सदिश विस्थापन समेटते हैं; रेखाएँ उनके पथ हैं। इस अध्याय का प्रमुख नया औज़ार सारणिक है, एक अकेली संख्या जो तय कर देती है कि दो सदिशसंरेखी हैं या नहीं — और वहीं से रेखाओं के समीकरण बनाती है तथा संरेखण और समांतरता के प्रश्न शुद्ध गणना से सुलझा देती है। वही विचार अध्याय 31 में अंतरिक्ष तक बढ़ते हैं।
15.1 सदिश: एक पुनरावलोकन
परिभाषा 15.1(सदिश, निर्देशांक)
सदिशu किसी विस्थापन को दर्शाता है: एक ही दिशा, ढंग और लंबाई वाले सभी तीर एक ही सदिश दर्शाते हैं। किसी निर्देशांक-पद्धति में u(x,y) विस्थापन दर्ज करता है (क्षैतिज दिशा में x, ऊर्ध्वाधर दिशा में y); और बिंदुओं A(xA,yA) तथा B(xB,yB) के लिए
AB(xB−xA,yB−yA).
सदिश निर्देशांक-दर-निर्देशांक जुड़ते हैं, और λu के निर्देशांक(λx,λy) हैं।
उपपत्ति.M का अभिलक्षण AM=21AB है: निर्देशांक-दर-निर्देशांक xM−xA=21(xB−xA), इसलिए xM=2xA+xB, और yM के लिए भी वैसे ही। ∎
15.2 संरेखता और सारणिक
परिभाषा 15.3(संरेखी सदिश)
दो सदिशसंरेखी हैं यदि उनमें से एक दूसरे का अदिश गुणज हो: किसी λ∈R के लिए v=λu (या u=0)। ज्यामितीय रूप से: उनकी दिशा एक ही है, या उनमें से एक शून्य है।
परिभाषा 15.4(सारणिक)
u(x,y) और v(x′,y′) का सारणिक है
det(u,v)=xyx′y′=xy′−x′y.
प्रमेय 15.5(संरेखता की कसौटी)
दो सदिशu और vसंरेखी हैं यदि और केवल यदि det(u,v)=0 हो।
उपपत्ति. (⇒) यदि v=λu हो, तो x′=λx और y′=λy, इसलिए det(u,v)=x(λy)−(λx)y=0; और यदि u=0 हो, तो सारणिक स्पष्टतः 0 है।
(⇐) मान लीजिए xy′−x′y=0 और u=0 है, मान लीजिए x=0 (स्थिति y=0 सममित है)। λ=xx′ रखिए। तब रचना से x′=λx, और संबंध xy′=x′y=λxy से, x=0 से भाग देने पर, y′=λy मिलता है। अतः v=λu। ∎
उदाहरण 15.6
u(3,−2) और v(−6,4): det=3×4−(−6)×(−2)=12−12=0, संरेखी (सचमुच v=−2u)। u(3,−2) और w(2,1): det=3+4=7=0, संरेखी नहीं।
विधि 15.7(तीन बिंदुओं का संरेखण)
A, B, C संरेख हैं यदि और केवल यदि AB और ACसंरेखी हों: दोनों सदिश निकालिए और det(AB,AC)=0 जाँचिए।
15.3 रेखाओं के कार्तीय समीकरण
परिभाषा 15.8(दिक् सदिश)
रेखा d का दिक् सदिश कोई भी शून्येतर सदिशu है जिसके लिए d के सभी बिंदुओं A,B हेतु ABu के संरेखी हो।
जो घोषित रूप का समीकरण है, जहाँ c=−(axA+byA) है। इसके उलट, मान लीजिए b=0 के साथ ax+by+c=0 के हल बिंदु (x,−bax+c) हैं: उनमें से दो को घटाने पर पता चलता है कि हर जीवा (−b,a) की संरेखी है, और कोई एक हल सदा मौजूद है — यह वही रेखा है जो उससे होकर जाती है और (−b,a) द्वारा दिशित है। ∎
विधि 15.10(दो बिंदुओं से जाने वाली रेखा)
