बिजली की चमक और गरज के बीच के सेकंड गिनिए और तीन से भाग दीजिए: वही किलोमीटरों में दूरी है। ध्वनि हवा को एक तिहाई किलोमीटर प्रति सेकंड से पार करती है, पानी को डेढ़ किलोमीटर से, और कोई पराश्रव्य स्कैनर शरीर के भीतर से आती प्रतिध्वनियों का समय दस लाखवें सेकंड तक नापकर अपना चित्र खींचता है। यह अध्याय अध्याय 3 और 2 की तरल-यांत्रिकी को विराम में पड़े उस तरल पर लगाता है जिसे कोई छोटी दाब-लहर विक्षुब्ध करती है, और वहाँ दालांबेर समीकरण फिर मिलता है: ध्वनि की चाल, ऊर्जा कौन ले जाता है, तेज़ कितना तेज़ है, ध्वनि आकाश में कैसे फैलती है, और गुज़रता सायरन अपना स्वर क्यों बदल देता है।
7.1 ध्वानिक सन्निकटन
परिभाषा 7.1(ध्वानिक विक्षोभ)
एकसमान दाब P0 और घनत्व ρ0 का कोई तरल विराम में है और विक्षुब्ध किया जाता है: P=P0+p(M,t), ρ=ρ0+ρ1(M,t), वेग v(M,t)। ध्वानिक सन्निकटन छोटी राशियों p (अधिदाब, या ध्वानिक दाब), ρ1 और v में केवल पहली कोटि रखता है: ∣p∣≪P0, ∣ρ1∣≪ρ0, v≪c, और हर तरल कण जो रूपांतरण भोगता है वह इतना तेज़ होता है कि वह कोई ऊष्मा नहीं बदलता: वह समएन्ट्रॉपी है, जिसकी संपीड्यता χS=ρ1(∂P∂ρ)S है। गुरुत्व छोड़ दिया गया है।
प्रमेय 7.2(ध्वनि-तरंगें)
पहली कोटि तक ऑयलर समीकरण, द्रव्यमान-संरक्षण और समएन्ट्रॉपी नियम ये पढ़े जाते हैं:
(ρ1 और v के लिए भी वही)। आदर्श गैस के लिए χS=1/γP0 और
c=ρ0γP0=MγRT:
20∘C पर हवा में 343m/s, और प्रति केल्विन 0.6m/s बढ़ता हुआ; हीलियम में 1000m/s; पानी में 1480m/s (χS=4.5×10−10Pa−1)।
उपपत्ति. ऑयलर: संवहनी पद ρ(v⋅grad)v दूसरी कोटि का है, ρ∂tv≈ρ0∂tv, और gradP=gradp। द्रव्यमान: ∂tρ+div(ρv)≈∂tρ1+ρ0divv। समएन्ट्रॉपी नियम: पहली कोटि तक dρ=ρχSdP। पहले समीकरण का अपसरण और दूसरे का समय-अवकलज लीजिए: ρ0∂tdivv=−Δp=−∂t2ρ1=−ρ0χS∂t2p। आदर्श गैस के लिए, समएन्ट्रॉपी रूपांतरण में PVγ अचर होने से dρ/ρ=dP/γP मिलता है, अतः χS=1/γP, और P0/ρ0=RT/M। ∎
टिप्पणी 7.3(समएन्ट्रॉपी क्यों)
न्यूटन ने ध्वनि की चाल समतापी संपीड्यता से निकाली थी, P0/ρ0=290m/s, जो 15% कम है; लाप्लास ने देखा कि संपीडन इतने तेज़ हैं कि गरम शिखरों और ठंडी घाटियों के बीच ऊष्मा बह ही नहीं सकती — एक आवर्तकाल में ऊष्मा कुछ माइक्रोमीटर विसरित होती है (अध्याय 25), जो तरंगदैर्घ्य के सामने कुछ नहीं — अतः रूपांतरण रुद्धोष्म और उत्क्रमणीय है, और γ आ जाता है। इस तरह ध्वनि की चालγ का सीधा मापन है: हवा के लिए 1.40, आर्गन के लिए 1.67।
बाएँ: तरल की कोई परत, जो ξ(x,t) से विस्थापित है और अपने फलकों पर के दाबों से धकेली जाती है; उसका संपीडन ही अधिदाब तय करता है। दाएँ: कोई समतल ध्वनि-तरंग — संपीडन और विरलन के एकांतर प्रदेश, जो c से चलते हैं, और तरल स्वयं संचरण की दिशा के अनुदिश आगे-पीछे दोलन करता हुआ (अर्थात् कोई अनुदैर्घ्य तरंग)।
7.2 समतल तरंगें, प्रतिबाधा, तीव्रता
प्रतिज्ञप्ति 7.4(समतल प्रगामी ध्वनि-तरंग)
किसी समतल तरंग p=f(x−ct) के लिए, जो +x की ओर चलती है, तरल का वेग x के अनुदिश और अधिदाब के साथ कला में होता है, तथा
p=Zv,Z=ρ0c=ρ0/χS,
जहाँ Z माध्यम की ध्वानिक प्रतिबाधा है (kgm−2s−1): हवा के लिए 410kgm−2s−1, पानी के लिए 1.5×106kgm−2s−1, कोमल ऊतक के लिए ∼1.6×106kgm−2s−1, और इस्पात के लिए 4×107kgm−2s−1। तरंग यह ऊर्जा घनत्व और यह तीव्रता (+x की ओर प्रति एकांक क्षेत्रफल शक्ति) ले जाती है:
e=21ρ0v2+21χSp2,I=pv,
