Biology · किताब 1 · Grades 1–9

प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय जीवविज्ञान

प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय जीवविज्ञान · Grades 1–9

58अंडाणु से जन्म तक

अध्याय 32 ने उन नौ महीनों को एक कहानी की तरह सुनाया था; और अब तुम्हारे पास वे सारे साज़ हैं जो उस कहानी को ठीक से बजाने के लिए चाहिए: कोशिकाएँ और उनका बँटना, दोनों युग्मक और उनकी मिलन-जगह, हॉर्मोन, और रक्त की पहुँचाई हुई चीज़ें। यह अध्याय इंसानी विकास को मशीनरी खोलकर दोबारा बजाता है — एक कोशिका से तीन हज़ार अरब तक, चालीस हफ़्तों में।

58.1 पहला हफ़्ता: युग्मनज से किरायेदार तक

प्रतिज्ञप्ति 58.1 (अंडवाहिनी में नीचे का सफ़र)

अंडवाहिनी में निषेचन (परिभाषा 57.3) एक ही साथ दो घड़ियाँ चालू कर देता है:

  1. बँटना: युग्मनज एक दिन के भीतर बँटता है, फिर बार-बार (उदाहरण 29.8) — दो, चार, आठ कोशिकाएँ, और चौथे दिन तक दर्जनों की एक शहतूत जैसी गेंद, और यह सब अंडवाहिनी में गर्भाशय की ओर बहते-बहते;
  2. आरोपण: सातवें दिन के आस-पास वह नन्ही गेंद गर्भाशय तक पहुँचती है और तैयार परत में ख़ुद को धँसा लेती है (प्रतिज्ञप्ति 57.5 की चौथी घटना) — किरायेदार आ पहुँचा, चक्र रुक गया, और हॉर्मोन पूरे तंत्र को इशारा कर देते हैं: गर्भावस्था

उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत।

उदाहरण 58.2 (पहले बँटवारे जीते किस पर हैं)

पहले पूरे हफ़्ते वह मुसाफ़िर न कोई खाना खाता है न उसे कुछ पहुँचाया जाता है: वह ख़ुद अंडाणु के साज़-सामान पर चलता है — यानी ठीक उसी चीज़ पर, जिसके लिए उदाहरण 57.4 वाली भरपाई थी। शुक्राणु पिता का केंद्रक लाया था और उसके सिवा कुछ ख़ास नहीं; अंडा दूसरा केंद्रक और भंडार-कोठरी, दोनों लाया था। और आरोपण, बाक़ी बातों के अलावा, भंडार-कोठरी के चुकते जाने और किरायेदार के कमरे की सेवा से जुड़ जाने का नाम है।

58.2 भ्रूण, नाल, गर्भस्थ शिशु

परिभाषा 58.3 (नाल)

आरोपित गेंद से एक ही साथ दो रचनाएँ उगती हैं: ख़ुद भ्रूण, और उसके जीवन-आधार का जोड़ — यानी नाल, गर्भाशय की दीवार में उगी एक तश्तरी, जहाँ माँ का रक्त और भ्रूण का रक्त बिना मिले बहुत क़रीब आ जाते हैं। उसकी विशाल पतली सतहों के पार — प्रतिज्ञप्ति 47.1 वाली विशेष-सूची, एक बार फिर बनी हुई — पोषक तत्व और ऑक्सीजन भ्रूण की ओर जाते हैं, और कचरा तथा कार्बन डाइऑक्साइड वापस आते हैं (प्रतिज्ञप्ति 32.4 वाली रज्जु नाल और भ्रूण के बीच चलती है)। उस मुसाफ़िर के लिए नाल ही फेफड़ा है, आँत है और गुर्दा भी — यानी तीनों सरहदें एक ही अंग में।

प्रतिज्ञप्ति 58.4 (समय-सारणी, साज़ों के साथ दोबारा)

उदाहरण 32.5 वाले पड़ाव, अब समझाए हुए:

उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत।

उदाहरण 58.5 (शुरुआती हफ़्ते सबसे ज़्यादा देखभाल क्यों माँगते हैं)

