विश्वविद्यालय जीवविज्ञान — वर्ष 3 · Bachelor Year 3
4जीनोमिकी और अनुक्रमण
किसी स्वतंत्रजीवी जीव का पहला पूर्ण जीनोम, किसी जीवाणु के , चालीस लोगों की टोली के एक वर्ष के काम के बाद 1995 में प्रकाशित हुआ। मानव जीनोम, अरब क्षार युग्म, किसी अंतरराष्ट्रीय संघ को तेरह वर्ष और लगभग तीन अरब डॉलर ले गया और 2003 में पूरा घोषित हुआ। आज कोई मेज़ पर रखी मशीन कुछ सौ डॉलर में रात भर में मानव जीनोम पढ़ लेती है, कोई अस्पताल औषध चुनने के लिए रोगी के अर्बुद का अनुक्रमण करता है, और कोई संग्रहालय चालीस हज़ार वर्ष पुरानी किसी हड्डी का जीनोम निकालकर पढ़ लेता है। जिस तकनीक ने यह संभव किया, जो गणित लाखों छोटे वाचनों को जीनोम में बदलता है, और पूर्ण जीनोमों ने हमारे DNA के आकार, अंतर्वस्तु तथा इतिहास के बारे में जो सिखाया है — यही इस अध्याय का विषय है। उसके बाद का अध्याय उन अल्गोरिद्मों को उठाता है जो हाथ में आ चुके अनुक्रमों की तुलना करते हैं।
4.1 DNA पढ़ना
परिभाषा 4.1 (शृंखला-समापन से अनुक्रमण)
सैंगर अनुक्रमण किसी एकलड़ी साँचे की नकल किसी प्रारंभक से DNA पॉलीमरेज़ द्वारा चारों सामान्य न्यूक्लियोटाइडों और डाइडिऑक्सीन्यूक्लियोटाइडों के एक छोटे अनुपात की उपस्थिति में करता है, और इन डाइडिऑक्सी रूपों में 3 हाइड्रॉक्सिल नहीं होता, इसलिए वे जहाँ भी बैठते हैं शृंखला समाप्त कर देते हैं। हर डाइडिऑक्सीन्यूक्लियोटाइड एक भिन्न प्रतिदीप्त रंजक ढोता है। उत्पाद खंडों का ऐसा मिश्रण है जिसमें साँचे की हर स्थिति के लिए एक खंड है और हर एक का अंत ज्ञात पहचान वाले क्षार पर होता है; जेल की किसी केशिका में आकार से पृथक होकर वे लंबाई के क्रम में किसी संसूचक के आगे से गुज़रते हैं, और रंगों का क्रम ही साँचे का अनुक्रम है। एक बारी में से कम त्रुटि-दर पर पढ़े जाते हैं; किसी संरचना या किसी एक जीन की पुष्टि के लिए यही विधि बनी हुई है।
प्रमाण-सामग्री. सैंगर, निकलेन और कुल्सन ने यह विधि 1977 में प्रकाशित की और उसी वर्ष उससे फ़ेज X174 के पढ़े — पहला पूर्ण DNA जीनोम — और 1981 में मानव सूत्रकणिका के । फ़्लाइशमैन और सहयोगियों (1995) ने Haemophilus influenzae के पूरे जीनोम को यादृच्छिक खंडों में तोड़कर, उनमें से का अनुक्रमण करके और वाचनों को कंप्यूटर से जोड़कर पढ़े — यही वह पूर्ण-जीनोम शॉटगन रणनीति है जिसे हर बाद की परियोजना ने और बड़ा किया। ∎
परिभाषा 4.2 (बृहत्-समांतर अनुक्रमण)
दूसरी पीढ़ी के यंत्र एक साथ लाखों से अरबों खंड पढ़ते हैं। संश्लेषण से अनुक्रमण में खंड, जिनके सिरों पर अनुकूलक जुड़े होते हैं, किसी काँच के प्रवाह-कोष्ठ से बाँधे जाते हैं और वहीं एक जैसे अणुओं के गुच्छों में प्रवर्धित किए जाते हैं; फिर गुच्छों को प्रतिदीप्त, उत्क्रमणीय रूप से अवरुद्ध न्यूक्लियोटाइडों से प्रति चक्र एक क्षार बढ़ाया जाता है, चित्रित किया जाता है, अवरोध हटाया जाता है और फिर बढ़ाया जाता है, ताकि हर चक्र हर गुच्छे के वाचन में एक क्षार जोड़े। वाचन के होते हैं, प्रायः किसी खंड के दोनों सिरों से (युग्मित सिरे), प्रति क्षार लगभग त्रुटि-दर के साथ, और एक बारी तक क्षार देती है। तीसरी पीढ़ी के दीर्घ-वाचन यंत्र अकेले अणु बिना प्रवर्धन के पढ़ते हैं: या तो किसी एक पॉलीमरेज़ को वास्तविक समय में प्रतिदीप्त न्यूक्लियोटाइड बैठाते देखकर, या DNA को किसी प्रोटीन नैनोछिद्र में से पिरोकर और उस आयनी धारा को अंकित करके जिसे क्षारों का हर अनुक्रम अपने ही ढंग से मॉडुलित करता है। और उससे बड़े वाचन उन पुनरावृत्तियों को पाट देते हैं जो छोटे वाचन नहीं पाट सकते, ऊँची कच्ची त्रुटि-दर पर, जिसे सर्वसम्मति घटा देती है।
प्रमेय 4.3 (किसी शॉटगन परियोजना में आच्छादन और अंतराल)
मान लीजिए वाचन, जिनमें से हर एक लंबाई का है, लंबाई के किसी जीनोम के साथ-साथ यादृच्छिक स्थितियों पर लिए गए हैं, और को आच्छादन कहिए, यानी किसी क्षार को ढकने वाले वाचनों की औसत संख्या। तब कोई दिया हुआ क्षार वाचनों की ऐसी संख्या से ढका होता है जो माध्य के साथ पॉइसों है: जीनोम का जो अंश अननुक्रमित रह जाता है वह है
और यदि दो वाचन तभी अतिव्यापी माने जाएँ जब वे कम-से-कम क्षार साझा करें, यानी हो, तो कॉन्टिगों (अतिव्यापी वाचनों के द्वीपों) की प्रत्याशित संख्या है