जो ∂te+∂xI=0 का पालन करते हैं; और प्रगामी तरंग के लिए e के दोनों आधे बराबर होते हैं तथा I=p2/Z=Zv2। pm दाब-आयाम की किसी ज्यावक्रीय तरंग की माध्य तीव्रता ⟨I⟩=pm2/2Z होती है।
उपपत्ति.p=f(x−ct) के लिए, ρ0∂tv=−∂xp=f′/c⋅c…: ठीक-ठीक, ρ0∂tv=−f′(x−ct), और v=f(x−ct)/ρ0c इसे संतुष्ट करता है। e का स्थितिज पद तरल को संपीडित करने में संचित कार्य है (एकांक आयतन के किसी समएन्ट्रॉपी संपीडन में dV/V=−χSdp से ∫pχSdp=21χSp2 संचित होता है); और I प्रति एकांक क्षेत्रफल वह दर है जिससे दाब-बल pS आगे के तरल पर, जो v से चलता है, कार्य करता है। संतुलन: ∂te=ρ0v∂tv+χSp∂tp=−v∂xp−p∂xv=−∂x(pv), दोनों रैखिकीकृत समीकरणों से। ∎
परिभाषा 7.5(ध्वनि-स्तर)
I माध्य तीव्रता की किसी तरंग का ध्वनि-स्तर
L=10log10I0IdB,I0=1×10−12W/m2
है — यहाँ 1kHz पर श्रवण की देहली, जो हवा में दाब-आयाम p0≈2×10−5Pa (वर्ग-माध्य-मूल) =2×10−10 वायुमंडल से मेल खाती है। तीव्रता दुगुनी करने पर 3dB जुड़ते हैं; दस गुना पर 10dB; और दाब-आयाम सौ गुना करने पर 40dB। शांत कमरा 30dB, बातचीत 60dB, व्यस्त सड़क 80dB, रॉक-संगीत 110dB, पीड़ा 120dB (I=1W/m2, pm=29Pa)।
उदाहरण 7.6(ध्वनि कितनी छोटी होती है)
देहली पर, 1kHz: pm=2.8×10−5Pa, vm=pm/Z=7×10−8m/s, और विस्थापन-आयाम ξm=vm/ω=1×10−11m — अर्थात् किसी परमाणु के व्यास का दसवाँ भाग: कर्ण-पटल परमाणु से छोटी गतियाँ भाँप लेता है। 120dB पर ξm=11µm, जो तब भी अदृश्य है, और pm/P0=3×10−4: अर्थात् सबसे तेज़ ध्वनियाँ भी नन्हे विक्षोभ हैं, और इसीलिए रैखिक सिद्धांत इतना अच्छा चलता है।
बाएँ: किसी समतल प्रगामी ध्वनि-तरंग में अधिदाब और तरल-वेग एक ही कला में होते हैं, और विस्थापन एक चौथाई आवर्तकाल पीछे रहता है। दाएँ: डेसिबल मापनी — हर 20dB का सोपान तीव्रता को सौ गुना और दाब-आयाम को दस गुना कर देता है।
7.3 गोलीय तरंगें
प्रतिज्ञप्ति 7.7(गोलीय तरंगें और व्युत्क्रम-वर्ग नियम)
हर दिशा में बराबर विकिरण करता कोई छोटा स्रोत यह गोलीय तरंग बनाता है:
p(r,t)=rAf(t−cr),
जिसका आयाम 1/r की तरह और तीव्रता 1/r2 की तरह गिरती है: P ध्वानिक शक्ति के स्रोत के लिए I=P/4πr2, अर्थात् दूरी दुगुनी होने पर हर बार −6dB। स्रोत से दूर तरंग स्थानिक रूप से समतल होती है, और v=p/Z त्रिज्यीय।
उपपत्ति. गोलीय निर्देशांकों में, केवल r के फलन के लिए, Δp=r1∂r2∂2(rp) (स्वीकृत; अध्याय 11), अतः u=rp एक-विमीय तरंग-समीकरण∂r2u=∂t2u/c2 का पालन करता है, जिससे बाहर जाती तरंग के लिए u=Af(t−r/c) मिलता है। r त्रिज्या के गोले को पार करती शक्ति 4πr2I है, जो कुछ अवशोषित न हो तो अचर रहती है। ∎
उदाहरण 7.8(एक सायरन, एक बातचीत)
10W का सायरन: I=10/4πr2, अर्थात् 1m पर 0.8W/m2 (119dB, पीड़ा), 100m पर 79dB, 1km पर 59dB — जो शहर भर में सुनाई देता है। कोई आवाज़ लगभग 10µW विकिरित करती है: 1m पर 60dB, और 10m पर 40dB। हवा ध्वनि सोखती भी है (ऊँची आवृत्ति पर अधिक, 10kHz पर प्रति सौ मीटर कुछ डेसिबल), और इसीलिए दूर की गरज नीची गड़गड़ाहट में सुनाई देती है।
7.4 डॉप्लर प्रभाव
प्रमेय 7.9(डॉप्लर प्रभाव)
कोई स्रोत आवृत्ति f पर उत्सर्जन करता है और उस रेखा के अनुदिश vs चाल से चलता है जो उसे किसी प्रेक्षक से जोड़ती है, और प्रेक्षक vo से चलता है; दोनों चालें तब धनात्मक गिनी जाती हैं जब वे पास आ रहे हों; और ध्वनि विराम में पड़ी हवा में c से चलती है। प्रेक्षक यह आवृत्ति पाता है:
f′=fc−vsc+vo.
