक का अंडा, पेशी तंतु) वे या तो ज़्यादातर निष्क्रिय भंडार हैं या इतनी लंबी हैं कि कोई भी बिंदु सतह से दूर न पड़े।
टिप्पणी 2.13 (खुले तंत्र के रूप में कोशिका)
कोशिका कोई बंद थैली नहीं है। जल, ऑक्सीजन, ग्लूकोज़ और आयन लगातार उसकी झिल्ली पार करते हैं, और उसका कचरा भी उसी रास्ते बाहर जाता है; शुद्ध जल में रखी गाल की कोशिका कुछ ही मिनटों में फूलकर फट जाती है, और तेज़ नमकीन पानी में रखी कोशिका सिकुड़ जाती है। भीतर क्या आए और बाहर क्या जाए, इस पर झिल्ली का नियंत्रण स्नातक वर्ष 1 वाले खंड का विषय है; अभी इतना याद रखिए कि कोशिका अपने परिवेश से आदान-प्रदान करके जीती है, और आदान-प्रदान रुकते ही मर जाती है।
2.5 अभ्यास
अभ्यास 2.1 ★
कोशिका सिद्धांत के तीनों कथन लिखिए।
अभ्यास 2.2 ★
बदलिए: को माइक्रोमीटर में; को माइक्रोमीटर में; को मिलीमीटर में।
हल
हल — अभ्यास 2.2.
; ; ।
अभ्यास 2.3 ★
के प्रतिबिंब से कोई कोशिका लंबी खींची गई है। उसकी वास्तविक लंबाई क्या है?
हल
हल — अभ्यास 2.3.
।
अभ्यास 2.4 ★
ऐसी तीन रचनाओं के नाम लिखिए जो पादप कोशिका में मिलती हैं पर जंतु कोशिका में नहीं, और एक ऐसी रचना का नाम भी जो हर कोशिका में मिलती है।
हल
हल — अभ्यास 2.4.
केवल पौधे में: कोशिका भित्ति, हरितलवक, बड़ी केंद्रीय रसधानी। हर कोशिका में: एक प्लाज़्मा झिल्ली (और साथ ही कोशिकाद्रव्य तथा राइबोसोम)।
अभ्यास 2.5 ★
प्राक्केंद्रकी और सुकेंद्रकी कोशिका में क्या अंतर है? हर एक का एक उदाहरण दीजिए।
हल
हल — अभ्यास 2.5.
सुकेंद्रकी कोशिका अपना DNA किसी केंद्रक के भीतर रखती है और उसमें झिल्ली से घिरे कोशिकांग होते हैं (गाल की कोशिका, खमीर); प्राक्केंद्रकी कोशिका में इनमें से कुछ नहीं, उसका DNA कोशिकाद्रव्य में खुला पड़ा रहता है, और वह लगभग की होती है (जैसे E. coli जीवाणु)।
अभ्यास 2.6 ★★
किसी सूक्ष्मचित्र पर लिखी मापनी पट्टी की निकलती है; कोई सूत्रकणिका लंबी नापी जाती है। सूत्रकणिका की वास्तविक लंबाई और प्रतिबिंब का आवर्धन निकालिए।
अभ्यास 2.7 ★★
प्रकाश सूक्ष्मदर्शी अपना आवर्धन चाहे जो हो, राइबोसोम क्यों नहीं दिखा सकता? परिभाषा 2.4 के दोनों शब्दों का इस्तेमाल कीजिए।
हल
हल — अभ्यास 2.7.
राइबोसोम () प्रकाश सूक्ष्मदर्शी के विभेदन ( ) से दस गुना छोटा है: दो पड़ोसी राइबोसोमों को, या किसी राइबोसोम और उसके परिवेश को, अलग-अलग पहचाना ही नहीं जा सकता। और आवर्धन बढ़ाने से धुँधलापन ही बड़ा होता है।
अभ्यास 2.8 ★★
सूक्ष्मदर्शी के नीचे आलू की एक फाँक पर आयोडीन विलयन डाला जाता है: कोशिकाओं के भीतर अंडाकार दानों में नीला-काला रंग उभर आता है। अध्याय 1 की मदद से बताइए कि वे दाने क्या हैं, और यह कि इससे पौधे के भंडार रखने की जगह के बारे में क्या पता चलता है।
अभ्यास 2.9 ★★
प्याज़ की झिल्ली की कोशिकाओं में केंद्रक और भित्ति दिखते हैं पर हरितलवक कोई नहीं, जबकि मॉस के पत्ते की कोशिकाएँ उनसे भरी रहती हैं। हर ऊतक कहाँ रहता है, इससे यह अंतर समझाइए।
अभ्यास 2.10 ★★
भुजा की घनाकार कोशिका (एक जीवाणु) और भुजा की घनाकार कोशिका (एक सामान्य जंतु कोशिका) के लिए सतह-आयतन अनुपात निकालिए। इनमें से कौन अकेले अपनी झिल्ली से होने वाले सीधे विसरण के भरोसे रह सकती है?