और उनकी माध्य लंबाई लगभग है।
उपपत्ति. वाचनों के आरंभ-बिंदु प्रति क्षार घनत्व से यादृच्छिक रूप से पड़ते हैं। कोई क्षार उन्हीं वाचनों से ढका होता है जो उससे पहले के क्षारों में आरंभ होते हैं; लंबाई की किसी खिड़की में आरंभों की संख्या माध्य के साथ पॉइसों है, और एक भी न होने की प्रायिकता है। कोई वाचन अपने कॉन्टिग का सबसे दायाँ तब होता है जब उसके अपने आरंभ के बाद के क्षारों में कोई दूसरा वाचन आरंभ न हो (बाद में आरंभ होने वाला वाचन उससे से कम अतिव्यापी होता और जोड़ा नहीं जाता); वह प्रायिकता है, और चूँकि हर कॉन्टिग में ठीक एक सबसे दायाँ वाचन होता है, कॉन्टिगों की प्रत्याशित संख्या है। माध्य कॉन्टिग लंबाई को कॉन्टिगों की संख्या से भाग देकर, अनाच्छादित अंश का संशोधन करके, निकलती है। ∎
उदाहरण 4.4 (कितना पर्याप्त है)
पर अननुक्रमित अंश है — किसी जीनोम के लिए, कुछ दसियों हज़ार अंतरालों में दो करोड़ क्षार। पर वह है, कुल मिलाकर । मानव जीनोमों का अनुक्रमण नियमित रूप से पर होता है, आच्छादन-अंतरालों के कारण नहीं () बल्कि इसलिए कि हर क्षार को दोनों गुणसूत्रों में से हर एक पर कई बार पढ़ना पड़ता है ताकि प्रति वाचन त्रुटि-दर के सामने कोई विषमयुग्मजी प्रकारांतर विश्वास से पुकारा जा सके। जीवाणु जीनोमों का अनुक्रमण इसी कारण और इसलिए भी कि वह सस्ता है, – पर होता है। सूत्र यह भी दिखाता है कि आच्छादन क्या ठीक नहीं कर सकता: किसी वाचन से लंबी कोई पुनरावृत्ति वह जगह है जहाँ अतिव्यापन ग्राफ़ शाखित होता है, और कितने ही छोटे वाचन उसे सुलझा नहीं सकते। दीर्घ वाचन इसी के लिए हैं।
4.2 वाचनों से जीनोम तक
परिभाषा 4.5 (संग्रथन और टिप्पणीकरण)
संग्रथन किसी जीनोम को उसके वाचनों से अतिव्यापन के सहारे फिर बनाता है: किसी अतिव्यापन ग्राफ़ में हर वाचन एक शीर्ष है जो उन वाचनों से जुड़ा है जिनसे वह अतिव्यापी है; किसी दे ब्रॉयन ग्राफ़ में, जो अरबों छोटे वाचनों के लिए काम आता है, हर -मर (लंबाई का उपअनुक्रम) एक शीर्ष है और जीनोम उनमें से होकर जाता कोई पथ है। दोनों को वाचन से लंबी पुनरावृत्तियाँ तोड़ देती हैं, जो शाखित पथ देती हैं। कॉन्टिग युग्मित-सिरे वाचनों और दूर-दृष्टि सूचना (दीर्घ वाचन, प्रकाशिक मानचित्र, गुणसूत्र-संपर्क मानचित्र) से क्रम और दिशा में रखकर स्कैफ़ोल्ड बनाए जाते हैं, और स्कैफ़ोल्ड गुणसूत्रों पर रखे जाते हैं। संग्रथन की गुणवत्ता N50 से बताई जाती है: वह कॉन्टिग लंबाई जिसके बराबर या उससे लंबे कॉन्टिगों में संग्रथित क्षारों का आधा भाग हो। फिर टिप्पणीकरण जीन ढूँढ़ता है: जीवाणुओं में, संयोग से लंबे खुले वाचन-ढाँचे; सुकेंद्रकियों में, अनुक्रम-संकेतों (विच्छेदन स्थल, प्रवर्तक, कूटक अभिनति), ज्ञात प्रोटीनों से समजातता, और RNA से अनुक्रमित अनुलेखों को मिलाकर। किसी जाति के लिए परिणाम है कोई संदर्भ जीनोम, जिससे उस जाति का हर बाद का वाचन नए सिरे से संग्रथित करने के बजाय संरेखित किया जाता है।
विधि 4.6 (प्रतिदर्श से प्रकारांतरों तक)
किसी संदर्भ के सामने किसी व्यक्ति के पुनःअनुक्रमण अध्ययन के लिए: (1) DNA निकालिए, उसे में खंडित कीजिए, अनुकूलक जोड़िए (यही संचय है); (2) आवश्यक आच्छादन तक अनुक्रमण कीजिए (मानव जीनोम के लिए 30, एक्सोम के लिए 100, जो जीनोम के उस को पकड़ता है जो प्रोटीन का कूटलेखन करता है); (3) हर वाचन को संदर्भ से संरेखित कीजिए, असंगतियाँ सहते हुए; (4) हर स्थिति पर वाचनों के क्षार गिनिए: जिस स्थिति पर लगभग आधे वाचन संदर्भ से असहमत हों वह कोई विषमयुग्मजी प्रकारांतर है, जहाँ लगभग सब असहमत हों वहाँ समयुग्मजी, जहाँ थोड़े असहमत हों वहाँ कोई त्रुटि; (5) गहराई, क्षार गुणवत्ता और लड़ी-संतुलन से छानिए; (6) हर प्रकारांतर पर किसी भी जीन पर उसके प्रभाव (पर्यायी, कुअर्थी, निरर्थक, विच्छेदन, ढाँचा-विस्थापन) और समष्टि आँकड़ाकोशों में उसकी बारंबारता की टिप्पणी लगाइए; (7) किसी निदान के लिए, लक्षण-प्ररूप से मेल खाते जीनों में हानिकारक पूर्वानुमानित दुर्लभ प्रकारांतर रखिए, और सैंगर अनुक्रमण से पुष्टि कीजिए।
4.3 जीनोम दिखते कैसे हैं
प्रतिज्ञप्ति 4.7 (जीनोम का आकार और जीनों की संख्या)