प्रतिज्ञप्ति 32.8 ने चेताया था कि तंबाकू और शराब शिशु तक पार कर जाते हैं; और समय-सारणी बताती है कि यह सबसे ज़्यादा कब मायने रखता है: नक़्शा बिछाने वाले भ्रूण के हफ़्तों में, जब हर अंग विशेषज्ञ बनती कोशिकाओं की एक छोटी-सी भीड़ होता है, तब एक भी बिगड़ा हुआ निर्देश पूरी बनावट में गूँज सकता है — और ठीक वही हफ़्ते हैं जिनमें गर्भावस्था का पता तक नहीं चलता। इसीलिए डॉक्टरों का वह सीधा-सादा गणित: देखभाल पहली जाँच से नहीं, पहली संभावना से शुरू होती है।

58.3 जन्म, और सरहदों की अदला-बदली

प्रतिज्ञप्ति 58.6 (जन्म, हॉर्मोन के हुक्म से हुई अदला-बदली)

चालीसवें हफ़्ते के आस-पास हॉर्मोनों के इशारे — शिशु के और माँ के, आपस में बात करते हुए — गर्भाशय की उस लंबी शांति को ख़त्म कर देते हैं:

  1. प्रसव-पीड़ा: गर्भाशय, यानी शरीर की सबसे ताक़तवर पेशी (टिप्पणी 57.6 उसके नरम काम से मिल चुकी है), बढ़ती हुई लहरों में सिकुड़ती है, रास्ता खोलती है और शिशु को जन्म की नली में नीचे धकेलती है;
  2. जन्म: आम तौर पर सिर पहले (उदाहरण 32.6);
  3. अदला-बदली: पहली रुलाई कभी इस्तेमाल न हुए फेफड़े भर देती है; रज्जु की आवाजाही ख़त्म होती है और उसे काट दिया जाता है; और मिनटों में नवजात अपने ही फेफड़ों, आगे चलने वाली आँत और गुर्दों पर चलने लगता है — यानी वे सारी सरहदें, जो अब तक नाल सँभाल रही थी (अभ्यास 32.11, अब पूरे नक़्शे के साथ);
  4. आँवल: नाल, अपना काम पूरा करके, अलग होती है और पीछे-पीछे निकल आती है — यानी वह अकेला अंग, जिसे शरीर एक ही इस्तेमाल के लिए बनाता है और फिर छोड़ देता है।

उपपत्ति. इस स्तर पर स्वीकृत।

उदाहरण 58.7 (नवजात की पहली जाँच-पड़ताल)

दाइयाँ जन्म के मिनटों बाद ही नवजात को अंक देती हैं — साँस, दिल की धड़कन, रंग, हरकत, रुलाई। इस जाँच-सूची को इस किताब की आँखों से पढ़ो: यह तो प्रतिज्ञप्ति 53.7 वाला आपूर्ति-और-हटाव का फंदा है, जिसकी उसकी पहली अकेली दौड़ पर जाँच हो रही है। हर इंसान सबसे पहले जो इम्तिहान पास करता है वह शरीर-क्रिया का इम्तिहान है।

विधि 58.8 (गर्भावस्था की किसी भी अवस्था को समझाना)

उन नौ महीनों के किसी भी पल के बारे में पूछा जाए, तो चार साज़ों से जवाब दो:

  1. कोशिकाएँ: उनका बँटना और विशेषज्ञ बनना क्या कर रहा है?
  2. आपूर्ति: भंडार-कोठरी, या नाल — क्या पार होता है, और क्या हरगिज़ नहीं?
  3. हॉर्मोन: क्या थामे रखा जा रहा है, या क्या हुक्म हो रहा है?
  4. देखभाल: यह अवस्था माँ की आदतों और डॉक्टरों के कैलेंडर से क्या माँगती है?

58.4 अभ्यास

अभ्यास 58.1

पहले हफ़्ते का समय बताओ: बँटने की शुरुआत, शहतूत जैसी गेंद, और आरोपण।

हल

हल — अभ्यास 58.1.