अभ्यास 2.11 ★★
पोषक शोरबे में कोई जीवाणु हर में बँटता है। एक कोशिका से शुरू करके बाद कितनी होंगी? और बाद?
अभ्यास 2.12 ★★★
लाल रक्त कोशिका में न केंद्रक होता है, न सूत्रकणिकाएँ। क्या वह परिभाषा 2.1 पर खरी उतरती है? यह जानते हुए चर्चा कीजिए कि वह लगभग 120 दिन जीती है, बँट नहीं सकती, और अस्थि मज्जा की केंद्रकयुक्त कोशिकाओं से बनती है।
हल
हल — अभ्यास 2.12.
उसमें झिल्ली और कोशिकाद्रव्य है और वह पदार्थ भीतर लेती तथा बाहर देती है, इसलिए वह परिभाषा का अधिकांश हिस्सा पूरा करती है; पर वह न बँट सकती है, न अपने प्रोटीन नए कर सकती है: वह ऐसी कोशिका है जिसने हीमोग्लोबिन की जगह के बदले कार्यक्रम का एक हिस्सा छोड़ दिया है, और जिसे पूरी कोशिकाएँ ही बनाती और बदलती हैं। परिभाषा सामान्य स्थिति बताती है; लाल रक्त कोशिका उसका एक विशेषीकृत, अंतिम रूप है।
अभ्यास 2.13 ★★★
1665 में हुक ने कॉर्क की एक फाँक में “कोठरियाँ” देखी थीं — मोटी दीवारों वाले ख़ाली डिब्बे। इस अध्याय की शब्दावली में समझाइए कि उन्होंने असल में क्या देखा था, और उसमें कोई केंद्रक क्यों नहीं दिख सकता था।
हल
हल — अभ्यास 2.13.
कॉर्क मरा हुआ ऊतक है: हुक ने उन कोशिकाओं की सेलुलोज़ भित्तियाँ देखी थीं जिनकी जीवित अंतर्वस्तु ग़ायब हो चुकी थी — यानी ख़ाली डिब्बे। केंद्रक केवल किसी जीवित कोशिका के कोशिकाद्रव्य में होता है, और वैसे भी उनके सूक्ष्मदर्शी का विभेदन तथा रंजकों का अभाव उसे छिपा ही देते।
अभ्यास 2.14 ★★★
विषाणु से तक के कण हैं, जिनमें न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन होते हैं, जो अपने बल पर न बढ़ सकते हैं न बँट सकते हैं, और जो केवल किसी कोशिका के भीतर ही गुणित होते हैं। क्या वे कोशिकाएँ हैं? क्या वे जीवित हैं? कोशिका सिद्धांत के आधार पर तर्क दीजिए।
हल
हल — अभ्यास 2.14.