सुकेंद्रकियों में जीनोम के आकार गुने के परास में फैले हैं — खमीर के लिए , कृमि के लिए , मक्खी के लिए , मनुष्य के लिए , प्याज़ के लिए , फेफड़ा-मछली के लिए , कुमुदिनी Paris japonica के लिए — जबकि जीनों की संख्याएँ मुश्किल से गुने में फैली हैं: खमीर में , कृमि में , मक्खी में , मनुष्य में लगभग प्रोटीन-कूटलेखी जीन, चावल में । यही C-मान विरोधाभास है: जीनोम का आकार जटिलता नहीं मापता, और न ही जीनों की संख्या। जो बदलता है वह अकूटलेखी अंतर्वस्तु है — अंतर्वेशन, स्थानांतरणीय अवयव, उपग्रह पुनरावृत्तियाँ — और कोई जीनोम कितने प्रोटीन बना सकता है, यह संख्या उसकी जीन-गणना से कहीं आगे वैकल्पिक विच्छेदन (अध्याय 2) और नियमन से बढ़ जाती है, और जीव की जटिलता अधिकतर वहीं लिखी है। इसके विपरीत जीवाणु जीनोम सघन हैं और उनका आकार जीन-संख्या के साथ चलता है: लगभग एक जीन प्रति किलोक्षार, E. coli में कूटलेखी।
उदाहरण 4.8 (अंतर्वस्तु के हिसाब से मानव जीनोम)
में से: प्रोटीन-कूटलेखी बहिर्वेशन ; जीनों के अंतर्वेशन और अननुवादित क्षेत्र लगभग ; स्थानांतरणीय अवयव और उनके जीवाश्म लगभग — LINE-1 रेट्रोट्रांसपोज़ॉन , Alu अवयव (किसी अनुक्रम की दस लाख से अधिक प्रतियाँ), अंतर्जात रेट्रोवायरस ; खंडीय द्विगुणन ; सरल पुनरावृत्तियाँ और उपग्रह, गुणसूत्रबिंदुओं सहित, लगभग ; शेष अनन्य अकूटलेखी अनुक्रम, जहाँ नियामक अवयव रहते हैं। कोई जीन अब भी सक्रिय LINE-1 तंत्र का कूटलेखन करते हैं, और नए प्रवेश लगभग हर बीस जन्मों में एक बार होते हैं। जीनोम का लगभग पकड़ में आने योग्य शोधक चयन में है — बहिर्वेशनों से कहीं अधिक — और उसका अधिकांश नियामक है।
परिभाषा 4.9 (तुलनात्मक जीनोमिकी)
दो जातियों के वे जीन जो उनके साझा पूर्वज के एक ही जीन से उतरे हैं ऑर्थोलॉग हैं; किसी एक जाति के भीतर किसी द्विगुणन से उतरे जीन पैरालॉग हैं। गुणसूत्र के वे खंड जिनमें जातियों के बीच जीन-क्रम संरक्षित है सहविन्यासी हैं; सहविन्यास से किसी जीन को एक जीनोम में दूसरे जीनोम में उसकी स्थिति से ढूँढ़ा जा सकता है और वे पुनर्विन्यास उजागर होते हैं जो दो गुणसूत्र-प्ररूपों को अलग करते हैं (मनुष्य और चूहे के बीच लगभग )। दूर की जातियों के पार संरक्षित वे अनुक्रम जो किसी प्रोटीन का कूटलेखन नहीं करते — संरक्षित अकूटलेखी अवयव, जिनमें से कुछ मनुष्य और मछली के बीच तक क्षार-दर-क्षार अतिसंरक्षित हैं — अधिकतर परिवर्धन-जीनों के संवर्धक हैं। पूर्ण-जीनोम द्विगुणनों ने वंशक्रमों के इतिहास पर छाप छोड़ी है: कशेरुकियों के उद्गम पर दो बारियाँ (अकशेरुकियों के एक गुच्छे के सामने स्तनधारियों के चार Hox गुच्छे), सैल्मन-कुल के पूर्वज में एक, खमीर के वंशक्रम में एक, सपुष्प पौधों में कई; द्विगुणित जीन अधिकतर करोड़ों वर्षों में खो जाते हैं, और जो बचते हैं उनका प्रकार्य अलग हो जाता है।
उदाहरण 4.10 (मनुष्य और चिंपैंज़ी)
संरेखित एकल-प्रति अनुक्रम मनुष्य और चिंपैंज़ी के बीच क्षारों के पर भिन्न है — कोई लाख प्रतिस्थापन — और ऐसे अंतर्वेशनों तथा विलोपनों से भी जो मिलकर हर जीनोम के और बनते हैं। दो मनुष्य हज़ार में लगभग एक क्षार पर भिन्न होते हैं, यानी कोई लाख स्थलों पर, और साथ में कुछ हज़ार संरचनात्मक प्रकारांतर; दो चिंपैंज़ी, जिनकी समष्टि अधिक समय तक बड़ी रही है, इससे कुछ अधिक पर। कोई बच्चा लगभग ऐसे नए उत्परिवर्तन ढोता है जो दोनों जनकों में नहीं हैं, उनमें से चार-पंचमांश पिता से, और यह संख्या पिता की आयु के प्रति वर्ष लगभग दो से बढ़ती है — शुक्राणुजनन के अनेक विभाजनों पर लगाया गया अध्याय 3 का अंकगणित।
4.4 जीनोम और लक्षण
परिभाषा 4.11 (जीनोम-व्यापी सहचर्य)
एकल-न्यूक्लियोटाइड बहुरूपता (SNP) ऐसी स्थिति है जिस पर दो क्षार किसी समष्टि के कम-से-कम में आते हैं; मनुष्यों में लगभग एक करोड़ सामान्य हैं। कोई जीनोम-व्यापी सहचर्य अध्ययन (GWAS) किसी रोग वाले हज़ारों और बिना रोग वाले हज़ारों लोगों में लाखों SNP का जीन-प्ररूपण करता है और हर SNP पर पूछता है कि कोई एक युग्मविकल्पी रोगियों में अधिक बारंबार है या नहीं। चूँकि दस लाख परीक्षण किए जाते हैं, कोई परिणाम तभी गिना जाता है जब वह लगभग की सार्थकता-देहली से नीचे हो ( को प्रभावी रूप से स्वतंत्र दस लाख परीक्षणों से भाग देकर)। सहचारी SNP किसी क्षेत्र को चिह्नित करते हैं, किसी कारक प्रकारांतर को नहीं, क्योंकि पड़ोसी युग्मविकल्पी दसियों किलोक्षार तक साथ-साथ चलते हैं (सहलग्नता असंतुलन)। अधिकांश सामान्य रोगों के लिए सहचारी युग्मविकल्पी जोखिम को कुछ प्रतिशत ही खिसकाते हैं और अधिकतर नियामक अनुक्रम में पड़ते हैं; उनका संयुक्त प्रभाव, हज़ारों SNP पर जोड़कर किसी बहुजीनी अंक के रूप में, वंशागतता का एक अंश समझाता है और जोखिम का पूर्वानुमान लगभग उतना ही अच्छा करता है जितना कुल-इतिहास।
