विश्वविद्यालय भौतिकी — वर्ष 2 · Bachelor Year 2
22फ्राउनहोफ़र विवर्तन और दैशिक छनन
दो उँगलियों के बीच की झिरी से किसी सड़क-दीपक को सिकोड़कर देखिए और वह दीपक फ्रिंजों की किसी पट्टी में खिंच जाता है; सबसे महीन दूरदर्शी से किसी तारे को देखिए और आपको कोई बिंदु नहीं, बल्कि मंद वृत्तों से घिरी कोई छोटी चकती दिखती है। किसी छिद्र से गुज़रता प्रकाश फैल जाता है — छिद्र जितना सँकरा, फैलाव उतना चौड़ा — और कोई लेंस उसे इस फैलाव से अधिक कसकर फ़ोकस नहीं कर सकता। यही विवर्तन है, और यही कारण है कि कोई सूक्ष्मदर्शी किसी विषाणु को नहीं देख पाता, किसी दूरदर्शी की विभेदन-शक्ति उसके व्यास के साथ बढ़ती है, और कोई लेज़र-पुंज समांतर नहीं रह सकती। यह अध्याय दूर-क्षेत्र में किसी द्वारक की विवर्तन-आकृति निकालता है, वह सीमा जो वह हर प्रकाशिक यंत्र पर लगाती है, वह ढंग जिससे वह व्यतिकरण से जुड़ती है, और वह विचार — आबे का — जो किसी लेंस के फ़ोकस तल को ऐसी जगह बना देता है जहाँ किसी प्रतिबिंब को छाना जा सके।
22.1 ह्यूगेन्स–फ्रेनेल सिद्धांत और फ्राउनहोफ़र दशा
परिभाषा 22.1 (ह्यूगेन्स–फ्रेनेल सिद्धांत)
किसी तरंगाग्र का (या किसी तरंग से जगमगाए किसी द्वारक का) हर बिंदु किसी गौण स्रोत की तरह बरतता है, जो वहाँ की तरंग के साथ एक ही कला में कोई गोलीय तरंगिका उत्सर्जित करता है; और आगे की तरंग तरंगिकाओं का संसक्त योग है। किसी द्वारक के लिए, जो आयाम की किसी समतल तरंग से जगमगाया हो, किसी दूर बिंदु तक पहुँचता आयाम है, जहाँ द्वारक-बिंदु से तक के पथ की कला है ( कोई अचर)। फ्राउनहोफ़र (दूर-क्षेत्र) विवर्तन वह हाल है जहाँ अनंत पर हो — या किसी लेंस के फ़ोकस तल में — ताकि द्वारक के सारे बिंदुओं से की ओर जाती किरणें समांतर हों, दिशा में, और
आकृति अनंत पर देखी जाती है, या किसी लेंस के फ़ोकस पर, जहाँ दिशा , छोटे कोणों की, बिंदु पर उतरती है।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
टिप्पणी 22.2 (कितना दूर काफ़ी दूर है?)