निषेचन के एक दिन के भीतर बँटना; चौथे दिन तक दर्जनों कोशिकाओं की एक शहतूत जैसी गेंद, जो अंडवाहिनी में नीचे बहती जाती है; और सातवें दिन के आस-पास गर्भाशय की परत में आरोपण।

अभ्यास 58.2

पहले हफ़्ते का मुसाफ़िर किस पर जीता है, और वह इंतज़ाम कौन ख़त्म करता है?

हल

हल — अभ्यास 58.2.

ख़ुद अंडाणु के साज़-सामान पर — यानी वह भंडार-कोठरी, जिसके रूप में उस बड़े युग्मक को भरा गया था। आरोपण यह इंतज़ाम ख़त्म कर देता है: किरायेदार परत की आपूर्ति से जुड़ जाता है, जो जल्द ही नाल के रूप में सज जाती है।

अभ्यास 58.3

नाल क्या है — उसके पार हर तरफ़ क्या-क्या जाता है, और क्या कभी नहीं जाता?

हल

हल — अभ्यास 58.3.

गर्भाशय की दीवार में उगी वह जीवन-आधार वाली तश्तरी, जहाँ दोनों रक्त बिना मिले क़रीब आ जाते हैं। भ्रूण की ओर: पोषक तत्व और ऑक्सीजन। वापस: कचरा और कार्बन डाइऑक्साइड। और कभी पार नहीं होते: ख़ुद दोनों रक्त

अभ्यास 58.4

चालीस हफ़्तों को भ्रूण और गर्भस्थ शिशु में बाँटो, और हर चरण का काम भी बताओ।

हल

हल — अभ्यास 58.4.

हफ़्ते 1–8, यानी भ्रूण: बँटती, जगह बदलती और विशेषज्ञ बनती कोशिकाओं से शरीर का नक़्शा बिछाया जाता है। हफ़्ते 9–40, यानी गर्भस्थ शिशु: नक़्शा बन चुका — अब बढ़त और पकाई, मस्तिष्क की जुड़ाई, और फेफड़ों की रिहर्सल।

अभ्यास 58.5

सारे अंगों में दिल ही चौथे हफ़्ते से पहले-पहल क्यों धड़कता है?

हल

हल — अभ्यास 58.5.

क्योंकि पूरी बनावट पहुँचाई हुई चीज़ों पर चलती है: नाल वाली अर्थव्यवस्था शुरू होते ही किसी पंप को भ्रूण का रक्त रज्जु तथा शरीर भर चलाना ही पड़ता है — आपूर्ति की लाइन बाक़ी नक़्शे का इंतज़ार नहीं कर सकती।

अभ्यास 58.6

जन्म की चारों गिनी हुई घटनाएँ क्रम से गिनाओ।

हल

हल — अभ्यास 58.6.

प्रसव-पीड़ा के बढ़ते हुए संकुचन; जन्म, आम तौर पर सिर पहले; अदला-बदली — पहली रुलाई, रज्जु का कटना, और नवजात की अपनी सरहदों का ज़िम्मा सँभालना; और आँवल — नाल का अलग होकर पीछे-पीछे निकल आना।

अभ्यास 58.7 ★★

नाल किन तीन अंगों का काम करती है? हर एक की सरहद वाले अध्याय का नाम भी बताओ।

हल

हल — अभ्यास 58.7.

फेफड़ों का (ऑक्सीजन भीतर, कार्बन डाइऑक्साइड बाहर — अध्याय 51), आँत का (पोषक तत्व भीतर — अध्याय 50), और गुर्दों का (कचरा बाहर — अध्याय 53)। तीन सरहदें, एक तश्तरी।

अभ्यास 58.8 ★★

भ्रूण वाले हफ़्ते सबसे ज़्यादा देखभाल क्यों माँगते हैं — उदाहरण 58.5 में से दो कारण?

हल

हल — अभ्यास 58.8.