टिप्पणी 4.12 (जीनोमिकी ने क्या दिया और क्या नहीं)
अनुक्रमण वहाँ निर्णायक रहा है जहाँ किसी एक जीन का बड़ा प्रभाव है: कई हज़ार मेंडेली रोगों के जीन मिल चुके हैं, और किसी अनिदानित विकार वाले बच्चे के एक्सोम का अनुक्रमण लगभग एक-तिहाई स्थितियों में निदान देता है। कर्कट जीनोम बताते हैं कि कोई अर्बुद कौन-से चालक ढोता है और कौन-सी औषधें काम कर सकती हैं (अध्याय 11); रोगजनक जीनोम प्रकोपों को प्रजाति-दर-प्रजाति खोज निकालते हैं (अध्याय 12); प्राचीन जीनोमों ने मानव प्रागितिहास फिर से लिखा है और दिखाया है कि अफ़्रीका के बाहर के लोग लगभग नियंडरथाल DNA ढोते हैं। सामान्य रोगों के लिए — मधुमेह, हृद्रोग, मनोविदलता — जीनोमिकी ने हज़ारों छोटे प्रभाव दिए हैं और थोड़ी ही क्रियाविधियाँ, और किसी स्वस्थ व्यक्ति के जीनोम से पूर्वानुमान का वादा अब भी विनम्र है। जीनोम पुर्ज़ों की सूची है; पुर्ज़े आपस में कैसे काम करते हैं, वह जीवविज्ञान उससे पढ़ा नहीं जाता।
4.5 अभ्यास
अभ्यास 4.1 ★
समझाइए कि कोई डाइडिऑक्सीन्यूक्लियोटाइड बढ़ती DNA शृंखला को क्यों समाप्त कर देता है, और किसी सैंगर अभिक्रिया में हर न्यूक्लियोटाइड के सामान्य और डाइडिऑक्सी दोनों रूप क्यों होने चाहिए।
हल
हल — अभ्यास 4.1.
किसी डाइडिऑक्सीन्यूक्लियोटाइड में 3 हाइड्रॉक्सिल नहीं होता, इसलिए अगले न्यूक्लियोटाइड से कोई फ़ॉस्फ़ोडाइएस्टर बंध नहीं बन सकता और शृंखला रुक जाती है। केवल डाइडिऑक्सी रूप हों तो हर शृंखला पहली ही स्थिति पर रुक जाएगी; केवल सामान्य रूप हों तो कोई नहीं रुकेगी। मिश्रण समापन को हर स्थिति पर एक यादृच्छिक घटना बना देता है, इसलिए उत्पाद एक पूरी सीढ़ी बनाते हैं, साँचे के हर क्षार के लिए एक लंबाई।
अभ्यास 4.2 ★
कोई बारी युग्मित वाचन देती है, हर एक का। इससे किसी मानव जीनोम का कितना आच्छादन मिलता है? किसी जीवाणु जीनोम का?
हल
हल — अभ्यास 4.2.
क्षार। मनुष्य: । जीवाणु: ।
अभ्यास 4.3 ★
कॉन्टिग, स्कैफ़ोल्ड और N50 को परिभाषित कीजिए। के किसी संग्रथन में के दस कॉन्टिग और के हैं। उसका N50 क्या है?
हल
हल — अभ्यास 4.3.
कॉन्टिग अतिव्यापी वाचनों से संग्रथित कोई सतत अनुक्रम है; स्कैफ़ोल्ड कॉन्टिगों का ऐसा क्रमित, दिशित समुच्चय है जिनके बीच आकलित आकार के अंतराल हैं; N50 वह कॉन्टिग लंबाई है जिस पर छाँटे गए कॉन्टिग संग्रथित क्षारों के आधे तक पहुँच जाते हैं। यहाँ अकेले के दस कॉन्टिग में हैं, जो के आधे बिंदु से आगे है (सातवाँ तक पहुँच जाता है): N50 ।
अभ्यास 4.4 ★
C-मान विरोधाभास को दो उदाहरणों के साथ बताइए, और कहिए कि बड़े जीनोमों के अतिरिक्त DNA का अधिकांश किससे बनता है।
हल
हल — अभ्यास 4.4.
जीनोम का आकार जीव की जटिलता के साथ नहीं चलता: किसी प्याज़ में मनुष्य से पाँच गुना DNA है, किसी फेफड़ा-मछली में चालीस गुना; खमीर और कृमि के DNA में दस गुना अंतर है पर जीन-संख्याएँ मिलती-जुलती हैं। अतिरिक्त भाग अकूटलेखी है: स्थानांतरणीय अवयव और उनके अवशेष, अंतर्वेशन, उपग्रह पुनरावृत्तियाँ।
अभ्यास 4.5 ★★
प्रमेय 4.3 का उपयोग करते हुए वह आच्छादन निकालिए जो दस लाख में अधिक-से-अधिक एक क्षार अननुक्रमित छोड़े, और वाचनों तथा न्यूनतम अतिव्यापन के साथ पर पढ़े गए किसी जीनोम के लिए कॉन्टिगों की प्रत्याशित संख्या।
अभ्यास 4.6 ★★
कोई विषमयुग्मजी प्रकारांतर वाचनों से ढका है। यह मानते हुए कि हर वाचन प्रायिकता से किसी भी युग्मविकल्पी को दिखाता है, इसकी प्रायिकता क्या है कि से कम वाचन प्रकारांतर युग्मविकल्पी दिखाएँ (जिससे उसे त्रुटियाँ समझ लिया जाए)? माध्य और मानक विचलन के साथ प्रसामान्य सन्निकटन का उपयोग कीजिए। मानक क्यों है?