आकार के किसी द्वारक के लिए, जो बिना किसी लेंस के दूरी पर देखा जाए, किरणें तब पर्याप्त समांतर हैं जब अभ्यास 18.12 का द्विघाती पद नगण्य हो, — अर्थात् फ्रेनेल संख्या । पर की किसी झिर्री को चाहिए; और के किसी द्वारक को — इसीलिए लेंस, जो अनंत को अपने फ़ोकस तल पर ले आता है। और पास (फ्रेनेल विवर्तन) आकृतियाँ अधिक जटिल होती हैं; मसलन किसी सीधे किनारे की छाया में उसके जगमगाए पहलू के अनुदिश फ्रिंजें होती हैं।
22.2 अकेली झिर्री और वृत्ताकार द्वारक
प्रतिज्ञप्ति 22.3 (किसी झिर्री से विवर्तन)
अभिलंब आपतन पर जगमगाई चौड़ाई की कोई झिर्री ( के अनुदिश लंबी) दिशा में (झिर्री के लंबवत तल में) यह तीव्रता भेजती है
अर्थात् कोणीय अर्ध-चौड़ाई का कोई चमकीला केंद्रीय अधिकतम (पहले शून्य पर), जो प्रकाश का रखता है, और गौण अधिकतम लगभग , , …पर, जिनकी सापेक्ष तीव्रताएँ , , …हैं — झिर्री जितनी सँकरी, आकृति उतनी चौड़ी। फ़ोकस दूरी के किसी लेंस के फ़ोकस तल में केंद्रीय अधिकतम चौड़ा होता है।
उपपत्ति. , जहाँ ; वर्ग कीजिए। शून्य वहाँ जहाँ , : तब झिर्री के दोनों आधों की तरंगिकाएँ जोड़ी-दर-जोड़ी कट जाती हैं। ∎
प्रतिज्ञप्ति 22.4 (वृत्ताकार द्वारक; एरी चकती)
व्यास का कोई वृत्ताकार द्वारक कोई केंद्रीय चमकीली चकती देता है, एरी चकती, जिसके चारों ओर मंद वलय हैं; और पहला अँधेरा वलय यहाँ है
और चकती प्रकाश का रखती है। व्यास की प्रवेश-पुतली वाला हर यंत्र — आँख, कैमरा, दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी का अभिदृश्यक — किसी बिंदु स्रोत को उसी कोणीय त्रिज्या की किसी एरी चकती में बदल देता है; और दो बिंदु तब सुलझते हैं (रैले की कसौटी) जब उनकी कोणीय दूरी से बड़ी हो: यही यंत्र की विभेदन-शक्ति है।
उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत। ∎
उदाहरण 22.5 (आँख, दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी)
आँख (, ): , अर्थात् लगभग — यानी पर का कोई ब्योरा, जो सचमुच किसी अच्छी आँख की तीक्ष्णता है: विकास ने रेटिना की कोशिकाओं को विवर्तन की सीमा से मिला दिया। का कोई दूरदर्शी: , अर्थात् हज़ार गुना बेहतर, यदि वायुमंडल दे (ज़मीन से वह नहीं देता: की "दृश्यता", इसीलिए अंतरिक्ष-दूरदर्शी और अनुकूली प्रकाशिकी)। कोई की रेडियो तश्तरी पर: , आँख से भी बदतर; और महाद्वीपों भर फैले व्यतिकरणमापी विभेदन लौटा देते हैं। द्वारक-कोण का कोई सूक्ष्मदर्शी अभिदृश्यक सुलझाता है — दृश्य में लगभग , आवर्धन चाहे जो हो: वही सीमा जिसने सूक्ष्मदर्शिकी को इलेक्ट्रॉनों और X-किरणों तक धकेला।
22.3 विवर्तन और व्यतिकरण साथ-साथ
प्रतिज्ञप्ति 22.6 (परिमित चौड़ाई की यंग की झिर्रियाँ; जालक का आवरण)
चौड़ाई की दो झिर्रियाँ, जिनके केंद्र दूर हैं, देती हैं
अर्थात् यंग की फ्रिंजें (दूरी , में) अकेली-झिर्री के आवरण (चौड़ाई ) के नीचे; फ्रिंजें केंद्रीय लोब भर देती हैं, और वाली वे फ्रिंजें जो आवरण के किसी शून्य () पर पड़ें ग़ायब रहती हैं। झिर्रियों का कोई जालक, जिनकी चौड़ाई हो, भी अपने मुख्य अधिकतमों पर वही आवरण ओढ़ लेता है — जिसे अध्याय 21 का ब्लेज़ काम में ली जा रही कोटि की ओर झुका देता है।
उपपत्ति. द्वारक का समाकल दोनों झिर्रियों पर उसी समाकल के योग में बँट जाता है, जो से खिसका है: । झिर्रियों के लिए दूसरा गुणक -तरंग योग है। ∎