चलता स्रोत अपने आगे के तरंगाग्र सिकोड़ देता है (λ′=(c−vs)/f) और पीछे वालों को फैला देता है; और चलता प्रेक्षक तरंगाग्रों से (c+vo)/λ दर से मिलता है। vs,vo≪c के लिए दोनों Δf/f≈(vs+vo)/c देते हैं।
उपपत्ति. चलता स्रोत: t और t+1/f पर उत्सर्जित तरंगाग्र गति की दिशा में c/f−vs/f से अलग होते हैं, अतः आगे की तरंगदैर्घ्य λ′=(c−vs)/f है और किसी स्थिर प्रेक्षक को मिलती आवृत्ति c/λ′। चलता प्रेक्षक: तरंगदैर्घ्य λ=c/f है पर अग्र सापेक्ष चाल c+vo से गुज़रते हैं। अब दोनों जोड़िए। ∎
बाएँ: चलते स्रोत के तरंगाग्र आगे सिमट जाते हैं और पीछे फैल जाते हैं — अर्थात् पास आते हुए ऊँचा स्वर, दूर जाते हुए नीचा। दाएँ: ध्वनि से तेज़ चलता स्रोत अपने तरंगाग्र पीछे छोड़ देता है; उनका आवरण मैक शंकु है, जो ज़मीन पर विस्फोट की तरह सुनाई देता है।
उदाहरण 7.10(सायरन, रडार बंदूक, लाल कोशिकाएँ)
25m/s से गुज़रती किसी ऐंबुलेंस का 700Hz सायरन: पास आते हुए 755Hz, दूर जाते हुए 651Hz — अर्थात् अष्टक के छठे भाग की गिरावट, वही जानी-पहचानी “नी-नॉ” ढलान। कोई पुलिस-रडार बंदूक किसी कार से परावर्तित 24GHz की रेडियो-तरंग पर वही प्रभाव नापती है (तरंग दो बार विस्थापित होती है, कार के पाने और फिर उत्सर्जित करने से): 30m/s पर Δf=2fv/c=4.8kHz। किसी धमनी पर ताकती 5MHz की पराश्रव्य जाँच रक्त-कोशिकाओं को 60∘ पर 0.5m/s के लिए Δf=2fvcosθ/c≈1.6kHz पर सुनती है: अर्थात् एक श्रव्य सीटी, जिसका स्वर ही रक्त की चाल है। और दूर जाती किसी आकाशगंगा की वर्णक्रम-रेखाएँ Δλ/λ=v/c से लाल की ओर खिसकती हैं — यही सूत्र कम चाल पर प्रकाश के लिए भी चलता है, और उससे आगे आपेक्षिकता का सुधार लगता है।
टिप्पणी 7.11(पराध्वनिक)
vs>c पर सूत्र टूट जाता है (आगे f′<0): अर्थात् कोई ध्वनि स्रोत से पहले नहीं पहुँचती। पथ के अनुदिश उत्सर्जित तरंगाग्रों का शंक्वाकार आवरण होता है, जिसका अर्ध-कोण θ है और sinθ=c/vs (मैक शंकु); और शंकु द्वारा ढोई गई दाब-उछाल ही ध्वनि-विस्फोट है, जो ज़मीन पर खड़े श्रोता तक वायुयान के गुज़र जाने के बाद ही पहुँचती है — मैक 2 पर और 10km ऊँचाई पर θ=30∘ होता है और विस्फोट सिर के ऊपर से गुज़रने के 10km/tanθ/vs≈25s बाद आता है। गोली की तड़ाक और चाबुक की नोक वही शंकु हैं।
विधि 7.12(ध्वानिकी में परिमाण की कोटियाँ)
कोई ध्वनि-स्तरL दिया हो तो: I=I010L/10; फिर pm=2ZI, vm=pm/Z, ξm=vm/ω; और किसी स्रोत की शक्ति 4πr2I है, यदि वह हर दिशा में विकिरण करता हो (किसी कड़े फ़र्श पर आधी, जो अर्ध-आकाश में परावर्तित कर देता है)। r1 से r2 जाने पर L20log10(r1/r2) से बदलता है। n असंबद्ध बराबर स्रोत जोड़ने पर 10log10n जुड़ता है; और किसी बिंदु पर कला में दो संबद्ध स्रोत 6dB जोड़ते हैं।
7.5 अभ्यास
अभ्यास 7.1★
हवा (γ=1.40, M=29g/mol) में 0∘C, 20∘C और −50∘C (10km ऊँचाई) पर ध्वनि की चाल; और 20∘C पर हीलियम (γ=1.67, M=4g/mol) तथा कार्बन डाइऑक्साइड (γ=1.30, M=44g/mol) में। हीलियम साँस में लेने के बाद आवाज़ ऊँची क्यों लगती है?