अभ्यास 4.7 ★★
किसी जीनोम में की कोई पुनरावृत्ति प्रतियों में है। समझाइए कि वाचनों से बना कोई संग्रथन उसे क्यों ढहा देता है, परिणामी ग्राफ़ कैसा दिखता है, और कितनी वाचन-लंबाई उसे सुलझा देगी।
हल
हल — अभ्यास 4.7.
पुनरावृत्ति के भीतर से आया हर वाचन एक जैसा होता है, चाहे वह किसी भी प्रति से आया हो, इसलिए संग्रथक एक ही शीर्ष बनाता है जिसमें पथ घुसते और निकलते हैं; वह बता नहीं सकता कि कौन-सा प्रवेश किस निकास से जुड़ता है, और संग्रथन अंतरालों में टूट जाता है, जिसमें पुनरावृत्ति एक ही बार, माध्य से गुना आच्छादन के साथ, उपस्थित रहती है। पुनरावृत्ति और दोनों ओर के अनन्य पार्श्वों से लंबे वाचन — या अधिक — हर प्रति को पाट देते हैं और उसे सुलझा देते हैं।
अभ्यास 4.8 ★★
दो मनुष्य हज़ार में एक क्षार पर भिन्न हैं। उनके एक्सोमों ( कूटलेखी अनुक्रम) में कितने अंतर होंगे? यदि कूटलेखी अंतरों में से दो-तिहाई पर्यायी या सौम्य हों और शेष किसी प्रोटीन को बदलते हों, तो एक व्यक्ति दूसरे के सापेक्ष कितने प्रोटीन-बदलने वाले प्रकारांतर ढोता है?
हल
हल — अभ्यास 4.8.
कूटलेखी अंतर; एक-तिहाई, लगभग , प्रोटीन बदलते हैं।
अभ्यास 4.9 ★★
कोई GWAS SNP का परीक्षण देहली पर करता है। यदि कोई भी SNP वस्तुतः सहचारी न हो तो कितने मिथ्या धनात्मक प्रत्याशित हैं? कोई SNP युग्मविकल्पी बारंबारता वाले किसी रोग का जोखिम बढ़ाकर कर देता है। समझाइए कि ऐसा प्रभाव हज़ार लोगों के अध्ययन में क्यों पकड़ में नहीं आता और किसी व्यक्ति के लिए क्यों बेकार है, फिर भी वह किसी क्रियाविधि की ओर क्यों इशारा कर सकता है।
हल
हल — अभ्यास 4.9.
प्रत्याशित मिथ्या धनात्मक । वाले रोग पर का सापेक्ष जोखिम प्रति हज़ार कुछ ही स्थितियाँ बदलता है; हज़ार लोगों में लगभग बीस रोगी होते हैं, जो उसे देखने के लिए कहीं कम हैं (सामर्थ्य रोगियों की संख्या और प्रभाव के वर्ग के साथ बढ़ती है)। किसी व्यक्ति के लिए प्रतिशत-बिंदु निरर्थक है। पर वह युग्मविकल्पी ऐसे जीन को चिह्नित करता है जिसकी क्रियाशीलता में मामूली बदलाव रोग-जोखिम बदल देता है — वह जीन, और उसका पथ, ऐसा औषध-लक्ष्य हो सकता है जिसके पूर्ण निरोध का बड़ा प्रभाव हो।
अभ्यास 4.10 ★★★
जीवाणु जीनोम लगभग कूटलेखी हैं; मानव जीनोम । इस अंतर के लिए तीन परिकल्पनाएँ दीजिए — समष्टि-आनुवंशिक, संरचनात्मक और नियामक — और हर एक के लिए कोई ऐसा जीनोमी प्रेक्षण जो उसका समर्थन करता हो या उसे कमज़ोर करता हो।
हल
हल — अभ्यास 4.10.
समष्टि-आनुवंशिक: विशाल समष्टियों वाले जीवाणुओं में चयन थोड़े महँगे अंतर्वेशन भी हटा देता है; छोटी प्रभावी समष्टियों वाले स्तनधारियों में अपवाह हल्के हानिकारक अकूटलेखी DNA को जमा होने देता है — वंशक्रमों के पार जीनोम-आकार और समष्टि-आकार के बीच विलोम सहसंबंध से समर्थित, अपवादों से कमज़ोर। संरचनात्मक: सुकेंद्रकी जीनोमों पर वे ट्रांसपोज़ॉन आक्रमण करते हैं जिन्हें जीवाणु, विलोपन की अपनी अभिनति और स्वार्थी अवयवों के लिए किसी अर्धसूत्री शरण के अभाव में, साफ़ कर देते हैं — जीनोम-आकार और ट्रांसपोज़ॉन-अंतर्वस्तु के सहसंबंध से समर्थित। नियामक: जटिल परिवर्धन को अधिक नियामक DNA चाहिए — परिवर्धन-जीनों के चारों ओर संरक्षित अकूटलेखी अवयवों से समर्थित, पर इस तथ्य से कमज़ोर कि मानव जीनोम का केवल ही कोई चयन दिखाता है, इसलिए अधिकांश अकूटलेखी DNA नियामक नहीं है।
अभ्यास 4.11 ★★★
दो भिन्न लंबाइयों के मिश्रित वाचनों के लिए लैंडर–वॉटरमैन कॉन्टिग-गणना व्युत्पन्न कीजिए: छोटे वाचन, लंबाई के, और दीर्घ वाचन, लंबाई के, अतिव्यापन उसी न्यूनतम से गिने गए। (हर वाचन को अपने कॉन्टिग का सबसे दायाँ मानिए यदि उसकी अपनी लंबाई घटा के भीतर किसी भी प्रकार का कोई वाचन आरंभ न हो।) दिखाइए कि थोड़े दीर्घ वाचन कॉन्टिग-गणना उतने ही क्षारों वाले छोटे वाचनों से अधिक घटाते हैं।
हल
हल — अभ्यास 4.11.