22.4 फ़ूरिये तल और दैशिक छनन
प्रतिज्ञप्ति 22.7 (लेंस कोई फ़ूरिये विश्लेषक)
किसी लेंस के अगले फ़ोकस तल में रखी पारगम्यता की कोई पारदर्शिका, किसी समतल तरंग से जगमगाई हुई, पिछले फ़ोकस तल में यह आयाम बनाती है
— अर्थात् उसका द्विविम फ़ूरिये रूपांतर, जिसमें फ़ूरिये तल का हर बिंदु कोणों पर विवर्तित प्रकाश बटोरता है, अर्थात् वस्तु की दैशिक आवृत्तियाँ : महीन ब्योरे (ऊँची आवृत्तियाँ) अक्ष से दूर, मोटे उसके पास। कोई दूसरा लेंस उस तल से प्रतिबिंब फिर बना देता है; और वहाँ जो कुछ रोका या बदला जाए वह प्रतिबिंब से छन जाता है (दैशिक छनन, सूक्ष्मदर्शी का आबे-सिद्धांत): अक्ष पर कोई सूचिछिद्र केवल नीची आवृत्तियाँ रखता है (चिकनाना, किसी लेज़र-पुंज को "साफ़" करना); अक्ष पर कोई रोक एकसमान पृष्ठभूमि हटा देती है और किनारे रख छोड़ती है (कृष्ण-क्षेत्र, स्ट्रायोस्कोपी); और अक्ष पर कोई चतुर्थांश-तरंग पट्टिका कला-वस्तुओं को, जो नहीं तो अदृश्य हैं, तीव्रता-विभेद में बदल देती है (कला-विभेद, ज़ेर्निके)।
औचित्य. फ्राउनहोफ़र समाकल में , जहाँ दिशा पर उतरती है; और पारगम्यता हर गौण स्रोत को तौल देती है। (फ़ूरिये रूपांतर ख़ुद वर्ष 3 के गणित के खंड में पढ़ा जाता है; यहाँ वह केवल इस समाकल का नाम है।) आवर्त की किसी आवर्ती वस्तु के लिए रूपांतर पर जालक की कोटियों का समुच्चय है: और प्रतिबिंब आवर्त तभी दिखा सकता है जब कम-से-कम कोटियाँ लेंस से पार जाएँ — यही आबे की शर्त है, जो फिर से सूक्ष्मदर्शी के विभेदन की सीमा है। ∎
उदाहरण 22.8 (किसी पुंज को साफ़ करना, अदृश्य को देखना)
कोई लेज़र-पुंज धूल और लहरें ढोती है: उसे कुछ माइक्रोमीटर के किसी सूचिछिद्र से होकर फ़ोकस कीजिए — अर्थात् साफ़ गाउसी पुंज की केंद्रीय एरी चकती जितना — और बाक़ी सब, जो बाहर पड़ता है, रुक जाता है; और फिर से संरेखित पुंज चिकनी है: कोई दैशिक छन्ना। कोई जीवित कोशिका पारदर्शी है; वह प्रकाश की केवल कला बदलती है। अक्षीय धब्बा रोक देने पर उसके किनारे काले पर चमकीले हो जाते हैं; और ज़ेर्निके की पट्टिका अविवर्तित प्रकाश को चौथाई तरंग खिसका देती है ताकि वह विवर्तित प्रकाश से तीव्रता में व्यतिकरण करे: तब कोशिका का भीतरी भाग दिखने लगता है, और जीवविज्ञान को अपना सूक्ष्मदर्शी मिल गया (1953 का नोबेल पुरस्कार)।
विधि 22.9 (विवर्तन के आकलन)
(1) कोणीय फैलाव , आकार के किसी द्वारक के लिए ( किसी वृत्त के लिए); और दूरी पर या फ़ोकस दूरी पर आकृति का आकार , । (2) फ्राउनहोफ़र शर्त जाँचिए या कोई लेंस काम में लीजिए। (3) जोड़िए: विवर्तन आवरण व्यतिकरण फ्रिंजें। (4) विभेदन: दो बिंदुओं को चाहिए; और किसी आवर्ती वस्तु को अपनी पहली कोटियाँ पुतली में घुसानी पड़ती हैं। (5) फ़ूरिये तल वाला चित्र: कौन-सा ब्योरा हटाने के लिए क्या रोका जाए।
22.5 अभ्यास
अभ्यास 22.1 ★
किसी हीलियम–नियोन लेज़र () से जगमगाई की कोई झिर्री; पर्दा पर। केंद्रीय अधिकतम की चौड़ाई; पहले दो गौण अधिकतमों की जगह; फ्रेनेल संख्या — क्या पर्दा काफ़ी दूर है? वही झिर्री के किसी लेंस के साथ।
अभ्यास 22.2 ★
इनकी विभेदन-शक्ति (रैले): आँख (, ); कोई का शौक़िया दूरदर्शी; का हबल दर्पण; पर की कोई रेडियो तश्तरी; पर का कोई कैमरा-लेंस (पुतली ): संवेदक पर एरी चकती का आकार, के किसी पिक्सल के सामने।
हल
हल — अभ्यास 22.2.