रेखा (AB) का समीकरण ज्ञात करने के लिए: दिक् सदिशAB(xB−xA,yB−yA) निकालिए; उसे (−b,a) से मिलाइए, अर्थात् a=yB−yA और b=−(xB−xA) लीजिए; और A के निर्देशांक रखकर c ज्ञात कीजिए।
उदाहरण 15.11
A(1,2) और B(4,3) से होकर जाने वाली रेखा: AB(3,1), इसलिए a=1, b=−3, और समीकरणx−3y+c=0 है। A रखने पर: 1−6+c=0, इसलिए c=5। समीकरण: x−3y+5=0। B से जाँच: 4−9+5=0।
टिप्पणी 15.12
जब b=0 हो, तब समीकरण को y के लिए हल किया जा सकता है: प्रवणताm=−ba वाला y=mx+p। कार्तीय रूप ax+by+c=0 अधिक व्यापक है: वह ऊर्ध्वाधर रेखाओं (b=0) को भी समेट लेता है, जिनकी कोई प्रवणता नहीं होती।
उदाहरण 15.11 की रेखा x−3y+5=0, उसका दिक् सदिशu=AB (लाल, यहाँ 21 गुना बड़ा किया हुआ), और समीकरण बनाने में काम आए दोनों बिंदु।
15.4 प्राचलिक निरूपण
परिभाषा 15.13(प्राचलिक निरूपण)
A(xA,yA) से होकर दिशा u(α,β) में जाने वाली रेखा बिंदुओं का यह समुच्चय है
M(xA+tα,yA+tβ),t∈R.
संख्या tप्राचल है: t का हर मान रेखा का एक बिंदु देता है, मानो उस पर अचर चाल u से चला जा रहा हो।
उदाहरण 15.14
उदाहरण 15.11 की रेखा {(1+3t,2+t):t∈R} भी है: t=0 से A मिलता है, t=1 से B। t का विलोपन करने पर (t=y−2, इसलिए x=1+3(y−2)) x−3y+5=0 फिर मिल जाता है।
15.5 दो रेखाओं की सापेक्ष स्थिति
प्रतिज्ञप्ति 15.15(समांतर या प्रतिच्छेदी)
दिक् सदिशu और v वाली दो रेखाएँ समांतर हैं यदि और केवल यदि det(u,v)=0 हो। समीकरण के रूप में: d:ax+by+c=0 और d′:a′x+b′y+c′=0समांतर हैं यदि और केवल यदि ab′−a′b=0 हो। असमांतर रेखाएँ ठीक एक बिंदु पर मिलती हैं।
उपपत्ति. समांतरता का अर्थ है दिशाओं का संरेखी होना, अर्थात् प्रमेय 15.5; और u(−b,a) तथा v(−b′,a′) के साथ सारणिक(−b)a′−(−b′)a=ab′−a′b है। यदि रेखाएँ समांतर न हों, तो दोनों समीकरणों को एक साथ हल करने पर (प्रतिस्थापन या संयोजन से) अद्वितीय हल मिलता है: निकाय शून्येतर सारणिक वाले 2×2 निकाय की तरह व्यवहार करता है। ∎
विधि 15.16(दो रेखाओं का प्रतिच्छेद)
दोनों समीकरणों का निकाय हल कीजिए: एक समीकरण में एक अज्ञात अलग कीजिए और दूसरे में रखिए, या समीकरणों को मिलाकर एक अज्ञात का विलोप कीजिए। मिले हुए बिंदु की जाँच सदा दोनोंसमीकरणों में कीजिए।
उदाहरण 15.17
d:x−3y+5=0 और d′:2x+y−4=0 का प्रतिच्छेद निकालिए। d′ से: y=4−2x। d में रखने पर:
x−3(4−2x)+5=0⟺x−12+6x+5=0⟺7x=7⟺x=1,
फिर y=2। रेखाएँ (1,2) पर मिलती हैं। d में जाँच: 1−6+5=0।
15.6 अभ्यास
अभ्यास 15.1★
A(2,−1), B(5,3) और C(−1,1) दिए हों, तो AB, AC, AB+AC और 2AB−3AC के निर्देशांक तथा [BC] का मध्यबिंदु निकालिए।
हल
हल — अभ्यास 15.1.