क्योंकि नक़्शा बिछाने वाले हफ़्ते ही वे हफ़्ते हैं जब एक भी बिगड़ा हुआ निर्देश पूरी बनावट में गूँज जाता है — हर अंग तब विशेषज्ञ बनती कोशिकाओं की एक छोटी-सी भीड़ होता है; और इसलिए भी कि वे हफ़्ते गर्भावस्था का शक तक होने से पहले बीत सकते हैं — सो देखभाल पहली जाँच से नहीं, पहली संभावना से शुरू होनी चाहिए।

अभ्यास 58.9 ★★

नवजात की अंक-सूची को प्रतिज्ञप्ति 53.7 वाले फंदे की तरह पढ़ो: साँस, दिल की धड़कन और रंग को उनके तंत्रों से मिलाओ।

हल

हल — अभ्यास 58.9.

साँस और रुलाई: फेफड़ों की वह सरहद, जो मिनट भर पुरानी है। दिल की धड़कन: दोनों चक्कर चलाता वह पंप। रंग: पहुँचाने वाली सेवा का सचमुच पहुँचाना — यानी ऑक्सीजन से भरपूर रक्त का त्वचा की केशिकाओं तक पहुँचना। और हरकत सेनापति की जाँच पूरी कर देती है। यह अंक-सूची वही फंदा है, जिसकी जाँच जीते-जागते हो रही है।

अभ्यास 58.10 ★★

जुड़वाँ, फिर से (टिप्पणी 32.7): प्रतिज्ञप्ति 58.1 के किस पल पर वह एक युग्मनज दो में बँटता है, और उस समय की वजह से वे “नक़लों जैसे एक-से” क्यों होते हैं?

हल

हल — अभ्यास 58.10.

पहले बँटवारों में — यानी युग्मनज की गेंद का पहले ही दिनों में दो गेंदों में बँट जाना। उसके बाद दोनों जुड़वाँ उसी एक शुरुआती कोशिका की विरासत से बनते हैं (उदाहरण 29.8), इसलिए दोनों बनावटें एक ही नक़्शे चलाती हैं: नक़लें, क्योंकि रास्ता बँटवारे के बाद फूटा।

अभ्यास 58.11 ★★

विधि 58.8 को चौथे महीने पर चलाओ — यानी पहली लातों वाले महीने पर।

हल

हल — अभ्यास 58.11.

कोशिकाएँ: गर्भस्थ शिशु वाला चरण — अंग बन चुके, अब बढ़ रहे हैं; और पेशी तथा तंत्रिका की कोशिकाएँ आपस में जुड़ रही हैं। आपूर्ति: नाल वाली अर्थव्यवस्था पूरी रफ़्तार पर — पोषक तत्व और ऑक्सीजन भीतर, कचरा बाहर, और माँ के रक्त में कोई नुक़सानदेह चीज़ नहीं। हॉर्मोन: गर्भाशय को शांत और चक्र को ठहरा हुआ थामे हुए। देखभाल: माँ की थाली और आराम, जो दो सरहदों जितनी आवाजाही को खिलाते हैं; और वे लातें ख़ुद इस चलते हुए फंदे की तसल्ली देने वाली निशानी हैं।

अभ्यास 58.12 ★★★

“जन्म सरहदों का बदल जाना है।” इसे सही ठहराओ: वे सारी अदला-बदलियाँ गिनाओ जो नाल सँभाल रही थी, और वह अंग भी जो पहली रुलाई पर हर एक अपने ज़िम्मे लेता है — और साथ में वह मिनटों का समय भी, जो इस अदला-बदली को उल्लेखनीय बना देता है।

हल

हल — अभ्यास 58.12.

नाल ऑक्सीजन की लदाई, कार्बन डाइऑक्साइड का हटाव, पोषक तत्वों की आपूर्ति और कचरे की सफ़ाई सँभालती थी। पहली रुलाई पर दोनों गैसें फेफड़े ले लेते हैं; आपूर्ति आँत (पहले दूध से) ले लेती है; और सफ़ाई गुर्दे — और यह सब रज्जु कटने के मिनटों के भीतर, यानी सरहदों का वह हस्तांतरण, जो हर अंग को पहली ही कोशिश में पास करना होता है, और ठीक इसी पर प्रसव-कक्ष की जाँच-सूची नज़र रखती है।

