किसी ऐसे बल की शक्ति, जो वेग से चलते किसी बिंदु पर लग रहा हो, है
और समय तथा के बीच (स्थितियाँ और ) उसका कार्य संचित शक्ति है,
जो अल्प कार्यों का योग है, जिन्हें गतिपथ के अल्प विस्थापनों के अनुदिश जोड़ा जाता है। कार्य धनात्मक है यदि बल गति की दिशा में धकेले (प्रेरक), ऋणात्मक यदि उसके विरुद्ध हो (प्रतिरोधी), और शून्य यदि वह लंब हो।
उदाहरण
उदाहरण 13.10 (पाश का चाल-नियम)
समस्या 11.1 के घर्षणहीन पाश पर पटरी की प्रतिक्रिया गति पर अभिलंब है और कोई कार्य नहीं करती: अतः संरक्षित है। तल से ऊपर लेने पर : वहाँ प्रयुक्त चाल-नियम अब एक ही पंक्ति में व्युत्पन्न हो गया। न्यूनतम प्रवेश-चाल इसके बाद उदाहरण 12.16 की शिखर-शर्त से निकल आती है।