AB(3,4), AC(−3,2), AB+AC(0,6), 2AB−3AC(6+9,8−6)=(15,2)। [BC] का मध्यबिंदु(25+(−1),23+1)=(2,2) है।
A(2,1) से होकर दिक् सदिशu(3,−1) वाली रेखा का, और फिर B(0,4) तथा C(2,0) से होकर जाने वाली रेखा का कार्तीय समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल
हल — अभ्यास 15.3.
A(2,1) से होकर, दिशा (3,−1): (−b,a)=(3,−1) से मिलाने पर a=−1, b=−3 मिलते हैं, इसलिए −x−3y+c=0; A रखने पर: −2−3+c=0, c=5। −1 से गुणा करने पर: x+3y−5=0।
B(0,4) और C(2,0) से होकर: BC(2,−4), इसलिए a=−4, b=−2: −4x−2y+c=0; B रखने पर: −8+c=0, c=8। −2 से सरल करने पर: 2x+y−4=0। C से जाँच: 4+0−4=0।
अभ्यास 15.4★
रेखा d:3x−2y+6=0 के लिए एक दिक् सदिश और दोनों निर्देशांक-अक्षों के साथ प्रतिच्छेद बताइए, और तय कीजिए कि बिंदु P(2,6) तथा Q(1,4)d के हैं या नहीं।
हल
हल — अभ्यास 15.4.
एक दिक् सदिश(−b,a)=(2,3) है। प्रतिच्छेद: x=0 से y=3 मिलता है, बिंदु (0,3); y=0 से x=−2, बिंदु (−2,0)। P(2,6) के लिए: 3×2−2×6+6=0, इसलिए P∈d। Q(1,4) के लिए: 3−8+6=1=0, इसलिए Q∈/d।
अभ्यास 15.5★★
क्या बिंदु A(1,2), B(4,8), C(−2,−4) संरेख हैं? यही प्रश्न D(0,1), E(2,4), F(5,9) के लिए।
हल
हल — अभ्यास 15.5.
AB(3,6) और AC(−3,−6): det=3×(−6)−(−3)×6=0, इसलिए A, B, C संरेख हैं।
DE(2,3) और DF(5,8): det=2×8−5×3=1=0: D, E, F संरेख नहीं हैं।
अभ्यास 15.6★★
प्रतिच्छेद बिंदु, यदि हो तो, ज्ञात कीजिए:
d:2x+y−7=0औरd′:x−y+1=0;e:x−2y+3=0औरe′:−2x+4y+1=0.
हल
हल — अभ्यास 15.6.
पहला युग्म: दोनों समीकरण जोड़ने पर (2x+y−7)+(x−y+1)=3x−6=0, इसलिए x=2, फिर y=x+1=3: वे (2,3) पर मिलती हैं (जाँच: 4+3−7=0)।
दूसरा युग्म: ab′−a′b=1×4−(−2)×(−2)=0, इसलिए रेखाएँ समांतर हैं; e को −2 से गुणा करने पर −2x+4y−6=0 मिलता है, जो e′ से भिन्न है (−6=1): कड़ाई से समांतर, कोई प्रतिच्छेद नहीं।
अभ्यास 15.7★★
रेखा d:2x−y+3=0 का प्राचलिक निरूपण, और रेखा {(1+2t,−3+t):t∈R} का कार्तीय समीकरण बताइए।
हल
हल — अभ्यास 15.7.