दोनों प्रकार के आरंभ कुल घनत्व से पड़ते हैं। लंबाई का कोई वाचन अपने कॉन्टिग का सबसे दायाँ तब है जब उसके बाद के क्षारों में किसी भी प्रकार का कोई वाचन आरंभ न हो: प्रायिकता । इसलिए कॉन्टिग । कोई दीर्घ वाचन किसी छोटे वाचन की तुलना में चरघातांकी रूप से कम प्रायिकता से सबसे दायाँ होता है, और हर दीर्घ वाचन अपनी पूरी लंबाई पर किसी अंतराल की संभावना भी हटा देता है; छोटे वाचनों के रूप में उतने ही क्षार अनेक आरंभ-बिंदु जोड़ते हैं पर हर सुरक्षित खिड़की छोटी होती है, इसलिए दीर्घ वाचन जीतते हैं।
अभ्यास 4.12 ★★★
यह तर्क दिया जाता है कि स्तनधारियों के चार Hox गुच्छे कशेरुकियों के आधार पर हुए पूर्ण-जीनोम द्विगुणन की दो बारियों से एक ही गुच्छे से उतरे हैं। बताइए कि यह परिकल्पना जीनोम भर पैरालॉगों का कौन-सा प्रतिरूप, और लैम्प्रे तथा अकशेरुकी कॉर्डेटों के जीनोमों में कौन-सा प्रतिरूप, पूर्वानुमानित करती है, और उसे अकेले गुच्छे के दो स्वतंत्र द्विगुणनों से कैसे अलग किया जाएगा।
हल
हल — अभ्यास 4.12.
दो पूर्ण-जीनोम द्विगुणन यह पूर्वानुमान करते हैं कि चौगुना प्रतिरूप जीनोम भर मिलेगा: पैरालॉगी गुणसूत्र-खंडों के चतुष्क (पैरालॉगॉन) जो एक ही क्रम में एक ही जीन-कुल ढोते हों, और जिनके द्विगुणन सारे कुलों के लिए एक ही काल के हों; ऐम्फ़िऑक्सस और Ciona में एक ही गुच्छा, जो घटनाओं से पहले अलग हुए; और लैम्प्रे में, जो उनके आसपास अलग हुए, कोई मध्यवर्ती या स्वतंत्र रूप से बनी अवस्था। अकेले Hox गुच्छे के स्वतंत्र द्विगुणन केवल Hox के लिए पैरालॉगॉन, भिन्न इतिहास वाले पड़ोसी, और कुलों के बीच भिन्न द्विगुणन-काल पूर्वानुमानित करते हैं। जीनोम-व्यापी पैरालॉगॉन और साझा काल-निर्धारण, जैसा प्रेक्षित है, पूर्ण-जीनोम द्विगुणन के पक्ष में हैं।
4.6 समस्या: एक ही मशीन पर दो जीनोम
समस्या 4.1
सप्तांत समस्या — एक ही बारी में अनुक्रमित एक जीवाणु और एक मनुष्य: वाचनों का बँटवारा, आच्छादन तथा अंतरालों की गणना, कॉन्टिगों की गिनती, त्रुटि-दर के सामने विषमयुग्मजी प्रकारांतरों का निर्धारण, मानव जीनोम की अंतर्वस्तु का तौल, और किसी सहचर्य अध्ययन का आकार, जिसका अंत कम आच्छादन पर कॉन्टिग-गणना, प्रकारांतर-निर्धारण को सुरक्षित बनाने वाले आच्छादन और किसी बच्चे में नए उत्परिवर्तनों की संख्या पर होता है
आँकड़े: एक बारी के वाचन देती है। कोई जीवाणु जीनोम का है; मानव जीनोम (अगुणित)। न्यूनतम अतिव्यापन । प्रति वाचन प्रति क्षार त्रुटि-दर । मानव कूटलेखी अनुक्रम ; जीनोम ट्रांसपोज़ॉन-व्युत्पन्न है, जिसमें की करोड़ Alu प्रतियाँ हैं। दो मनुष्य में एक स्थल पर भिन्न हैं। प्रति क्षार प्रति पीढ़ी उत्परिवर्तन-दर ।
भाग I — जीवाणु।
- जीवाणु को बारी का दिया जाता है। कितने वाचन, और कितना आच्छादन?
- उसके जीनोम का कितना अंश अननुक्रमित है? वह कितने क्षार हुए?
- और कॉन्टिगों की प्रत्याशित संख्या निकालिए।
- किसी पहले के प्रायोगिक चरण में केवल वाचन काम में आए थे। आच्छादन, अनाच्छादित अंश और कॉन्टिग-संख्या?
- जीनोम में किसी rRNA प्रकार्यगुच्छ की प्रतियाँ हैं। बताइए कि संग्रथन में उनके साथ क्या होता है और अकेले इसी से कितने कॉन्टिग-सिरे बनते हैं।
- जीवाणु में लगभग एक जीन प्रति किलोक्षार है। कितने जीन, और यदि जीनोम का कूटलेखी हो तो माध्य जीन-लंबाई क्या है?
भाग II — मनुष्य।
- बारी का शेष भाग एक मानव जीनोम को जाता है। द्विगुणित जीनोम का प्रति अगुणित प्रति के हिसाब से आच्छादन (यानी कुल क्षारों को से भाग देकर)?
- किसी विषमयुग्मजी स्थल पर दोनों युग्मविकल्पियों में से हर एक लगभग आधे वाचनों से ढका होता है। प्रश्न 7 के आच्छादन के साथ हर युग्मविकल्पी को दिखाने वाले वाचनों की प्रत्याशित संख्या क्या है?
- कोई त्रुटि किसी वाचन में प्रायिकता से कोई गलत क्षार दिखाती है। वाचनों से ढके किसी समयुग्मजी स्थल पर किसी विशेष गलत क्षार को दिखाने वाले वाचनों की प्रत्याशित संख्या क्या है (हर एक )? इस आच्छादन पर “प्रकारांतर तभी पुकारिए जब कम-से-कम वाचन और कम-से-कम वाचन उसे दिखाएँ” वाला नियम त्रुटियों को क्यों अस्वीकार कर देता है?