हल
हल — अभ्यास 7.1.
c=γRT/M: 331m/s, 343m/s, 299m/s; हीलियम 1010m/s; CO2268m/s। स्वर-रज्जु उसी आवृत्ति पर कंपते हैं, पर स्वर-नाल के अनुनाद (जो स्वर-गुण गढ़ते हैं) c के साथ बदलते हैं और तीन गुना ऊपर चले जाते हैं: अतः आवाज़ ऊँची लगती है।
अभ्यास 7.2★
60dB, 500Hz की कोई बातचीत: हवा (Z=410kgm−2s−1) में तीव्रता, दाब-आयाम, वेग-आयाम और विस्थापन-आयाम। वही 120dB के लिए। एक साथ बोलते दो लोगों का स्तर; और सौ लोगों का।
कोई ध्वनिविस्तारक हर दिशा में बराबर 1.0W ध्वनि विकिरित करता है। 1m, 10m, 100m पर तीव्रता और स्तर; वह दूरी जिस पर स्तर गिरकर 60dB हो जाता है; और 30m पर 100dB के लिए आवश्यक शक्ति (कोई खुला संगीत-समारोह)।
हल
हल — अभ्यास 7.3.
I=1/4πr2: 0.080W/m2 (109dB), 89dB, 69dB; और I=10−6r=1/4π10−6=280m पर; 30m पर 100dB के लिए 4π×900×10−2=110W ध्वनि चाहिए।
अभ्यास 7.4★
चमक के 4.5s बाद गरज सुनाई देती है: दूरी। किसी जहाज़ का भोंपू 3.0s बाद किसी चट्टान से प्रतिध्वनित होता है: दूरी। सोनार: समुद्र-तल से प्रतिध्वनि 2.4s बाद लौटती है (c=1500m/s): गहराई। कोई 5MHz पराश्रव्य प्रतिध्वनि ऊतक (1540m/s) में 130µs बाद लौटती है: गहराई।
500Hz का कोई रेल-भोंपू; c=340m/s। (क) प्लैटफ़ॉर्म पर खड़े व्यक्ति को सुनाई देती आवृत्ति, जब गाड़ी 40m/s से पास आ रही हो, और जब वह गुज़र चुकी हो। (ख) व्यक्ति किसी गाड़ी में है जो 40m/s से भोंपू की ओर चल रही है और भोंपू विराम में है; फिर दोनों 40m/s से एक-दूसरे की ओर: इनकी तुलना 80m/s की सापेक्ष चाल और एक पिंड के विराम में होने से कीजिए। (ग) भोंपू वाली गाड़ी के चालक को आगे की किसी दीवार से लौटती प्रतिध्वनि की कौन-सी आवृत्ति सुनाई देती है।
हल
हल — अभ्यास 7.5.
(क) 500×340/300=567Hz; 500×340/380=447Hz। (ख) 500×380/340=559Hz; दोनों: 500×380/300=633Hz, जबकि 654Hz (अकेला स्रोत 80m/s पर) या 618Hz (अकेला प्रेक्षक): अर्थात् परिणाम हवा तय करती है, सापेक्ष चाल नहीं। (ग) दीवार 567Hz पाती है और उसे विराम में फिर उत्सर्जित करती है; और चालक 40m/s से पास आता है: 567×380/340=633Hz।
अभ्यास 7.6★★
1kHz पर 1.0Pa के दाब-आयाम के लिए, हवा में, पानी (Z=1.5×106kgm−2s−1) में और इस्पात (4×107kgm−2s−1) में वेग- तथा विस्थापन-आयाम, तीव्रता और स्तर निकालिए। वही दाब, पर बहुत भिन्न तीव्रताएँ: टिप्पणी दीजिए। (पानी के भीतर के स्तर 1µPa के सापेक्ष दिए जाते हैं: उस मापनी पर 1Pa कितना है?)
हल
हल — अभ्यास 7.6.
vm=pm/Z: 2.4mm/s, 0.67µm/s, 25nm/s; ξm=vm/ω: 390nm, 0.11nm, 4pm; I=pm2/2Z: 1.2×10−3W/m2 (91dB), 3.3×10−7W/m2 (55dB), 1.3×10−8W/m2 (41dB)। कोई कड़ा माध्यम दिए गए दाब पर मुश्किल से हिलता है और थोड़ी ही शक्ति ले जाता है। 1µPa के सापेक्ष 1Pa120dB है।
अभ्यास 7.7★★
(क) न्यूटन की समतापी चाल P0/ρ0, 20∘C पर हवा के लिए (ρ0=1.20kg/m3), और लाप्लास का सुधार। (ख) नापी गई चालें: 20∘C पर हवा में 343m/s, आर्गन (M=40g/mol) में 323m/s: हर एक के लिए γ निकालिए; और स्वातंत्र्य-कोटियों की संख्या से उसका अर्थ बताइए। (ग) 1kHz पर एक आवर्तकाल में ऊष्मा कितनी दूर विसरित होती है, यह आँकिए (हवा की ऊष्मीय विसरणशीलता 2×10−5m2/s) और तरंगदैर्घ्य से तुलना कीजिए।
हल
हल — अभ्यास 7.7.