: आँख (); : ; हबल ; तश्तरी ; कैमरा: त्रिज्या, यानी की कोई चकती — तीन पिक्सल: पर विवर्तन पहले ही किसी संवेदक को सीमित कर देता है।
अभ्यास 22.3 ★
चौड़ाई की दो झिर्रियाँ, केंद्र दूर, , लेंस : फ्रिंजों की दूरी; केंद्रीय आवरण की चौड़ाई; उसमें फ्रिंजों की संख्या; और कौन-सी कोटियाँ ग़ायब हैं?
हल
हल — अभ्यास 22.3.
; आवरण ; दस फ्रिंजें; और कोटियाँ () ग़ायब।
अभ्यास 22.4 ★
पर व्यास की कोई लेज़र-पुंज चंद्रमा () तक चलती है: विवर्तन कोण , धब्बे का व्यास; और के किसी दूरदर्शी को प्रेषक की तरह लेने पर; चंद्र-परास के लौटते संकेत इतने मंद क्यों हैं (परावर्तक, , प्रकाश अपने ही विवर्तन के साथ लौटाता है)?
हल
हल — अभ्यास 22.4.
: अर्थात् चौड़ा कोई धब्बा; और के साथ, । परावर्तक का अपना विवर्तन, , लौटते प्रकाश को भर फैला देता है: भेजे गए फ़ोटॉनों में से मुट्ठी भर लौटते हैं।
अभ्यास 22.5 ★★
झिर्री ब्योरे में। (क) झिर्री के लिए फ्राउनहोफ़र समाकल कीजिए और पाइए। (ख) दिखाइए कि गौण अधिकतम पर हैं (), पहला के पास, और उसकी सापेक्ष तीव्रता निकालिए। (ग) केंद्रीय लोब में ऊर्जा का अंश (मान लीजिए और )। (घ) झिर्री आपतन पर जगमगाई है: दिखाइए कि आकृति वही है, दिशा पर केंद्रित।
हल
हल — अभ्यास 22.5.
(क) । (ख) देता है ; , । (ग) । (घ) कला बन जाती है: अर्थात् के इर्द-गिर्द वही आकृति।
अभ्यास 22.6 ★★
सूक्ष्मदर्शी। पर संख्यात्मक द्वारक (तेल-निमज्जन) का कोई अभिदृश्यक: सुलझाई गई सबसे छोटी दूरी ; नीले प्रकाश () के साथ; पराबैंगनी () में; और का कोई नेत्रिका क्यों मदद नहीं करता ( पर आँख की अपनी सीमा है)? इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी क्या बदल देते हैं ( पर )?
हल
हल — अभ्यास 22.6.