- कोई मनुष्य कितने विषमयुग्मजी स्थल ढोता है (दो यादृच्छिक जीनोमों के अंतरों का मोटे तौर पर आधा हर एक में पड़ता है: में एक स्थल लीजिए)? कूटलेखी अनुक्रम में कितने?
- वाचन किसी संदर्भ से संरेखित किए जाते हैं। समझाइए कि Alu अवयवों से आए वाचन प्रायः गलत प्रति पर क्यों संरेखित होते हैं और उनके भीतर प्रकारांतर-निर्धारण पर इसका क्या परिणाम होता है।
- किसी बच्चे का अनुक्रमण दोनों जनकों के साथ होता है। आप कितने नए उत्परिवर्तन की अपेक्षा करते हैं? इस आच्छादन पर बच्चे में कितने वाचनों को ऐसा प्रकारांतर दिखाना चाहिए जो दोनों जनकों में अनुपस्थित हो, ताकि उस पर विश्वास किया जाए, और जनकों का आच्छादन बच्चे के आच्छादन जितना ही महत्वपूर्ण क्यों है?
- कोई चिकित्सकीय प्रयोगशाला एक्सोम () पकड़ती है और उसका पर अनुक्रमण करती है। इसमें कितने वाचन लगते हैं, और यह प्रति रोगी पर किसी जीनोम से सस्ता क्यों है, जबकि उसका आच्छादन अधिक है?
भाग III — किसी जीनोम की अंतर्वस्तु।
- मानव जीनोम का कितना अंश Alu है, और प्रश्न 7 के वाचनों में से कितने Alu अवयवों से आते हैं?
- संदर्भ का है पर किसी द्विगुणित कोशिका में है; और वाले किसी प्याज़ में लगभग जीन हैं। यदि उसके जीनों में औसतन कूटलेखी अनुक्रम हो तो प्याज़ के जीनोम का कूटलेखी अंश क्या है?
- मनुष्य और चिंपैंज़ी संरेखित क्षारों के पर भिन्न हैं। संरेखणीय अनुक्रम में यह कितने प्रतिस्थापन हुए? करोड़ वर्षों में दोनों वंशक्रमों के बीच बराबर बाँटा जाए तो इससे प्रति क्षार प्रति वर्ष और वर्ष की प्रति पीढ़ी कौन-सी उत्परिवर्तन-दर निकलती है? आँकड़ों में दिए गए सीधे मापन से तुलना कीजिए।
- कशेरुकियों के दो जीनोम-द्विगुणनों से हर पूर्वज जीन की चार तक प्रतियाँ मिलनी चाहिए। मनुष्यों में लगभग जीन हैं और अकशेरुकी कॉर्डेट Ciona में लगभग । इस परिकल्पना पर कि पूर्वज के पास थे, द्विगुणों का कितना अंश खो चुका है?
- समझाइए कि जीन-संख्या जीव की जटिलता का खराब माप क्यों है, और तर्क के रूप में अध्याय 2 की वैकल्पिक विच्छेदन-गणना लीजिए।
- जीनोम का शोधक चयन में है पर केवल प्रोटीन का कूटलेखन करता है। शेष क्या होने की संभावना है, और आप किसी एक संभावित अवयव का परीक्षण कैसे करेंगे?
भाग IV — एक सहचर्य अध्ययन।
- SNP का परीक्षण होता है। की कुल-परिवार त्रुटि के लिए बोन्फ़ेरोनी देहली बताइए, और पर मिथ्या धनात्मकों की प्रत्याशित संख्या।
- किसी रोग की व्यापकता है। बारंबारता का कोई जोखिम युग्मविकल्पी संभावना-अनुपात बढ़ा देता है। दो प्रतियाँ, एक प्रति और कोई प्रति न ढोने वाले का रोग-जोखिम निकालिए, अवाहक का जोखिम लेकर। (संभावना-अनुपात गुणा कीजिए।)
- ऐसे दो सौ युग्मविकल्पी मिलते हैं। समझाइए कि बहुजीनी अंक क्या है, और ऊपरी में पड़े किसी व्यक्ति का अंक कई गुना जोखिम के तुल्य क्यों हो सकता है जबकि हर युग्मविकल्पी लगभग कुछ नहीं करता।
- समझाइए कि सार्थकता तक पहुँचा कोई SNP प्रायः कारक प्रकारांतर क्यों नहीं होता, और उस क्षेत्र में कारक प्रकारांतर की पहचान कौन-सा प्रयोग करेगा।
- वर्ष पुरानी किसी हड्डी के किसी प्राचीन जीनोम का पर अनुक्रमण होता है। उसका कितना अंश पढ़ा जाता है? यह फिर भी समष्टि-इतिहास के वे प्रश्न क्यों हल कर सकता है जो अकेला कोई आधुनिक जीनोम नहीं कर सकता?
- सारांश दीजिए: प्रायोगिक संग्रथन में कॉन्टिगों की संख्या (प्रश्न 4), वह प्रति अगुणित जीनोम आच्छादन जो प्रति युग्मविकल्पी लगभग वाचन देता है (प्रश्न 7–8), और किसी बच्चे में नए उत्परिवर्तनों की संख्या (प्रश्न 12)।
हल
हल — समस्या 4.1.