d:2x−y+3=0 के लिए: दिशा (−b,a)=(1,2), और बिंदु (0,3)d पर है, इसलिए d={(t,3+2t):t∈R}।
(1,−3) से होकर दिशा (2,1) वाली प्राचलिक रेखा के लिए: a=1, b=−2, इसलिए x−2y+c=0; (1,−3) रखने पर: 1+6+c=0, c=−7। समीकरण: x−2y−7=0 (t=1 से जाँच, बिंदु (3,−2): 3+4−7=0)।
अभ्यास 15.8★★
P(1,−2) से होकर d:4x−3y+2=0 के समांतर जाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए, और m का वह मान भी जिसके लिए रेखा mx+2y−5=0d के समांतर हो।
हल
हल — अभ्यास 15.8.
समांतर रेखा का (a,b) वही रहता है: 4x−3y+c=0; P(1,−2) से होकर: 4+6+c=0, इसलिए c=−10, और रेखा 4x−3y−10=0 है।
mx+2y−5=0 का d के समांतर होना ab′−a′b=4×2−m×(−3)=8+3m=0 माँगता है, इसलिए m=−38।
अभ्यास 15.9★★
मान लीजिए A(−1,0), B(3,2) और C(1,−4) हैं। त्रिभुज ABC की C से खींची गई माध्यिका का कार्तीय समीकरण ज्ञात कीजिए (वह रेखा जो C को [AB] के मध्यबिंदु से जोड़ती है)।
हल
हल — अभ्यास 15.9.
[AB] का मध्यबिंदुM(2−1+3,20+2)=(1,1) है। माध्यिकाC(1,−4) वाली रेखा (CM) है: दोनों बिंदुओं का भुज1 है, इसलिए माध्यिका ऊर्ध्वाधर रेखा है
x−1=0.
अभ्यास 15.10★★
प्राचल m के किन मानों के लिए सदिशu(m,2) और v(3,m−1)संरेखी हैं?
हल
हल — अभ्यास 15.10.
det(u,v)=m(m−1)−3×2=m2−m−6। वह m2−m−6=0 होने पर लुप्त होता है: Δ=1+24=25, मूलm=21±5, अर्थात् m=3 या m=−2।
अभ्यास 15.11★★★
मान लीजिए ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, I[AB] का मध्यबिंदु है, और J वह बिंदु है जो DJ=32DI से परिभाषित होता है। उस निर्देशांक-पद्धति में काम कीजिए जिसमें A(0,0), B(1,0), D(0,1) हों (जिससे C(1,1)):
दिखाइए कि A, J और C संरेख हैं। (एक सुंदर तथ्य: रेखा (DI) विकर्ण (AC) को नीचे से एक-तिहाई पर काटती है।)
हल
हल — अभ्यास 15.11.
1.I=(21,0)। तब DI=(21−0,0−1)=(21,−1) और DJ=32DI=(31,−32), इसलिए
J=D+DJ=(31,31).