विषाणु में न कोशिकाद्रव्य है, न उसकी अपनी बनाई कोई झिल्ली, न उपापचय, और वह बँट भी नहीं सकता: वह कोशिका की परिभाषा पर खरा नहीं उतरता। कोशिका सिद्धांत के हिसाब से वह अपने बल पर जीवित नहीं है; वह एक कण है जो अपनी प्रतियाँ बनाने के लिए किसी कोशिका की मशीनरी उधार लेता है। उसे “जीवित” कहा जाए या नहीं, यह परिभाषा का मामला है; पर वह कोशिका नहीं है, यह मामला नहीं।
अभ्यास 2.15 ★★★
कोई पेशी तंतु अकेली एक कोशिका है, लंबी और चौड़ी, जिसमें सैकड़ों केंद्रक होते हैं। उसका आयतन निकालिए और की घनाकार कोशिका से तुलना कीजिए; फिर उदाहरण 2.12 की मदद से समझाइए कि उसका आकार और उसके इतने सारे केंद्रक ऐसे विशाल आकार को चलने लायक़ क्यों बना देते हैं।
2.6 समस्या: किसी शरीर की कोशिकाएँ गिनना
समस्या 2.1
सप्ताहांत समस्या — सूक्ष्मदर्शन का एक सत्र, स्लाइड पर रखी प्याज़ की झिल्ली से लेकर मानव शरीर में कोशिकाओं की संख्या के अनुमान तक
एक कक्षा सूक्ष्मदर्शी पर एक दोपहर बिताती है। उपलब्ध अभिदृश्यक , और का कुल आवर्धन देते हैं; पर दृष्टि-क्षेत्र की चौड़ाई है।
भाग I — प्याज़।
- पर प्याज़ की लगभग 9 कोशिकाएँ दृष्टि-क्षेत्र में अग़ल-बग़ल आ जाती हैं। एक कोशिका की चौड़ाई माइक्रोमीटर में आँकिए।
- पर दृष्टि-क्षेत्र चार गुना सँकरा है। वह कितना चौड़ा है, और उसकी चौड़ाई में इनमें से कितनी कोशिकाएँ आएँगी?
- एक विद्यार्थी के प्रतिबिंब से एक कोशिका चौड़ी खींचता है। असली कोशिका के मुक़ाबले उस चित्र का आवर्धन क्या है?
- आयोडीन केंद्रक को पीला-भूरा रँग देता है; विद्यार्थी उसे चित्र पर नापता है। वास्तविक व्यास?
- उन रचनाओं के नाम लिखिए जिन पर विद्यार्थी को चित्र में लेबल लगाना चाहिए, और एक ऐसी रचना का नाम भी जो मौजूद तो है पर इस आवर्धन पर दिख नहीं सकती।
भाग II — गाल और तालाब।
- मेथिलीन ब्लू से रँगी गाल की कोशिकाएँ लगभग चौड़े पर केवल मोटे चपटे बहुभुजों जैसी दिखती हैं। वे कहाँ से आती हैं, यह देखते हुए वे चपटी क्यों हैं?
- तालाब के पानी की एक बूँद में लंबा एक पैरामीशियम दिखता है। क्या उसे नंगी आँख से देखा जा सकता है? किस आवर्धन पर वह दृष्टि-क्षेत्र का चौथाई हिस्सा भर देगा?
- पर पैरामीशियम के पास लगभग लंबे नन्हे हिलते-डुलते बिंदु दिखते हैं। सबसे संभावित रूप से वे क्या हैं, और इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी उनमें क्या जोड़ता?
- पैरामीशियम अकेली एक कोशिका है; गाल की कोशिका लाखों करोड़ों में से एक। एक-एक वाक्य में बताइए कि गाल की कोशिका के लिए “विशेषीकृत” का क्या अर्थ है, और वह पैरामीशियम पर क्यों लागू नहीं हो सकता।
- एक विद्यार्थी गाल की कोशिकाओं पर नमकीन पानी की एक बूँद डालता है और उन्हें सिकुड़ते देखता है। टिप्पणी 2.13 की मदद से समझाइए।
भाग III — कोशिका का आकार।
- किसी सामान्य मानव कोशिका को भुजा का घन मानिए। उसका आयतन घन माइक्रोमीटर में निकालिए, फिर घन मिलीमीटर में ()।
- उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल और सतह/आयतन अनुपात निकालिए।
- भुजा का घन मानकर किसी जीवाणु के लिए वही दोहराइए। उसका अनुपात कितने गुना बड़ा है?
- कोशिकाएँ मोटे तौर पर उतने ही आयतन के जल के बराबर द्रव्यमान लेती हैं (प्रति )। वाली कोशिका के द्रव्यमान का अनुमान नैनोग्राम में लगाइए ()।
- लाल रक्त कोशिका व्यास और मोटी एक तश्तरी है। उसके आयतन का अनुमान लगाइए (उसे बेलन मानिए, ) और प्रश्न 11 के घन से तुलना कीजिए।
भाग IV — किसी शरीर में कोशिकाओं की संख्या।
- द्रव्यमान के किसी विद्यार्थी का आयतन लगभग है। यदि शरीर केवल की घनाकार कोशिकाओं से बना होता, तो उसमें कितनी कोशिकाएँ होतीं?