: ; ; । किसी के परे नेत्रिका केवल धुँधलेपन को बड़ा करती है (खोखला आवर्धन)। पर इलेक्ट्रॉन, के साथ: — अर्थात् परमाणु।
अभ्यास 22.7 ★★
आयताकार और वृत्ताकार। (क) कोई आयताकार द्वारक : दिखाइए कि आकृति है: अर्थात् कोई क्रॉस, जो सँकरी भुजा के अनुदिश चौड़ा है। (ख) के साथ का कोई वर्ग: केंद्रीय वर्ग का आकार। (ग) उसी चौड़ाई के किसी वृत्त के लिए पहला शून्य पर है, के बजाय: और दूर क्यों (किसी चकती के केंद्र के पास सिमटे प्रकाश के बारे में सोचिए)? (घ) किसी दूरदर्शी का गौण दर्पण चार पंखियों से थमा है: वे किसी चमकीले तारे के प्रतिबिंब में क्या जोड़ देती हैं?
हल
हल — अभ्यास 22.7.
(क) समाकल और में गुणनखंडों में बँट जाता है। (ख) । (ग) किसी चकती की जीवाएँ केंद्र से हटकर उसके व्यास से छोटी हैं: अतः उसकी प्रभावी चौड़ाई कम है, और उसकी आकृति चौड़ी। (घ) किसी क्रॉस में चार विवर्तन कीलें।
अभ्यास 22.8 ★★
आबे। आवर्त के किसी जालक को हवा में द्वारक-कोण के किसी सूक्ष्मदर्शी अभिदृश्यक से देखा जाता है, । (क) उसकी कोटियों , के कोण। (ख) प्रतिबिंब में आवर्त दिखने के लिए न्यूनतम (कोटियाँ घुसनी चाहिए)। (ग) के साथ: प्रतिबिंब क्या दिखाता है — क्या वह कोई विश्वसनीय जालक है? (घ) तिरछी रोशनी शून्य कोटि और एक पहली कोटि को पार जाने देती है: तब न्यूनतम , और लाभ।
हल
हल — अभ्यास 22.8.
(क) (), ()। (ख) । (ग) केवल कोटियाँ , : अर्थात् सही आवर्त का कोई ज्यावक्रीय प्रतिबिंब, न कि तीखी छड़ें। (घ) : अर्थात् दुगुना विभेदन।
अभ्यास 22.9 ★★
दैशिक छन्ना। कोई की लेज़र-पुंज () के किसी लेंस से किसी सूचिछिद्र से होकर फ़ोकस की जाती है। (क) फ़ोकस पर केंद्रीय एरी चकती का व्यास; और उसे पार जाने देने के लिए सूचिछिद्र का व्यास ( लीजिए)। (ख) पुंज पर का धूल का कोई कण किस कोण पर प्रकाश विवर्तित करता है, और वह प्रकाश फ़ोकस तल में कहाँ उतरता है — सूचिछिद्र से पार या नहीं? (ग) यदि पुंज गाउसी हो और सूचिछिद्र उसका पार जाने दे तो खोई शक्ति; और निकलती पुंज चिकनी क्यों है? (घ) सूचिछिद्र को कुछ माइक्रोमीटरों तक केंद्रित क्यों होना पड़ता है?
हल
हल — अभ्यास 22.9.
(क) ; सूचिछिद्र । (ख) : अक्ष से दूर, रुका हुआ। (ग) ; और सूचिछिद्र केवल नीची दैशिक आवृत्तियाँ रखता है। (घ) कुछ माइक्रोमीटर हट जाए तो सूचिछिद्र ख़ुद धब्बे को काट देता है।
अभ्यास 22.10 ★★★
बाबिने। दो पूरक पर्दे (कोई झिर्री, और उसी चौड़ाई की कोई अपारदर्शी पट्टी) किसी समतल तरंग से जगमगाए हैं। (क) दिखाइए कि, आपाती पुंज की दिशा से हटकर, उनकी फ्राउनहोफ़र आकृतियाँ एक-सी हैं (दोनों आयामों का योग बिना रुकी तरंग का है, जो अक्ष से बाहर शून्य है)। (ख) किसी लेज़र के साथ पर व्यास के किसी बाल की आकृति: फ्रिंजों की दूरी, और उससे बाल का व्यास — अर्थात् कोई मानक माप। (ग) ख़ुद अक्ष पर क्या दिखता है? (घ) किसी पतले बादल की छोटी बूँदें चंद्रमा के चारों ओर रंगीन वलयों का कोई किरीट क्यों बनाती हैं, और वलय की त्रिज्या क्या दे देती है?