(क) 1.013×105/1.2=290m/s; ×1.4: 343m/s। (ख) γ=c2M/RT: हवा के लिए 1.40, आर्गन के लिए 1.71 (5/3, अंक-सन्निकटन के भीतर): अर्थात् तीन स्थानांतरी स्वातंत्र्य-कोटियाँ (γ=1+2/3) बनाम द्विपरमाणुक गैस की पाँच (1+2/5)। (ग) D/f=2×10−8=0.14mm≪λ=34cm: अतः शिखरों और घाटियों के बीच कोई ऊष्मा नहीं बहती।
अभ्यास 7.8★★
ऑर्गन-नलियाँ। किसी नली में अधिदाब खुले सिरे पर शून्य होता है और वेग बंद सिरे पर। (क) दोनों सिरों पर खुली नली में अप्रगामी तरंगें: दिखाइए कि विधाएँ fn=nc/2L हैं; और एक सिरे पर बंद नली में fn=(2n−1)c/4L। (ख) हर दशा में 440Hz की मूल विधा के लिए लंबाइयाँ। (ग) हर नली में कौन-से संनादी होते हैं? (घ) वास्तविक खुला सिरा नली से लगभग 0.6 त्रिज्या आगे बैठता है (सिरा-संशोधन): किसी 4cm की नली के लिए L पर और f पर संशोधन।
हल
हल — अभ्यास 7.8.
(क) खुली–खुली: p=pmsinkxcosωt, जहाँ kL=nπ; बंद–खुली: p=pmcoskxcosωt (बंद सिरे पर वेग का निस्पंद, दाब का प्रस्पंद), जहाँ kL=(2n−1)π/2। (ख) L=c/2f=39cm; c/4f=19.5cm। (ग) सभी संनादी; और केवल विषम संनादी (शहनाई-जैसी खोखली ध्वनि)। (घ) प्रति खुले सिरे 0.6×2=1.2cm: Lप्रभावी=41.4cm, f=414Hz, अर्थात् 6% मंद — नली को 36.6cm पर काटना पड़ेगा।
अभ्यास 7.9★★
2.0kW का कोई वैद्युत सायरन अपनी शक्ति का 20% ध्वनि में बदल देता है, जो अर्ध-आकाश में विकिरित होती है (वह छत पर रखा है)। (क) 100m पर तीव्रता, स्तर और दाब-आयाम। (ख) पीड़ा-देहली (120dB) की दूरी; और 70dB की उस रेखा की, जहाँ वह चेताना बंद कर देता है। (ग) उसकी आवृत्ति पर वायु-अवशोषण प्रति 100m1dB जोड़ता है: अब 70dB की रेखा की दूरी (संख्यात्मक रूप से हल कीजिए)। (घ) 10km त्रिज्या के किसी शहर को ढकने के लिए ऐसे कितने सायरन चाहिए?
हल
हल — अभ्यास 7.9.
P=400W, I=P/2πr2। (क) 6.4×10−3W/m2, 98dB, pm=2.3Pa। (ख) r=400/2π=8m; और 2.5km पर 70dB। (ग) 98−20log(r/100)−(r−100)/100=70: r≈950m। (घ) π(10)2/π(0.95)2≈110 सायरन।
अभ्यास 7.10★★★
अप्रगामी ध्वनि-तरंग की ऊर्जा।L लंबाई की किसी बंद नलिका में अधिदाबp=pmcos(kx)cos(ωt) है, k=nπ/L। (क) रैखिकीकृत ऑयलर समीकरण से v(x,t) निकालिए। (ख) गतिज और स्थितिज ऊर्जा-घनत्व; दिखाइए कि वे समय में समपाद-अंतर पर दोलन करते हैं और आकाश में एक चौथाई तरंगदैर्घ्य से खिसके होते हैं। (ग) नलिका में कुल ऊर्जा (काट S); जाँचिए कि वह अचर है। (घ) माध्य तीव्रता: हर जगह शून्य — और फिर भी ऊर्जा चलती है: बताइए कैसे।
हल
हल — अभ्यास 7.10.
(क) ρ0∂tv=pmksinkxcosωt: अतः v=(pm/Z)sinkxsinωt। (ख) ek=21χSpm2sin2kxsin2ωt, ep=21χSpm2cos2kxcos2ωt: अर्थात् एक तब अधिकतम होता है जब दूसरा लुप्त हो, समय में भी और आकाश में भी। (ग) E=S∫0L(ek+ep)dx=41χSpm2SL, अचर। (घ) I=pv=(pm2/4Z)sin2kxsin2ωt: माध्य शून्य, पर हर आवर्तकाल में दो बार ऊर्जा दाब-प्रस्पंदों से वेग-प्रस्पंदों तक और वापस बहती है।
अभ्यास 7.11★★★
ध्वनि-विस्फोट। कोई वायुयान क्षैतिज दिशा में v=1.6c से उड़ता है, ऊँचाई h=12km पर, जहाँ c=300m/s है। (क) गोलीय तरंगाग्रों के आवरण से मैक कोण निकालिए। (ख) सिर के ऊपर से गुज़रने और ज़मीन पर विस्फोट के बीच का समय (ऊँचाई के साथ c का बदलना छोड़ दीजिए)। (ग) वायुयान के गुज़रते समय ज़मीन पर उस पट्टी की चौड़ाई जो विस्फोट सुनती है, यदि शंकु का निशान पथ के ±30km के भीतर सुनाई देता हो: थल के ऊपर पराध्वनिक उड़ान पर रोक क्यों है? (घ) 800m/s की कोई राइफ़ल-गोली: मैक कोण; और प्रक्षेप-पथ से 10m दूर खड़े प्रेक्षक को क्या, और किस क्रम में, सुनाई देता है।
हल
हल — अभ्यास 7.11.