2.AJ(31,31) और AC(1,1): det=31×1−1×31=0, इसलिए A, J, C संरेख हैं — वस्तुतः AJ=31AC: रेखा (DI) विकर्ण (AC) को A से ठीक एक-तिहाई लंबाई पर काटती है।
15.7 समस्या: टक्कर के रास्ते और चतुर निर्देशांक
समस्या 15.1
सप्ताहांत समस्या — रास्तों का कटना टकराना नहीं है: समुद्र में निकटतम पहुँच, और सही ढाँचा चुनकर सिद्ध की गई प्रमेय
दो जहाज़ों के सीधे रास्ते एक-दूसरे को काटते हैं — तो क्या जहाज़ों का टकराना अनिवार्य है? तब तक नहीं, जब तक वे कटान-बिंदु पर एक ही समय न पहुँचें: रास्ते बिंदुओं के समुच्चय हैं, गतियाँ प्राचलिक हैं, और इन दोनों को गड्डमड्ड कर देना सचमुच जहाज़ डुबो चुका है। यह समस्या प्राचलिक रेखाओं (परिभाषा 15.13) पर एक छोटी-सी पोत-यातायात सेवा चलाती है, और फिर निर्देशांकों की दूसरी महाशक्ति के साथ शुद्ध ज्यामिति की ओर मुड़ती है: उन्हें चतुराई से चुनना, जैसा अभ्यास 15.11 में हुआ, ताकि चिरपरिचित प्रमेय स्वयं अपनी गणना कर लें।
भाग I — रेखाएँ, तीन तरह से।
A(1,2) से होकर दिक् सदिशu(3,−1) वाली रेखा का प्राचलिक निरूपण दीजिए, फिर प्राचल का विलोप करके कार्तीय समीकरण प्राप्त कीजिए।
रेखा 2x−5y+3=0 के लिए: एक दिक् सदिश पढ़िए (प्रमेय 15.9), एक बिंदु ज्ञात कीजिए, और प्राचलिक निरूपण लिखिए।
प्रश्न 1 और 2 की दोनों रेखाओं का प्रतिच्छेद बिंदु निकालिए (विधि 15.16)।
सारणिक (प्रमेय 15.5) से पुष्टि कीजिए कि उन दोनों रेखाओं का मिलना अनिवार्य था; फिर दिखाइए कि 2x−5y+3=0 और −4x+10y+1=0 कड़ाई से समांतर हैं।
क्या A(2,1), B(5,3), C(11,7) संरेख हैं (विधि 15.7)?
भाग II — पोत-यातायात सेवा। समय t (घंटों में) पर जहाज़ P(2t,3+t) पर है और जहाज़ Q(10−t,2t−1) पर (दूरियाँ नाविक मील में)।
दोनों रास्तों के कार्तीय समीकरण ज्ञात कीजिए, और निकालिए कि रास्ते कहाँ कटते हैं।
हर जहाज़ उस कटान-बिंदु से किस समय गुज़रता है? क्या जहाज़ टकराते हैं? एक वाक्य में सामान्य चेतावनी बताइए: रास्तों का कटना बनाम गतियों का मिलना।
समय t पर दोनों जहाज़ों के बीच वर्ग-दूरी D2(t) निकालिए और उसे t में द्विघात के रूप में लाइए। जहाज़ किस समय सबसे पास होते हैं, और कितने पास आते हैं (समस्या 10.1 की शीर्ष-तकनीक)?
नियम कम से कम 1 मील की दूरी माँगते हैं। क्या उनका उल्लंघन होता है? यदि हाँ, तो D2(t)<1 हल कीजिए और उल्लंघन की अवधि बताइए।
समझाइए कि अचर चालों से सीधे रास्तों पर चलने वाले किन्हीं भी दो जहाज़ों के लिए D2(t)t का द्विघात फलन ही क्यों होता है — इसलिए “निकटतम पहुँच बिंदु” सदा एक शीर्ष-गणना ही है।
अवरोधन: एक गश्ती नौका t=0 पर मूल बिंदु से अचर वेग (a,b) के साथ चलती है और उसे जहाज़ P से ठीक t=3 पर मिलना है। आवश्यक (a,b) और गश्ती नौका की चाल निकालिए।
भाग III — चतुर निर्देशांक।अभ्यास 15.11 के ढाँचे में काम कीजिए: समांतर चतुर्भुज ABCDA(0,0), B(1,0), C(1,1), D(0,1) बन जाता है; मान लीजिए I[AB] का मध्यबिंदु है और K[CD] का।
(DI) को विकर्ण (AC) से काटिए: अभ्यास 15.11 वाला तथ्य फिर से मिल जाता है — कटान ठीक विकर्ण के नीचे से एक-तिहाई पर है।
अब रेखा (BK): उसका समीकरण ज्ञात कीजिए, (AC) से काटिए, और पूरी चिरपरिचित प्रमेय का निष्कर्ष निकालिए: चेवियन (DI) और (BK) विकर्ण (AC) को त्रिभाजित कर देते हैं।
इस एक विशेष ढाँचे में प्रमेय सिद्ध करना उचित क्यों था? (निर्देशांकों का चुनाव किसे बनाए रखता है, और कथन में क्या-क्या आता है?) दो-तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए।
अभ्यास के लिए एक और त्रिभाजन: मान लीजिए E[BC] का मध्यबिंदु है। रेखा (AE)दूसरे विकर्ण (DB) को कहाँ काटती है?
