किसी अंतराल पर परिभाषित फलन पर उत्तल है यदि उसके आलेख की हर जीवा आलेख के ऊपर पड़े: अर्थात् सभी और के लिए
वह अवतल है यदि उल्टी असमिका सही हो ( उत्तल)।
उदाहरण
उदाहरण 22.14
के लिए : पर अवतल और पर उत्तल है, और मूल बिंदु पर उसका नति-परिवर्तन बिंदु है, जहाँ वक्र अपनी स्पर्श रेखा (-अक्ष) को पार कर जाता है।
उदाहरण 22.15 (उत्तलता से असमिकाएँ)
चरघातांकी फलन पर उत्तल है (उसका द्वितीय अवकलज वही स्वयं है, जो धनात्मक है)। पर उसकी स्पर्श रेखा है, इसलिए
ऐसी स्पर्श-रेखा असमिकाएँ उत्तलता की मानक उपज हैं।