हल
हल — अभ्यास 22.10.
(क) आयाम जुड़कर बिना रुकी तरंग बनाते हैं, जो अक्ष से बाहर शून्य है: अतः वहाँ । (ख) फ्रिंजें की दूरी पर; दूरी नापिए, पा लीजिए। (ग) पट्टी की छाया बिना विवर्तित चमकीली पुंज में बैठी है। (घ) व्यास की बूँदें छेदों की तरह विवर्तित करती हैं: वलय पर, लाल बाहर; और त्रिज्या दे देती है।
अभ्यास 22.11 ★★★
कृष्ण-क्षेत्र और कला-विभेद। किसी पारदर्शी वस्तु का है, जहाँ । (क) उसके साधारण प्रतिबिंब की तीव्रता: दिखाइए कि वह पहली कोटि तक एकसमान है — अर्थात् अदृश्य। (ख) फ़ूरिये तल में "1" अक्षीय धब्बा है और उसके चारों ओर विवर्तित प्रकाश: यदि कोई रोक अक्षीय धब्बा रोक दे तो प्रतिबिंब की तीव्रता — कृष्ण-क्षेत्र; और उसकी दुर्बलता। (ग) और यदि इसके बजाय अक्षीय धब्बा से विलंबित कर दिया जाए ( से गुणा): प्रतिबिंब — कला-विभेद, में रैखिक। (घ) ज़ेर्निके की पट्टिका अक्सर अवशोषी भी क्यों होती है (वह अक्षीय धब्बा क्षीण कर देती है)?
हल
हल — अभ्यास 22.11.
(क) : पहली कोटि तक एकसमान। (ख) अक्षीय प्रकाश के बिना, : दूसरी कोटि, मंद। (ग) : रैखिक। (घ) अक्षीय धब्बा विवर्तित प्रकाश पर भारी पड़ता है; और उसे क्षीण करना दोनों आयामों को बराबर कर देता है तथा विभेद बढ़ा देता है।
अभ्यास 22.12 ★★★
किसी वर्णक्रमलेखी की झिर्री-प्रतिबिंब और जालक का विभेदन। चौड़ाई का कोई जालक वर्णक्रमलेखी का द्वारक है: दिखाइए कि उस द्वारक की विवर्तन आकृति, ( पर निकलती पुंज के लिए), की कोणीय अर्ध-चौड़ाई है, और यह कि परिक्षेपण से तरंगदैर्घ्य में बदलने पर वह है — अर्थात् अध्याय 21 की विभेदन-शक्ति, विवर्तन की तरह देखी गई। (ख) व्यास का कोई दूरदर्शी और चौड़ाई का कोई जालक: जालक को से चौड़ा होना चाहिए: क्यों? (ग) एक वाक्य में समझाइए कि प्रकाशिकी की हर "विभेदन-शक्ति" (द्वारक का आकार)/ क्यों है। (घ) झिर्री क्या जोड़ती है, और वह कब हावी हो जाती है?
हल
हल — अभ्यास 22.12.
(क) अर्ध-चौड़ाई ; और से भाग देने पर: । (ख) संरेखित पुंज का व्यास है; और कोई छोटा जालक प्रकाश तथा विभेदन-शक्ति बरबाद करता। (ग) कोई विभेदन सदा वह कोण है जिस पर द्वारक भर कला एक तरंगदैर्घ्य बदलती है, । (घ) उसकी प्रतिबिंब-चौड़ाई, जो तब हावी होती है जब वह जालक की विवर्तन-चौड़ाई से चौड़ी हो — और यही आम हाल है।
22.6 समस्या: क्या सुलझाया जा सकता है
समस्या 22.1
सप्ताहांत समस्या — चार पैमानों पर विवर्तन की सीमा: आँख, कोई दूरदर्शी, कोई सूक्ष्मदर्शी, और वह लेज़र-पुंज जिसे काम में लेने से पहले साफ़ करना पड़ता है
भाग I — आँख। पुतली दिन में , रात में ; ; रेटिना की शंकु कोशिकाएँ दृष्टि-गर्त पर की दूरी पर हैं, और आँख की फ़ोकस दूरी है।
- दिन में एरी चकती की कोणीय त्रिज्या; रेटिना पर उसकी रैखिक त्रिज्या; शंकु-दूरी से तुलना कीजिए — क्या रेटिना प्रकाशिकी से मिला हुआ है?