भाग IV — स्थिति की पहेलियाँ।
क्या तीनों रेखाएँ x+y=4, 2x−y=2, x−2y=−2 संगामी हैं? (दो को काटिए और तीसरी पर जाँचिए।)
हर वास्तविक m के लिए मान लीजिए dm रेखा mx−y+2−3m=0 है। दिखाइए कि हरdm एक ही नियत बिंदु से होकर जाती है। (m में पद समूहित कीजिए।)
परिवार (dm) में: कौन-सी सदस्य रेखा y=2x+7 के समांतर है? कौन-सी मूल बिंदु से होकर जाती है?
समापन — रेखा के तीन वेश: कार्तीय (एक प्रतिस्थापन में सदस्यता की जाँच), संक्षिप्त (प्रवणता और आलेख एक नज़र में), प्राचलिक (गति, समय, अवरोधन); समांतरता के भविष्यवक्ता के रूप में सारणिक; और प्रमेय बनाने के कारख़ाने के रूप में सोच-समझकर चुना गया ढाँचा। हर एक पर एक वाक्य।
हल
हल — समस्या 15.1.
1.x=1+3t, y=2−t। दूसरे से t=2−y; प्रतिस्थापन करने पर: x=1+3(2−y)=7−3y: कार्तीय समीकरणx+3y−7=0।
2.ax+by+c=0 के लिए एक दिक् सदिश(−b,a) है: यहाँ (5,2)। एक बिंदु: y=1 से x=1 मिलता है: (1,1)। प्राचलिक: x=1+5t, y=1+2t।
3.2x−5y+3=0 में x=7−3y से: 14−6y−5y+3=0, इसलिए y=1117 और x=7−1151=1126: बिंदु (1126,1117)।
4. दिशाएँ (5,2) और (3,−1): det=5×(−1)−2×3=−11=0: प्रतिच्छेदी, जैसा मिला था। दूसरे युग्म के लिए: दिशाओं (5,2) और (10,4) का det=0 है (समांतर), और 2x−5y+3=0 को दुगुना करने पर −4x+10y−6=0=−4x+10y+1=0 मिलता है: कड़ाई से समांतर।
5.AB(3,2), AC(9,6): det=18−18=0: संरेख।
6.P: x=2t से y=3+t: y=3+2x। Q: x=10−t से: t=10−x, इसलिए y=2(10−x)−1=19−2x। कटान: 3+2x=19−2x से x=6.4, y=6.2 मिलता है: रास्ते (6.4,6.2) पर कटते हैं।
7.P वहाँ तब गुज़रता है जब 2t=6.4 हो: t=3.2 घंटे। Q तब जब 10−t=6.4 हो: t=3.6 घंटे। चौबीस मिनट का अंतर: कोई टक्कर नहीं। चेतावनी: नक्शा रास्ते दिखाता है; केवल प्राचलिक घड़ियाँ बताती हैं कि दो गतियाँ एक ही क्षण एक ही बिंदु पर हैं या नहीं।
8.D2(t)=(3t−10)2+(4−t)2=10t2−68t+116: शीर्ष t=2068=3.4 घंटे पर, जहाँ D2=0.4: निकटतम पहुँच t=3.4 पर D=0.4≈0.63 मील।
9. उल्लंघन हुआ: 0.63<1। D2(t)<1 का अर्थ है 10t2−68t+115<0: Δ=4624−4600=24, मूल2068±24=3.4±0.245: जहाज़ t≈3.16 से t≈3.64 तक बहुत पास रहते हैं — लगभग 29 मिनट का उल्लंघन। उनमें से एक को रास्ता बदलना पड़ेगा।