58.5 समस्या: दाई की समय-रेखा

समस्या 58.1

सप्ताहांत समस्या — एक गर्भावस्था, मुलाक़ात-दर-मुलाक़ात देखी हुई

एक (कल्पित) गर्भावस्था की दाई वाली फ़ाइल: आठवें हफ़्ते में पहली दर्ज मुलाक़ात, बारहवें और बीसवें हफ़्ते में अल्ट्रासाउंड, अट्ठाईसवें तथा छत्तीसवें में जाँच, और चालीसवें हफ़्ते में जन्म। इस फ़ाइल को अध्याय के साज़ों से पढ़ो।

भाग I — फ़ाइल के शुरुआती पन्ने।

  1. गर्भावस्था की पुष्टि पहली मुलाक़ात से हफ़्तों पहले एक हॉर्मोन-जाँच से हुई थी। ऐसी जाँच कौन-सा इशारा पढ़ती है, और प्रतिज्ञप्ति 58.1 की किस घटना के बाद से वह मौजूद होता है?
  2. आठवें हफ़्ते पर दाई लिखती है “भ्रूण नक़्शे के हिसाब से पूरा, लगभग सेम के दाने जितना”। इसे समय-सारणी की भाषा में उतारो — यहाँ कौन-सा चरण बंद होता है?
  3. पहली दर्ज मुलाक़ात की सलाह सबसे ऊपर यही रखती है: कोई शराब नहीं, कोई धुआँ नहीं — और फ़ोलिक अम्ल, यानी उसारी वाला एक विटामिन, “बेहतर हो तो शुरुआत से भी पहले से”। तीनों का औचित्य उदाहरण 58.5 से दो।
  4. बारहवें हफ़्ते का अल्ट्रासाउंड वह धड़कन दिखाता है जो चौथे हफ़्ते में शुरू हुई थी। आपूर्ति की भाषा में, इतनी जल्दी क्यों?

भाग II — बीच के महीने।

  1. बीसवें हफ़्ते का अल्ट्रासाउंड हर अंग और नाल की जगह नापता है। गर्भस्थ शिशु वाले चरण का काम बताओ, और नाल के वे तीनों काम भी जिनकी जाँच हो रही है।
  2. माँ अठारहवें हफ़्ते के आस-पास पहली लातों की ख़बर देती है। कौन-सी मशीनरी अपना ऐलान कर रही है (प्रतिज्ञप्ति 33.2 उस कड़ी का नाम बताती है)?
  3. अट्ठाईसवें हफ़्ते पर दाई माँ के रक्त की शर्करा और दबाव जाँचती है। माँ का रक्त-चक्र दोहरे बोझ में क्यों है — वह किन-किन की सरहदें चला रहा है?
  4. हफ़्ते 30–36: गर्भस्थ शिशु मुख्य रूप से बढ़ता है और फेफड़े रिहर्सल करते हैं। रिहर्सल किस चीज़ की — और वह भी किस अकेले पल के लिए?

भाग III — आख़िरी पन्ना।

  1. चालीसवाँ हफ़्ता: प्रसव-पीड़ा। उस पेशी का नाम बताओ, उसके दोनों काम, और यह भी कि हुक्म किसने दिया (प्रतिज्ञप्ति 58.6)।
  2. फ़ाइल की जन्म वाली प्रविष्टि: “फ़ौरन ज़ोरदार रुलाई; रज्जु बाँधकर काटी गई; नाल पूरी निकली।” इन तीनों उपवाक्यों की जाँच अदला-बदली से करो।
  3. नवजात मिनटों वाली जाँच-सूची पर ऊँचे अंक पाता है। उदाहरण 58.7 की भाषा में बताओ कि वह जाँच-सूची किस बात की गवाही देती है।
  4. फ़ाइल को माता-पिता के लिए एक वाक्य से बंद करो: उन चालीस हफ़्तों ने किस अकेली कोशिका से, किस मशीनरी के ज़रिए, क्या बना दिया।
हल

हल — समस्या 58.1.