- पर सुलझे दो बिंदुओं की सबसे छोटी दूरी; और पर; क्या आप बाँह भर दूरी पर का कोई पाठ पढ़ सकते हैं?
- रात में पुतली खुलकर हो जाती है: तब विवर्तन की सीमा; फिर भी दृष्टि और बदतर क्यों हो जाती है (पूरे द्वारक पर लेंस के विपथन, और शंकुओं से मोटी शलाकाएँ)?
- की दूरी पर किसी गाड़ी की दो अग्रबत्तियाँ: वह दूरी जिस पर वे एक ही बत्ती में मिल जाती हैं।
- आँख के आगे थामा का कोई छेद: विवर्तन क्या करता है, और फिर भी कोई सूचिछिद्र किसी निकट-दृष्टि आँख की मदद क्यों करता है (गहराई-क्षेत्र)?
भाग II — दूरदर्शी। का कोई दूरदर्शी, , और पिक्सलों वाला कोई कैमरा; ।
- चाप-सेकंडों में विवर्तन की सीमा; संसूचक पर एरी त्रिज्या; और प्रति एरी चकती पिक्सल।
- वायुमंडल प्रतिबिंबों को तक धुँधला कर देता है: दूरदर्शी का कितना विभेदन खो जाता है? और वह व्यास जिसके लिए विवर्तन की सीमा दृश्यता के बराबर हो।
- अनुकूली प्रकाशिकी पर वायुमंडल को सुधार देती है: वहाँ विवर्तन की सीमा; अवरक्त में यह आसान क्यों है?
- की दूरी पर घटकों वाला कोई युग्म तारा: क्या वह पर अनुकूली प्रकाशिकी से सुलझता है? और अंतरिक्ष से पर?
- चंद्रमा दूर है: यह दूरदर्शी सबसे छोटा कौन-सा गड्ढा सुलझा सकता (केवल विवर्तन); और किसी चंद्र-यान () का निशान?
- रात की आँख () के सापेक्ष दूरदर्शी की प्रकाश-संचय शक्ति; वह क्या ख़रीदती है, और क्या नहीं?
- गौण दर्पण थामती चार पंखियों से होकर किसी तारे का प्रकाश: प्रतिबिंब का वर्णन कीजिए।
भाग III — सूक्ष्मदर्शी। संख्यात्मक द्वारक (सूखा) या (तेल) का कोई अभिदृश्यक, ; और सुलझी दूरी है।
- हर अभिदृश्यक के साथ सुलझी दूरी; और प्रति मिलीमीटर रेखा-युग्मों की संख्या।
- पर भीतरी संरचना वाला का कोई जीवाणु: हर एक से क्या दिखता है? और का कोई विषाणु?
- आबे: आवर्त की कोई आवर्ती संरचना तभी प्रतिबिंबित होती है जब उसकी वाली पहली कोटियाँ अभिदृश्यक में घुसें: न्यूनतम , के लिए; और से तुलना कीजिए।
- स्लाइड और अभिदृश्यक के बीच तेल विभेदन क्यों सुधार देता है?