10. हर जहाज़ का हर निर्देशांकt का एकघातफलन है, इसलिए निर्देशांकों का हर अंतर भी एकघात है, और D2 — दो वर्ग किए गए एकघात फलनों का योग — एक द्विघात है (जिसका अग्र गुणांक अऋणात्मक है)। अतः निकटतम पहुँच सदा किसी शीर्ष से ही पढ़ी जाती है।
11.t=3 पर, अर्थात् (6,6) पर, P से मिलना: (3a,3b)=(6,6) से (a,b)=(2,2) मिलता है, चाल 8≈2.8 नॉट।
12.D(0,1), I(21,0): दिशा (21,−1), अर्थात् (1,−2): समीकरण2x+y=1।
13.(AC): y=x। फिर 2x+x=1: x=31: बिंदु (31,31), जो A से C तक एक-तिहाई दूरी पर है।
14.B(1,0), K(21,1): दिशा (−21,1), समीकरण2x+y=2। y=x के साथ: x=32: बिंदु (32,32)। दोनों चेवियन (AC) को उसके दोनों त्रिभाजन बिंदुओं पर काटते हैं: प्रमेय सिद्ध, दो बार तीन-तीन पंक्तियों के अंकगणित से।
15. किसी भी समांतर चतुर्भुज को इकाई वर्ग पर ले जाया जा सकता है — इसके लिए A को मूल बिंदु और AB, AD को दोनों अक्षों के मात्रक चुन लीजिए। वह चुनाव उन सब बातों को बनाए रखता है जिनकी प्रमेय बात करती है — मध्यबिंदु, संरेखण, और किसी दी हुई रेखा पर अनुपात (जो सब सदिशों और अदिशों से व्यक्त होते हैं) — इसलिए वर्ग में कथन सिद्ध कर देना उसे हर समांतर चतुर्भुज के लिए सिद्ध कर देता है। (वह लंबाइयाँ या कोण नहीं ढोता: उन्हें यह ढाँचा बिगाड़ देता है।)
16.E(1,21): रेखा (AE): y=2x। विकर्ण (DB): (0,1) से (1,0) तक: y=1−x। प्रतिच्छेद: 2x=1−x: x=32: बिंदु (32,31) — फिर एक त्रिभाजन बिंदु, अब दूसरे विकर्ण का। मध्यबिंदु वाले चेवियन तिहाइयों के प्रेमी हैं।
17. पहली दो: x+y=4 और 2x−y=2 से 3x=6 मिलता है: (2,2)। तीसरी: 2−4=−2: संतुष्ट। (2,2) पर संगामी।
18.mx−y+2−3m=m(x−3)+(2−y)=0: समीकरणहरm के लिए सही रहे, इसके लिए x=3, y=2 लीजिए — और सचमुच हर dm में (3,2) आता है। एक ही बिंदु से गुज़रती रेखाओं का एक गुच्छा, हर प्रवणताm के लिए एक रेखा।
19.y=2x+7 के समांतर: प्रवणताm=2, रेखा 2x−y−4=0। मूल बिंदु से होकर: 2−3m=0: m=32।
20. कार्तीय: कोई बिंदु रखिए, सदस्यता का उत्तर मिल गया। संक्षिप्त: प्रवणता और अंतःखंड दिखते हैं, आलेख तुरंत। प्राचलिक: घड़ी भीतर ही बनी हुई — टक्करें, निकटतम पहुँच, अवरोधन। सारणिक: एक तिर्यक गुणन, और समांतरता का फ़ैसला। और चुना हुआ ढाँचा: समांतर चतुर्भुज इकाई वर्ग बन जाता है, और एक चिरपरिचित त्रिभाजन प्रमेय रेखाओं के तीन प्रतिच्छेदों में बदल जाती है।