1. वे गर्भावस्था के हॉर्मोन, जो आरोपण के साथ शुरू होते हैं — यानी जम चुके किरायेदार का रासायनिक इशारा; और सातवें दिन के आस-पास से वे पढ़े जाने लायक़ मौजूद होते हैं।

2. भ्रूण वाला चरण बंद होता है: हफ़्ते 1–8 ने पूरा नक़्शा बिछा दिया — हर अंग शुरू, और आकार सेम के दाने जितना। अब गर्भस्थ शिशु वाला चरण — यानी बनावट और पकाई — शुरू होता है।

3. शराब और धुआँ उस मुसाफ़िर तक पार कर जाते हैं, और नक़्शा बिछाने वाले हफ़्ते बिगड़े निर्देशों के आगे सबसे कमज़ोर होते हैं; फ़ोलिक अम्ल वह सामान है जिसे सबसे शुरुआती उसारी खींचती है — और चूँकि वे हफ़्ते बिना पता चले बीत सकते हैं, इसलिए उस विटामिन का “शुरुआत से भी पहले” वही गणित है जो उन परहेज़ों का है।

4. नाल वाली अर्थव्यवस्था को अपना पंप शुरू से चाहिए था: पहुँचाई जाने वाली चीज़ें बिना धड़कते दिल के घूम ही नहीं सकतीं, इसलिए सबसे पहले वही मशीन चालू होती है — और बारहवें हफ़्ते के अल्ट्रासाउंड की वह फड़कन वही है, अपनी दौड़ के आठ हफ़्ते पूरे किए हुए।

5. गर्भस्थ शिशु वाला चरण: बिछे हुए नक़्शे की बढ़त और पकाई। और नाल की जाँच फेफड़े (गैसों की अदला-बदली), आँत (आपूर्ति) तथा गुर्दे (सफ़ाई) के रूप में होती है — यानी उस मुसाफ़िर की तीनों सरहदें एक ही तश्तरी में, और साथ ही उसकी जगह भी, कि वह निकास से हटकर हो।

6. ख़बर-फ़ैसला-हुक्म वाला वह फंदा: तंत्रिका के हुक्म पर सिकुड़ती पेशियाँ — यानी सेनापति की जुड़ाई और उसकी मोटरें, गर्भाशय की दीवार से होकर अपना ऐलान करती हुईं।

7. क्योंकि वह दो ग्राहकों की सरहदें चला रहा है: ख़ुद उसके अपने शरीर की, और — नाल की आवाजाही से होकर — उस मुसाफ़िर की भी। शर्करा और दबाव यही पढ़ते हैं कि यह दोगुना बोझ कैसे ढोया जा रहा है।

8. बिना हवा के साँस वाली गतियाँ — यानी धौंकनी की ख़ाली प्रैक्टिस, जिसमें पेशियाँ और प्रतिवर्त पहली रुलाई के उस अकेले पल के लिए तैयार होते हैं, जब उस अंग को पहली ही कोशिश में काम करना है।

9. गर्भाशय — यानी शरीर की सबसे ताक़तवर पेशी; उसके काम: रास्ता खोलना, और शिशु को नली में नीचे धकेलना; और हुक्म हॉर्मोनों के रूप में आए, यानी शिशु और माँ के रसायन की आपसी बातचीत से।

10. रुलाई: फेफड़े भरे और चालू — यानी पहली सरहद हस्तांतरित। रज्जु का बाँधा और काटा जाना: नाल की आवाजाही ख़त्म। नाल का पूरा निकलना: वह एक ही इस्तेमाल वाला अंग पूरी तरह अलग — यानी अदला-बदली बंद, और पीछे कुछ भी छूटा नहीं।

11. यह कि आपूर्ति-और-हटाव वाला फंदा — फेफड़े, पंप, पहुँचाना, सेनापति — अकेले चल रहा है: यानी उस मशीन की पहली जाँच, जिसका नक़्शा इस किताब ने दो कक्षाएँ लगाकर बनाया।

12. “चालीस हफ़्तों ने एक ही निषेचित अंडाणु से तीन हज़ार अरब विशेषज्ञ कोशिकाएँ बना दीं — और वह भी बँटने, विशेषज्ञ बनने तथा हॉर्मोनों से चले दफ़्तर के ज़रिए, और एक उल्लेखनीय तश्तरी के पार आपूर्ति पाकर।”

इस अध्याय में परिभाषित शब्द

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