- पर पराबैंगनी और पर कोई इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी: उसी सूत्र में सुलझी दूरियाँ (इलेक्ट्रॉनों के लिए व्यावहारिक NA है): तुलना कीजिए।
- कोई कोशिका पारदर्शी है: उज्ज्वल क्षेत्र में उसका प्रतिबिंब ख़ाली है। दो वाक्यों में समझाइए कि अभिदृश्यक के फ़ूरिये तल में रखी कला-विभेद पट्टिका क्या करती है।
भाग IV — पुंज। का कोई लेज़र, पुंज का व्यास , को फैलाकर करना और साफ़ करना है।
- कच्ची पुंज का विवर्तन अर्ध-कोण (); और बिना किसी प्रकाशिकी के के बाद उसका व्यास।
- का कोई लेंस उसे फ़ोकस करता है: फ़ोकस-धब्बे का व्यास; और चुना गया सूचिछिद्र-व्यास (धब्बे का )।
- का कोई दूसरा लेंस उसे पर फिर संरेखित करता है: ; नया विवर्तन कोण; और के बाद व्यास।
- पहले लेंस पर की धूल किस कोण पर विवर्तित करती है; वह प्रकाश सूचिछिद्र-तल पर कहाँ पड़ता है, और उसका क्या होता है?
- सूचिछिद्र किसी गाउसी पुंज का पार जाने देता है: खोई शक्ति, और वह कहाँ जाती है।
- समांतर बने रहने के लिए फैली हुई पुंज को बड़ा क्यों होना चाहिए ( को उस दूरी से जोड़िए जिस पर पुंज दुगुनी हो जाए, )?
- इस समस्या की चारों सीमाएँ किसी एक सारणी में समेटिए: द्वारक, तरंगदैर्घ्य, , और वह क्या सीमित करती है।
हल
हल — समस्या 22.1.
1. ; : अर्थात् दो शंकु-दूरियाँ — रेटिना प्रकाशिकी की सीमा पर नमूने लेता है।
2. पर , पर ; और पर सीमा का दस गुना है: आसानी से।
3. ; पर पूरे द्वारक पर लेंस के विपथन और मोटी, इकट्ठा जोड़ी गई शलाकाएँ उस लाभ को खा जाती हैं।
4. ।
5. विवर्तन बिगड़कर हो जाता है, पर किसी बेफ़ोकस आँख का धुँधलापन-वृत्त द्वारक के साथ सिकुड़ता है: गहराई-क्षेत्र जीत जाता है।
6. (); त्रिज्या: अर्थात् पिक्सल की कोई चकती।
7. , अर्थात् सीमा का सात गुना; और पहले ही दृश्यता तक पहुँच जाता है।
8. (); वायुमंडल की कला-त्रुटियाँ किसी लंबे तरंगदैर्घ्य का छोटा अंश हैं: कम और धीमे सुधार।
9. : नहीं; और अंतरिक्ष से पर, : बस।
10. ; और यान, नहीं।
11. चार विवर्तन-कीलों का कोई क्रॉस।
12. : अर्थात् मंद वस्तुएँ, तीखी नहीं।
13. और : प्रति मिलीमीटर और रेखा-युग्म।
14. जीवाणु, हाँ; उसकी की संरचना तेल के साथ सीमा पर, सूखे नहीं; और विषाणु, नहीं।
15. साधारण रोशनी में , और तिरछे प्रकाश के साथ — और दो बिंदुओं वाला बीच में पड़ता है।
16. तेल का अपवर्तनांक बढ़ा देता है और उस पूर्ण परावर्तन को दबा देता है जो तीखी किरणों को आवरण-काँच में फँसा लेता।
17. ; और इलेक्ट्रॉन: ।
18. पट्टिका अविवर्तित प्रकाश को चौथाई तरंग विलंबित कर देती है ताकि वह कोशिका की कला-संरचना से विवर्तित प्रकाश से व्यतिकरण करे; और कला की आकृति तीव्रता की आकृति बन जाती है।
19. ; ।
20. ; सूचिछिद्र ।
21. ; ; और किसी किलोमीटर के बाद ।
22. : सूचिछिद्र पर अक्ष से दूर — रुका हुआ।
23. , जिसे सूचिछिद्र की पट्टिका सोख लेती है।
24. व्यास की कोई पुंज भर दुगुनी हो जाती है: के लिए , और के लिए ।
25. आँख , दूरदर्शी , अभिदृश्यक (NA ), पुंज : हर एक में सबसे छोटा कोण, सबसे महीन ब्योरा, और सबसे धीमा फैलाव तय करता है।