1. वाचन; । 2. : प्रभावी रूप से कोई क्षार अनाच्छादित नहीं। 3. ; कॉन्टिग : सिद्धांततः एक कॉन्टिग, अंतराल केवल पुनरावृत्तियों पर। 4. ; अनाच्छादित , लगभग ; कॉन्टिग । 5. सातों प्रकार्यगुच्छ एक जैसे वाचन देते हैं और एक ही कॉन्टिग में ढह जाते हैं, जिसमें सात अनन्य बाएँ पार्श्व घुसते हैं और सात दाएँ पार्श्व निकलते हैं और उनका युग्मन अज्ञात रहता है: कॉन्टिग-सिरे, सात अंतराल। 6. लगभग जीन; कूटलेखी bp, माध्य जीन । 7. । 8. प्रति युग्मविकल्पी लगभग वाचन। 9. किसी दिए हुए गलत क्षार को दिखाते वाचन — तीन या अधिक की संभावना लगभग है — और का वाचन है; कोई त्रुटि दोनों में से कोई परीक्षण पार नहीं करती, जबकि कोई असली विषमयुग्मजी युग्मविकल्पी में प्रत्याशित है। 10. विषमयुग्मजी स्थल; कूटलेखी अनुक्रम में । 11. किसी Alu से आया वाचन करोड़ प्रतियों में से अनेक से लगभग बराबर अच्छा मेल खाता है, इसलिए वह गलत प्रति पर रख दिया जाता है या उसे कम संरेखण-विश्वास मिलता है। तब प्रतियों के बीच के अंतर विषमयुग्मजी प्रकारांतरों जैसे दिखते हैं, और असली प्रकारांतर उनके बीच छिप जाते हैं: Alu के भीतर के प्रकारांतर-निर्धारण प्रायः छान दिए जाते हैं, और ये अवयव छोटे-वाचन अनुक्रमण के अंधे क्षेत्र हैं। 12. नए उत्परिवर्तन। बच्चे में लगभग वाचनों को प्रकारांतर दिखाना चाहिए; पर यदि किसी जनक का स्थल केवल पाँच वाचनों से ढका हो तो कोई विषमयुग्मजी युग्मविकल्पी प्रायिकता से छूट जाता है और कोई वंशागत प्रकारांतर नया मान लिया जाता है — इसलिए जनकों का अनुक्रमण बच्चे जितना ही गहरा होना चाहिए। 13. वाचन, जीनोम से बीस गुना कम: अनुक्रमण की लागत बीस गुना गिरती है, जो पकड़ने के चरण की लागत से अधिक है। 14. bp, यानी जीनोम का लगभग ; वाचनों का , कोई । 15. bp; । 16. प्रतिस्थापन, प्रति वंशक्रम ; दर प्रति क्षार प्रति वर्ष, 25 वर्ष की प्रति पीढ़ी — वंशावली-दर से लगभग दोगुना, एक ज्ञात विसंगति जो अतीत में लंबे पीढ़ी-काल या अधिक पुराने विभाजन की ओर इशारा करती है। 17. की चार प्रतियाँ होतीं; बचे हैं, इसलिए अतिरिक्त प्रतियों में से केवल बची हैं: द्विगुणों का खो गया। 18. कृमि और मनुष्य में जीनों की संख्या समान है; जटिलता इसमें है कि उनका उपयोग कैसे होता है — वैकल्पिक विच्छेदन एक जीन को हज़ारों प्रोटीनों में गुणा कर देता है (Dscam के लिए ), नियमन अनुलेखन-कारकों और संवर्धकों को कोशिका-प्रकार-विशिष्ट ढंग से जोड़ता है, अकूटलेखी RNA परतें जोड़ते हैं, और प्रोटीन जालों में अन्योन्यक्रिया करते हैं। 19. नियामक अवयव (संवर्धक, प्रवर्तक, विद्युतरोधक), अकूटलेखी RNA जीन, विच्छेदन तथा स्थानिकीकरण संकेत, उद्गम और संरचनात्मक अनुक्रम। किसी संभावित संवर्धक का परीक्षण उसे किसी पारजीनी भ्रूण में किसी प्रतिवेदक जीन के आगे रखकर और यह देखकर कीजिए कि प्रतिवेदक कहाँ अभिव्यक्त होता है, फिर उस अवयव को जीनोम में CRISPR से विलोपित करके पड़ोसी जीनों को मापिए। 20. ; पर मिथ्या धनात्मक प्रत्याशित। 21. अवाहक संभावना ; एक प्रति संभावना , जोखिम ; दो प्रतियाँ संभावना , जोखिम । 22. अंक युग्मविकल्पियों पर यह जोड़ता है कि कोई व्यक्ति कितनी जोखिम-प्रतियाँ ढोता है, हर युग्मविकल्पी के लघुगणकीय संभावना-अनुपात से भारित। गणना का माध्य है और मानक विचलन ; ऊपरी औसत से लगभग युग्मविकल्पी अधिक ढोता है, और : औसत व्यक्ति की संभावना से लगभग तीन गुना, उन युग्मविकल्पियों से जो अकेले जोखिम बदलते हैं। 23. दसियों किलोक्षार के किसी खंड के भीतर के युग्मविकल्पी साथ वंशागत होते हैं (सहलग्नता असंतुलन), इसलिए उनमें से कोई भी वही सहचर्य दिखाता है; जिस SNP का जीन-प्ररूपण हुआ वह बस वही है जो पट्टिका पर था। कारक प्रकारांतर ढूँढ़ने के लिए: रोगियों और नियंत्रणों में उस क्षेत्र का अनुक्रमण कीजिए, समुच्चय को सांख्यिकीय रूप से सँकरा कीजिए, फिर हर संभावित प्रकारांतर का परीक्षण कीजिए — हर युग्मविकल्पी की संवर्धक क्रियाशीलता के लिए प्रतिवेदक परीक्षण, कोशिकाओं में हर युग्मविकल्पी का संपादन करके पास के जीनों की अभिव्यक्ति मापना, अभिव्यक्ति-मात्रात्मक-लक्षण संकेतों के साथ सह-स्थानिकीकरण। 24. जीनोम का पढ़ा जाता है। वह अतीत के किसी ज्ञात काल पर किसी समष्टि का सीधा प्रतिदर्श देता है — बाद के प्रवसनों और मिश्रण से पहले की युग्मविकल्पी बारंबारताएँ, नियंडरथाल खंडों की लंबाई (लंबी, क्योंकि पुनर्संयोजन की थोड़ी ही पीढ़ियों ने उन्हें तोड़ा था) और इससे मिश्रण की तिथि — जिसका अनुमान आधुनिक जीनोम केवल प्रतिरूपों से लगा सकते हैं। 25. प्रायोगिक चरण में लगभग कॉन्टिग; प्रति अगुणित जीनोम , प्रति युग्मविकल्पी लगभग वाचन; किसी बच्चे में कोई नए उत्परिवर्तन।