(क) t=0 पर उत्सर्जित अग्र की त्रिज्या ct होती है जब स्रोत vt दूर होता है: अतः स्पर्श-शंकु के लिए sinθ=c/v। (ख) θ=39∘; और शंकु वायुयान के नीचे ज़मीन तक तब पहुँचता है जब वह h/tanθ=15km आगे जा चुका हो: अर्थात् सिर के ऊपर से गुज़रने के 15000/480=31s बाद। (ग) पूरे मार्ग के अनुदिश 60km चौड़ी पट्टी विस्फोट सुनती है। (घ) sinθ=340/800, θ=25∘; पहले शंकु की तड़ाक आती है, और नाल का धमाका, जो बंदूक से c पर चलता है, बाद में।
अभ्यास 7.12★★★
डॉप्लर पराश्रव्य। कोई जाँच f=5.0MHz पर ऊतक (c=1540m/s) में उत्सर्जन करती है; और लाल कोशिकाएँ किसी वाहिका के अनुदिश v से चलती हैं, जो किरण-पुंज से θ कोण बनाती है। (क) किसी कोशिका को मिलती आवृत्ति (चलता प्रेक्षक)। (ख) वह इसी आवृत्ति को चलते स्रोत की तरह फिर उत्सर्जित (प्रकीर्ण) करती है: जाँच पर लौटती आवृत्ति; दिखाइए कि Δf=2fvcosθ/c, जब v≪c। (ग) Δf, v=0.50m/s, θ=60∘ के लिए; और θ=90∘ के लिए — तब चलाने वाला क्या करता है? (घ) जाँच 50Hz तक विभेद कर सकती है: वेग का विभेदन। डॉप्लर संकेत केवल दिखाने के बदले सुनाया क्यों जाता है?
हल
हल — अभ्यास 7.12.
(क) f1=f(c+vcosθ)/c। (ख) f2=f1c/(c−vcosθ)=f(c+vcosθ)/(c−vcosθ)≈f(1+2vcosθ/c)। (ग) 2×5×106×0.5×0.5/1540=1.6kHz; और 90∘ पर शून्य: अतः जाँच को तिरछा कीजिए। (घ) Δv=50×1540/(2×5×106×0.5)=1.5cm/s। कान स्वर और स्वर-गुण दोनों का तत्काल पीछा करता है: चिकनी सीटी स्तरीय प्रवाह बताती है, और फुफकार किसी संकरे स्थान के पीछे का विक्षोभ।
कोई पराश्रव्य स्कैनर: कुछ मेगाहर्ट्ज़ की ध्वनि, समयबद्ध प्रतिध्वनियाँ और ऊतकों के बीच प्रतिबाधा का बेमेल मिलकर चित्र खींचते हैं; और जेल हवा की वह झिल्ली हटा देता है जो सब कुछ परावर्तित कर देती।
7.6 समस्या: गरज से प्रतिध्वनि-लेखी तक
समस्या 7.1
सप्ताहांत समस्या — खुली हवा में, किसी संगीत-भवन में, शरीर के भीतर और गुज़रते सायरन से ध्वनि
हवा: γ=1.40, M=29g/mol, और 15∘C पर Z=410kgm−2s−1; R=8.31J/(molK)।
भाग I — तूफ़ान।
15∘C और 30∘C पर ध्वनि की चाल; “प्रति किलोमीटर तीन सेकंड” के नियम को उचित ठहराइए।
चमक के 4.0s बाद गरज आती है: गिरने की जगह की दूरी। चमक क्षणिक होने पर भी गरज कई सेकंड चलती है: क्यों?
गिरने की जगह के पास स्तर 120dB तक पहुँचता है: हवा का दाब-आयाम और वेग-आयाम।
120dB पर 2s की किसी गरज में दीवार के प्रति वर्ग मीटर पर मिली ऊर्जा।
किसी साफ़ रात में ज़मीन ठंडी होती है और नीचे की हवा ऊपर की हवा से ठंडी। ध्वनि-किरणें परतों के बीच स्नेल के नियम का पालन करती हैं, sini/c=अचर: ऊपर की ओर छोड़ी गई किरणें नीचे मुड़ती हैं या ऊपर? रात में और पानी के ऊपर दूर की ध्वनियाँ इतनी अच्छी क्यों सुनाई देती हैं?