- असल में शरीर के आयतन का लगभग एक-तिहाई कोशिकाओं के बीच का तरल और दूसरा अकोशिकीय पदार्थ है। अनुमान को सुधारिए।
- अकेली लाल रक्त कोशिकाएँ ही लगभग हैं। प्रश्न 15 के आयतन की मदद से बताइए कि वे कितना आयतन घेरती हैं। क्या यह लगभग के रक्त-आयतन से, जिसका 45% कोशिकाएँ हैं, संगत है?
- प्रश्न 17 और 18 को जोड़िए: शरीर में कोशिकाओं की कुल संख्या की परिमाण की कोटि बताइए, और यह भी कि ठीक-ठीक गिनती क्यों असंभव है।
- परिणाम लिखिए: मोटे तौर पर कितनी कोशिकाएँ मिलकर एक मनुष्य बनाती हैं, और किस प्रक्रिया से — किस शुरुआती संख्या से — वे सब बनीं?
हल
हल — समस्या 2.1.
1. ।
2. ; उसमें लगभग दो कोशिकाएँ आती हैं।
3. : चित्र का है।
4. , यानी लगभग ।
5. कोशिका भित्ति, प्लाज़्मा झिल्ली (भित्ति से सटी हुई), कोशिकाद्रव्य, केंद्रक, रसधानी। मौजूद पर पर अदृश्य: राइबोसोम (और सूत्रकणिकाएँ सीमा पर हैं)।
6. वे ऐसी परत की सतह से आती हैं जो कई कोशिकाएँ मोटी है और जिस पर लगातार रगड़ पड़ती है: सबसे बाहर की कोशिकाएँ चपटी होकर झड़ जाती हैं, और इसीलिए रुई का फाहा उन्हें बटोर लेता है।
7. नंगी आँख की की सीमा से बस ऊपर है: यानी मुश्किल से दिखता एक कण। पर वह क्षेत्र का घेरता है, पर आधे से अधिक; कोई भी उपलब्ध अभिदृश्यक ठीक चौथाई नहीं देता।
8. जीवाणु। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी उनकी भित्ति, झिल्ली, राइबोसोम और DNA वाला क्षेत्र दिखाता, और केंद्रक का अभाव भी।
9. गाल की कोशिका ऐसे शरीर में एक ही काम करती है (किसी सतह की रक्षा) जहाँ दूसरी कोशिकाएँ उसे खिलाती, ऑक्सीजन पहुँचाती और उसका समन्वय करती हैं; पैरामीशियम के पास कोई और है ही नहीं, और उसे अकेली एक कोशिका के रूप में खाना, चलना, संवेदन करना और बँटना पड़ता है।
10. अब बाहर का घोल कोशिकाद्रव्य से अधिक नमकीन है, इसलिए जल झिल्ली पार करके कोशिका से बाहर चला जाता है; कोशिका आयतन खोकर सिकुड़ जाती है।
11. ।
12. ; अनुपात प्रति माइक्रोमीटर।
13. सतह , आयतन , अनुपात 6: यानी बीस गुना बड़ा।
14. , यानी लगभग ।
15. , यानी घन का लगभग सौवाँ हिस्सा।
16. ; 8000 से भाग देने पर: लगभग कोशिकाएँ।
17. उसका दो-तिहाई: लगभग ।
18. । रक्त की कोशिकाएँ: — यानी संगत।
19. लगभग बड़ी कोशिकाएँ और उनके ऊपर लाल कोशिकाएँ: कुल मिलाकर क़रीब , यानी कुछ दसियों लाख करोड़। कोशिकाओं के आकार सौ गुने तक फैले हैं और तरह-तरह की कोशिकाओं का मेल बदलता रहता है, इसलिए कोई भी गिनती दो-तीन गुने के भीतर का अनुमान ही है।
20. मोटे तौर पर तीस लाख करोड़ () कोशिकाएँ, और वे सब अकेली एक शुरुआती कोशिका, यानी निषेचित अंडाणु, से लगातार कोशिका विभाजनों द्वारा बनीं।