दिन में उल्टा: 3km दूर का श्रोता कुछ नहीं सुनता। यदि c प्रति 500m ऊँचाई पर 1% गिरे तो 3km के बाद किसी क्षैतिज किरण के मुड़ने का कोण आँकिए (मुड़ना एकसमान मानिए: किरण एक वृत्त है)।
हवा ऊँची आवृत्तियाँ नीची से कहीं अधिक सोखती है: दूर की गरज गड़गड़ाती और पास की चटकती क्यों है?
भाग II — संगीत-समारोह। कोई ध्वनिविस्तारक 100W वैद्युत शक्ति पाता है और उसका 2% ध्वनि में बदल देता है, जो उसके सामने के अर्ध-आकाश में बराबर विकिरित होती है।
ध्वानिक शक्ति; 10m पर तीव्रता और स्तर।
वहाँ दाब-आयाम; और 100Hz पर वेग- तथा विस्थापन-आयाम।
1m पर स्तर (क्या वह सुरक्षित है?) और वह दूरी जिस पर संगीत गिरकर 60dB हो जाता है।
मंच के चारों ओर फैले दस एक-से ध्वनिविस्तारक, जो कला में नहीं हैं: 10m पर स्तर। और कला में चलाए गए दो ध्वनिविस्तारक, जो अपनी अक्ष पर बैठे श्रोता से बराबर दूरी पर हैं: वहाँ स्तर।
भवन (आयतन 10000m3) में 2000m2 की दीवारें और श्रोता हैं, जो उन पर पड़ती ध्वनि का 30% सोख लेते हैं: साम्य में भवन में संचित ध्वानिक ऊर्जा और अनुरणन काल (संगीत रुकने के बाद स्तर के 60dB गिरने का समय) आँकिए, और इसके लिए उत्सर्जित शक्ति तथा अवशोषित शक्ति के बीच संतुलन लीजिए (विसरित क्षेत्र के लिए Iदीवार≈ce/4, स्वीकृत)।
भाग III — प्रतिध्वनि-लेखी। कोमल ऊतक: c=1540m/s, Z=1.6×106kgm−2s−1; हड्डी Z=7×106kgm−2s−1; हवा 400kgm−2s−1। अभिलंब आपतन पर किसी अंतरापृष्ठ पर परावर्तित दाब-आयाम आपतित आयाम का r=(Z2−Z1)/(Z2+Z1) गुना होता है (अध्याय 15 में व्युत्पन्न); और ऊतक ध्वनि को प्रति सेंटीमीटर तथा प्रति मेगाहर्ट्ज़ लगभग 0.5dB क्षीण करता है।
3MHz, 5MHz, 10MHz पर ऊतक में तरंगदैर्घ्य; और हर एक जितना छोटा विवरण खोल सकता है वह लगभग एक तरंगदैर्घ्य है।
12cm गहरे किसी अंग से प्रतिध्वनि का विलंब; प्रतिध्वनियाँ गड्डमड्ड किए बिना स्पंद भेजने की अधिकतम दर; और 200 रेखाओं का चित्र बनाने में लगा समय।
ऊतक–वायु अंतरापृष्ठ पर परावर्तित दाब का, और ऊर्जा का, अंश; ऊतक–हड्डी अंतरापृष्ठ पर; और वसा (Z=1.38×106kgm−2s−1) तथा पेशी (1.70×106kgm−2s−1) के बीच। जेल क्यों, और हड्डियाँ छाया क्यों डालती हैं?
5MHz पर किरण-पुंज पेशी से मिलने से पहले 2cm वसा पार करता है: उस अंतरापृष्ठ से जाँच तक लौटती उत्सर्जित ऊर्जा का अंश (परावर्तन और आने-जाने का क्षीणन), डेसिबल में।
प्रश्न 12 वाले अंग के लिए तीनों आवृत्तियों पर आने-जाने का क्षीणन डेसिबल में; यदि स्कैनर 80dB तक की हानि सँभाल सके, तो कौन-सी आवृत्तियाँ चलेंगी? विभेदन बनाम गहराई का सौदा बताइए।
जाँच 5MHz पर 1µs के स्पंद भेजती है: एक स्पंद कितनी तरंगदैर्घ्य लंबा है, और उससे गहराई का विभेदन कैसे सीमित होता है?
5MHz पर 0.40m/s की किसी धमनी पर डॉप्लर-विधा, किरण-पुंज 60∘ पर: विस्थापन; और चलाने वाले को क्या सुनाई देता है।
भाग IV — सायरन।
कोई ऐंबुलेंस 700Hz के सायरन के साथ 90km/h से गुज़रती है: पास आते और दूर जाते हुए सुनाई देती आवृत्तियाँ; और उनके बीच का अंतराल अर्ध-स्वरों में (अर्ध-स्वर 21/12 का अनुपात है)।
श्रोता किसी कार में है जो पास आती ऐंबुलेंस की ओर 15m/s से जा रही है: सुनाई देती आवृत्ति।
फुटपाथ पर खड़े श्रोता को ठीक 700Hz किस क्षण सुनाई देते हैं?
ऐंबुलेंस के आगे उसके तरंगाग्र: तरंगदैर्घ्य; और ऐंबुलेंस के सापेक्ष उसके आगे तथा पीछे ध्वनि की चाल।
24GHz की कोई रडार बंदूक किसी कार से 3.2kHz का विस्थापन पढ़ती है: कार की चाल (तरंग दो बार विस्थापित होती है)।
सार दीजिए: इस समस्या की छह चालें (हवा में ध्वनि, ऊतक में, ऐंबुलेंस, कार, लाल कोशिकाएँ, प्रकाश) और वह एक सूत्र जो इन सबको सँभाल लेता है।
हल
हल — समस्या 7.1.
1.c=1.4×8.31×288/0.029=340m/s; 30∘C पर 349m/s। 2.9s में 1km।
2.1.4km। बिजली की नाली कई किलोमीटर लंबी होती है; उसके भिन्न भागों की ध्वनि कई सेकंड तक आती रहती है, और साथ में बादलों तथा ज़मीन से प्रतिध्वनियाँ भी।
3.I=1W/m2: pm=2ZI=29Pa, vm=7cm/s।
4.It=2J/m2।
5.c ऊपर की ओर बढ़ता है; और sini/c के अचर रहने से i बढ़ता है, अतः किरण क्षैतिज की ओर और फिर नीचे मुड़ जाती है: इस तरह ध्वनि ज़मीन के अनुदिश नलिकाबद्ध होकर दूर तक जाती है। पानी के ऊपर सबसे नीची हवा पानी से ठंडी रहती है: वही बात।
6. किरणें ऊपर मुड़ जाती हैं और छाया-क्षेत्र छोड़ जाती हैं। वक्रता त्रिज्या R=c/(dc/dz)=50km: अतः 3km के बाद किरण 3/50=0.06rad=3.4∘ मुड़ चुकी होती है और 90m चढ़ चुकी होती है: अतः श्रोता उसके नीचे रह जाता है।
7. अवशोषण f2 की तरह बढ़ता है: कुछ किलोमीटर बाद तड़ाक की ऊँची आवृत्तियाँ जा चुकी होती हैं और नीची गड़गड़ाहट बची रहती है।
8.P=2W; 10m पर I=2/2πr2=3.2×10−3W/m2: अर्थात् 95dB।
10.+20dB: अर्थात् 1m पर 115dB — जो मिनटों में हानि पहुँचाता है। 60dB: r=2/2π10−6=560m।
11. दस असंबद्ध: +10dB, 105dB। कला में दो: दाब दुगुना, +6dB, 101dB।
12. संतुलन P=αAce/4: e=8/(0.3×2000×340)=3.9×10−5J/m3, E=eV=0.4J। रुकने के बाद dE/dt=−(αAc/4V)E: अतः τ=4V/αAc=0.20s, और 60dB में τln106=2.7s लगते हैं (सैबीन का अनुरणन काल)।
13.λ=c/f: 0.51mm, 0.31mm, 0.15mm।
14.2×0.12/1540=156µs; 6.4kHz; और 31ms में 200 रेखाएँ (अर्थात् तीस चित्र प्रति सेकंड)।
15. ऊतक–वायु: r=−0.9995, अर्थात् ऊर्जा का 99.9% परावर्तित — इसीलिए जेल, जो हवा की झिल्ली हटा देता है। ऊतक–हड्डी: r=0.63, ऊर्जा का 40%; शेष हड्डी सोख लेती है, जो छाया डालती है। वसा–पेशी: r=0.10, ऊर्जा का 1%: अर्थात् वही मंद प्रतिध्वनियाँ जिनसे चित्र बनता है।
16. परावर्तित अंश 1.1% (−20dB); 5MHz पर 4cm की आवाजाही: −10dB; कुल मिलाकर −30dB, अर्थात् एक हज़ारवाँ भाग।
17.24cm की आवाजाही: 36dB, 60dB, 120dB: अतः 3MHz और 5MHz चलते हैं, 10MHz नहीं — गहरे अंग कम आवृत्ति पर मोटे विभेदन के साथ, और सतही अंग ऊँची आवृत्ति पर बारीकी से, चित्रित किए जाते हैं।
18. पाँच तरंगदैर्घ्य, अर्थात् 1.5mm लंबा: अतः लगभग 0.8mm (आधे स्पंद) से पास के दो अंतरापृष्ठ अतिव्यापी प्रतिध्वनियाँ देते हैं।
19.2×5×106×0.4×0.5/1540=1.3kHz: अर्थात् एक सीटी, जिसका स्वर हर धड़कन के साथ चढ़ता और गिरता है।
20.v=25m/s पर: 700×340/315=756Hz, 700×340/365=652Hz; अनुपात 1.16, अर्थात् 12log21.16=2.6 अर्ध-स्वर।
21.700×355/315=789Hz।
22. निकटतम पहुँच पर, जब ऐंबुलेंस का वेग दृष्टि-रेखा के लंबवत हो (ठीक-ठीक कहें तो, जब अभी आती ध्वनि उसी बिंदु पर उत्सर्जित हुई हो)।
23.λ′=(340−25)/700=0.45m (जबकि 0.49m); और ध्वनि ऐंबुलेंस से आगे 315m/s से तथा पीछे 365m/s से दूर जाती है।
24.v=cΔf/2f=3×108×3200/4.8×1010=20m/s=72km/h।
25.340m/s, 1540m/s, 25m/s, 20m/s, 0.4m/s, 3×108m/s: f′=f(c+vo)/(c−vs), एक या दो बार लगाया गया, और कम चाल पर प्रकाश के लिए भी।